हाथरस केस: इंसाफ दिलाने के नाम पर हो रही थी दिल्ली दंगे जैसी तैयारी!

इंसाफ के नाम पर पक रही राजनीतिक रोटी

सरकारी आंकड़े यह बताते है कि देश में करीब हर 15 मिनट में एक महिला या बच्ची के साथ दुराचार होता है। अलग अलग सरकारों ने इसके खिलाफ कई कानून भी बनाए लेकिन इसमें कोई ज्यादा सुधार नहीं हुआ। इस तरह की घटना करीब हर राज्य में होती है जिस पर प्रशासन और शासन की तरफ से कठोर कदम उठाए जाते है। हाल ही में उत्तर प्रदेश में भी करीब 20 साल की एक बच्ची के साथ भी ऐसी ही घटना सामने आयी है जिसे पूरे देश की मीडिया ने सर आंखों पर उठा लिया है। पीड़िता के गांव को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है। तमाम राजनीतिक पार्टियों के नेता हर दिन वहां पहुंच रहे है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने भी पीड़िता के परिवार से मुलाकात की थी और उन्हे भरोसा दिलाया था कि कांग्रेस पार्टी उन्हे इंसाफ जरुर दिलाएगी। 

 

विपक्ष का हाय तौबा
हाथरस में हुई घटना दुखद और निंदनीय है लेकिन ऐसी यह कोई पहली घटना नही है इससे पहले भी कई और महिलाओं और बच्चियों के जीवन के साथ खिलवाड़ किया गया है और उन्हे आज तक न्याय नहीं मिला है फिर आखिर हाथरस की घटना में ऐसा क्या है कि विपक्ष के नेता हर दिन वहां पहुंच रहे है और यह जताने की कोशिश कर रहे है कि यूपी में चल रही वर्तमान सरकार महिलाओं की रक्षा नहीं कर पा रही है। महिला के साथ हुए अन्यान को लेकर लगातार योगी सरकार को निशाने पर लिया जा रहा है। जबकि स्थानीय प्रशासन की तरफ से सभी संदिग्ध युवकों को गिरफ्तार कर लिया गया है हालांकि अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि मृतक पीड़िता के साथ दुराचार हुआ था या नहीं। 

 

पूरा प्रदेश जलाने की थी तैयारी!
हाथरस कांड को एक दूसरे नजरिये से देखें तो यह नजर आता है कि गांव में दो लोगों के आपसी विवाद को अब जातीय रंग दिया जा रहा है, साथ ही कुछ लोग इसे दंगा का रुप भी देने में लगे हुए है लेकिन चाकचौबंद प्रशासन की वजह से वह अपने मंसूबो में कामयाब नहीं हो रहे है। खबरों की मानें तो हाथरस में भी दिल्ली और बेंगालूरु जैसा दंगा करने का कुछ लोगों का प्लान था। हाथरस में सवर्ण बनाम दलित का रंग देकर दंगा करने की तैयारी थी और उसके लिए फंडिंग भी की गयी थी। हाथरस के द्वारा पूरे यूपी को जलाने की तैयारी की गयी थी क्योंकि पिछले काफी समय से एक के बाद एक मोदी और योगी सरकार के फैसले से विपक्ष और राष्ट्र के दुश्मन खुश नही है जिससे वह किसी भी तरह से देश में अशांति फैलाने में लगे हुए है।

 

 
“जस्टिस फॉर हाथरस” का सच? 
हाथरस में जातीय हिंसा भड़काने के लिए “जस्टिस फॉर हाथरस” नाम से एक वेबसाइट तैयार की गयी थी जिसके जरिए लोगों को जोड़ा जा रहा था और एक दंगे की तैयारी चल रही थी। इसके लिए बड़ी मात्रा में फंडिग भी विदेशों से आयी थी। फंडिग के जरिए ही ज्यादा लोगों को जोड़ा जा सकता था और फिर चिन्हित लोगों को अपना निशाना बनाकर उनकी मौत को दंगे का नाम दिया जाता और हाथरस में भी दिल्ली जैसा दंगा हो सकता था लेकिन यूपी पुलिस की नजरों ने कुछ लोगों के मंसूबे पर पानी फेर दिया और इस मामले में कई लोग गिरफ्तार भी हो गये। उत्तर प्रदेश पुलिस के मुताबिक इस हाथरस दंगे की साज़िश में फीएफआई (PFI) भी शामिल है। पुलिस ने 4 लोगों को गिरफ्तार किया है जिसने लिंक पीएफआई से बताए जा रहे है। इसके साथ ही अब तक कुल 21 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया जा चुका है।  
हाथरस घटना पर जहां विरोधी दल अपनी सियासी जमीन हथियाने में लगे हुए है वहीं उनकी ही नाक के नीचे से कुछ लोग हिंसा करने के लिए तैयार बैठे है जिसकी भनक किसी को नही है। लम्बे समय से सियासत से दूर कांग्रेस किसी भी मौके को गवानां नहीं चाहती है क्योंकि राजनीति में कांग्रेस सबसे गरीब पार्टी के तौर पर नजर आ रही है। कांग्रेस के पास से एक के बाद एक राज्य छिनते ही जा रहे है जिससे राहुल गांधी छोटे से छोटे मौक़ों पर पहुंच कर हमदर्दी जताते है और मोदी सरकार पर हमला बोलते है। 

This Post Has One Comment

  1. विनय बेंडे

    कांग्रेसने १९४७ से जातीचा राजकारण ही किया है.

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