शिवसेना और बीजेपी नेता की मुलाकात का मतलब!

 

सभी को सत्ता की भूख क्यों?

‘राजनीति में ना तो दोस्त होता है और ना ही कोई
 दुश्मन’ यह हम नहीं कह रहे है बल्कि जो हमें राजनीति में दिखता आ रहा है बस उसी का उदाहरण दे रहेहै। सत्ता का सुख हर किसी को चाहिए इसलिए नेता किसी भी एक फार्मूले पर कभी भी नहीं चलते है बल्कि समय के साथ साथ दोस्ती, दुश्मनी और फार्मूला बदलते रहते है। सत्ता में ऐसा क्या है जो सभी को इसकी लालसा रहती है? अगर हम संविधान की नजरों से देखें तो यह एक प्रतिनिधि होते है जो जनता का प्रतिनिधित्व करते है और जनता की परेशानी को समाप्त करना इनका काम होता है। कोई भी सरकार सिर्फ देश के विकास और जनता की भलाई के लिए बनाई जाती है लेकिन अब यह बात सिर्फ किताबों में रह गयी है। 
 
एक मुलाकात से महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने अब तक की दुश्मन पार्टी रही कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर नवंबर 2019 में सत्ता संभाली और महाराष्ट्र के शिवसेना के पहले मुख्यमंत्री बन गये लेकिन 10 महीने की सरकार में कभी पूरी तरह से शांति नहीं नजर आयी और हमेशा आंतरिक विरोध दिखायी दिया। खबरों की मानें तो गठबंधन की तीनों पार्टियों में टूटने का भय लगातार बना हुआ है और वह किसी पर भी पूर्णरुप से भरोसा नहीं कर पा रहे है इसलिए बीच बीच में ख़बरें भी आती रहती है। हालिया मामला महाराष्ट्र के पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस और संजय राउत की मुलाकात को लेकर तूल पकड़ता जा रहा है। महाराष्ट्र में बीजेपी विपक्ष में है और सुशांत सिंह राजपूत की मौत को लेकर लगातार शिवसेना सरकार पर हमलावर हुई है लेकिन इसी बीच अचानक से खबर आती है कि शिवसेना नेता संजय राउत और देवेंद्र फडणवीस की एक होटेल में मुलाकात होती है जिसके बाद से राजनीति में भूचाल सा आ जाता है और सबसे पहले कांग्रेस को इस बात का डर होता है कि वह सत्ता से बाहर हो जायेगी। 
 
‘शिवसेना कभी भी दे सकती है धोका’
कांग्रेस नेता संजय निरुपम ने इस मुलाकात को लेकर अपनी ही पार्टी को चेतावनी जारी की और कहा कि इस मुलाकात के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े परिवर्तन के आसार बन सकते है। संजय निरुपम ने इशारा किया कि एक बार फिर से महाराष्ट्र में शिवसेना और बीजेपी का गठबंधन हो सकता है। निरुपम ने शिवसेना सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि केंद्र की मोदी सरकार ने हाल ही में किसानों के लिए एक बिल लाया जिसका कांग्रेस और एसीपी ने विरोध किया था लेकिन शिवसेना की उद्धव सरकार ने बिल का स्वागत किया है जिससे यह साफ होता है कि शिवसेना अब भी बीजेपी के ही साथ है। संजय निरुपम ने कहाकि कांग्रेस ने अपना विचार, धर्म और निजी स्वार्थ छोड़कर जिस शिवसेना का साथ दिया वह कभी भी धोका दे सकती है। 
 
राउत की मुलाकात पर सफाई
संजय राउत और फडणवीस की मुलाकात को लेकर विवाद इतना बढ़ा की संजय राउत को इस पर सफाई देनी पड़ी और उन्होने कहा कि “इस मुलाकात का कोई भी राजनीतिक मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए, देवेंद्र फडणवीस को सामना के इंटरव्यू के लिए बुलाया था, वह राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता है उनसे मिलना कोई गुनाह नही है। हमारे बीच मतभेद हो सकता है मनभेद नहीं, फडणवीस हमारे दुश्मन नही है” 
 
इस मुलाकात को लेकर दोनों ही पार्टियों की तरफ से सफाई तो पेश की गयी है लेकिन फिर भी लोगों को यह बात शायद हजम नही हो रही है क्योंकि अभी कुछ दिनों तक दोनों ही पार्टियों के बीच सुशांत सिंह राजपूत की मौत और कंगना के ऑफिस को तोड़े जाने को लेकर बयानबाज़ी जारी थी फिर अचानक से एक मुलाकात होती है जो सभी को चौंका देती है। खबरों की मानें तो महाराष्ट्र गठबंधन में भी सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है ऐसे में इस मुलाकात के और भी मायने निकाले जा रहे है।  

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