पाकिस्तान में हिंदुओं का हाल बेहाल

आजादी के 65 वर्षों बाद पाकिस्तान में रह रहे 70 लाख हिंदुओं का हाल बेहाल है। लगभग 94 फीसदी हिंदू सिंध प्रांत में जबकि चार फीसदी हिंदू आबादी बलूचिस्तान और खैबर-पख्तूनवा प्रांत में रहती है। इस वर्ष अगस्त में वार्षिक तीर्थयात्रा के लिए जो हिंदू पाकिस्तान से भारत आए है, उनमें से अधिकांश वापस नहीं लौटना चाहते। हाल के दिनों में कट्टरपंथी इस्लामी समूहों द्वारा हिंदू लड़कियों के अपहरण, उनके बलात धर्म परिवर्तन और जबरन मुसलमानों से शादी रचाने से वे बेहद आतंकित हैं। भारत की सीमा मे प्रवेश से पूर्व पाक अधिकारियों ने पाकिस्तानी हिंदू तीर्थ यात्रियों से एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर करवाया था। इस दस्तावेज के मुताबिक हिंदुओं से प्रतिज्ञा करवाई गई थी कि वे पाकिस्तान वापस लौटेंगे तथा भारत यात्रा के दौरान पाकिस्तान की किसी-भी प्रकार की निंदा नही करेंगे। इस प्रतिज्ञा-पत्र के बावजूद अधिकांश पाकिस्तानी हिंदू वापस नहीं जाना चाहते हैं। इनमें से कई पाकिस्तान से अपना घर-बार बेंच कर आए हैं। अब वे उम्मीद करते हैं कि भारत सरकार उन्हें नागरिकता देगी।

पिछले कुछ अर्से से कट्टरपंथी इस्लामी समूहों ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के खिलाफ जो माहौल बनाया है, उससे वहां के हिंदुओं के मन में बैठा आतंक जायज नजर आता है। इस्लाम के अपमान के नाम पर एक ईसाई लड़की को फांसी की सजा सुनाई गई थी। पंजाब के तत्कालीन गवर्नर सलमान तासीर ने इस लड़की के प्रति सहानुभूति जताई थी। उनके इस अपराध के लिए कट्टरपंथियों ने उनकी दिन-दहाड़े हत्या कर दी थी। अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय मंत्री ईसाई धर्म के अनुयाई शाहबाज भट्टी को भी कट्टरपंथियों के हाथों अपनी जान गवांनी पड़ी थी। पाकिस्तान में शिया मुसलमानों और अहमदिया लोगों को भी निशाना बनाया जा रहा है।

इस साल फरवरी में मनवाधिकार आयोग के क्वेटा इंकाई के सदस्य डॉ. नंदलाल के बेटे का अपहरण कर लिया गया। नौ अप्रैेल को बलूचिस्तान के विख्यात हिंग्लाज माता मंदिर के प्रबंध समिति के चेयरमैन विनोद महाराज गंगाराम मोलियानी का अपहरण कर लिया गया। सात अगस्त को मनीषा कुमारी नामक एक 14 वर्षीया लड़की का सिंध के जैकोबाबाद शहर से अपहरण कर लिया गया, उसकी शादी जबरन एक मुस्लिम से करवा दी गई। इससे आस-पास के अल्पसंख्यकों में भय का माहौल छा गया। जैकोबाबाद की साढ़े तीन लाख की आबादी में 50 हजार हिंदू हैं। वे तीन हजार वर्षों से यहां रहते आए हैं, वे शिक्षित और कारोबारी हैं। स्थानीय मीडिया के मुताबिक धर्म परिवर्तन, फिरौती और अपहरण से भयभीत सिंध और बलूचिस्तान के हिंदू भारत पलायन करने को विवश हो रहे हैं। पाकिस्तान के एक प्रमुख अखबार डॉन का कहना है कि पाकिस्तान के हिंदुओं में असुरक्षा की भावना बढ़ रही हैं। इस कारण हाल के वर्षों मेें पाकिस्तान छोड़कर जाने वाले हिंदू समुदाय के व्यापारियों और व्यावसायियों की संख्या मे वृद्धि हुई है। इस संदर्भ में बताया गया है कि हिंदू व्यापारियों के बढ़ रहे अपहरण, उनकी दुकानों की लूटमार, उनकी संपत्ति पर कब्जे और धार्मिक कट्टरता के माहौल ने अल्पसंख्यक समुदाय को मुख्य धारा से अलग कर दिया है।

पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग ने भी धार्मिक अल्पसंख्यकों के देश से लगातार पलायन पर नाराजगी जाहिर की है। आयोग का कहना है कि सिविल सोसाइटी की ओर से बार-बार याद दिलाए जाने के बावजूद अधिकारी अल्पसंख्यकों की चिंताओं पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। आयोग के मुताबिक सिंध और बलूचिस्तान से लगातार हिंदुओं के पलायन की रिपोर्ट आ रही है।

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की हालत और उनमें प्रति सत्ताधारी वर्ग के रवैए पर पाकिस्तान के एक प्रमुख दैनिक ने संपादकीय लिखा है। संपादकीय के अनुसार यह वाकई अफसोस की बात है कि सिंध के जैकोबाबाद के 60 फीसदी हिंदू परिवारों ने खुद को असुरक्षित महसूस करने के कारण भारत में बसने का फैसला कर लिया। अखबार लिखता है कि हिंदू व्यापारियों को धमकाये जाने, लूटे जाने, उनके अपहरण तथा महिलाओं के बलपूर्वक धर्म परिवर्तन की लगातार घटने वाली घटनाएं बयान करती हैं कि इस शांतिपूर्ण अल्पसंख्यक समुदाय की हालत मुल्क में कितनी दयनीय है, पर दुर्भाग्य से प्रशासनिक मशीनरी इस बात को मानने को तैयार नहीं है। अखबार के मुताबिक शासक वर्ग चाहे जो कहे, पर सचाई यह है कि पाकिस्तान में धार्मिक कट्टरता और असहिष्णुता बढ़ गई है, जिसका खामियाजा अल्पसंख्यकों को भुगतना पड़ रहा है।

पाकिस्तान के एक एनजीओ-जिन्ना संस्थान ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि अल्पसंख्यकों को पक्षपाती नियमों का सामना करना पड़ रहा है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि अल्पसंख्यकों पर हो रहे ताजा हमले सभी स्तर पर साजिश का नतीजा हैं, जिसमें न्याय पालिका, कार्यपालिका और विधायिका शामिल है। गौरतलब है कि जिन्ना संस्थान पाकिस्तान पीपल्स पार्टी की सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री सेरी रहमान की संस्था है।

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की दुर्दशा पर पाकिस्तान के हिंदू नेताओं ने भारतीय और अमेरिकी मिशन से मदद की गुहार लगाई है। सिंध के मीरपुर खास क्षेत्र के आस-पास अल्पसंख्यकों पर हमले तेज होते जा रहे हैं। पाक हिंदू पंचायत के अध्यक्ष लक्ष्मणदास पेरवानी का आरोप है कि पुलिस भी मामले में रुचि नहीं ले रही है, ऐसे में पाकिस्तान के हिंदू परिवारों के पास पाकिस्तान से पलायन करने के अलावा कोई विकल्प ही नहीं बचा। पेरवानी ने जियो टीवी चैनल से बताया कि बीते पांच महीनों के दौरान कम से कम 18 परिवारों ने देश छोड़ दिया है। समाचार चैनल पर उन्होंने आगे बताया कि जबरन वसूली न देने पर दो युवकों की हत्या कर दी गई जबकि दो अपहृत कारोबारियों से लाखों रुपयें की फिरौती वसूलने के बाद रिहा कर दिया गया। सिंध असेंबली के पूर्व सदस्य पेरवानी ने समाचार चैनल से आक्रोश और दुख के साथ कहा कि पुलिस और राजनेताओं द्वारा हिंदुओं की शिकायतों पर ध्यान नहीं देने के बाद ही विदेशी मिशनों को पत्र लिखा गया।

पाकिस्तान की मानवाधिकार कार्यकर्ता और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की पूर्व अध्यक्ष अस्मां जहांगीर ने मुंबई के एक अंग्रेजी दैनिक से साक्षात्कार में कहा कि पाकिस्तान में सरकारी स्तर पर हिंदुओं का कोई उत्पीड़न नहीं होता। नॉन स्टेट ऐक्टर्स हिंदू अल्पसंख्यकों को पीड़ित कर रहे हैं, उनके मुताबिक यह कहना मुश्किल है कि पाकिस्तान में कितने जबरन धर्मांतरण कराए गए और कितने मामलों में हिंदू महिलाओं ने स्वेच्छा से इस्लाम कबूल कर मुस्लिम युवकों से शादी कर ली। लेकिन कराची हिंदू पंचायत के मुताबिक जबरन शादी और धर्म परिवर्तन पाकिस्तान में हिंदू समुदाय की सबसे बड़ी समस्या है। हिंदू पंचायत की शिकायत है कि ऐसे मामलों में न तो सरकार मदद करती है और न पुलिस। पाकिस्तान के अखबार ‘पाकिस्तान एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ की रिपोर्ट के मुताबिक हर महीने 20-25 हिंदू महिलाओं का बलात धर्म परिवर्तन कराया जाता है। हर वर्ष लगभग 300 महिलाओं का जबरन धर्म परिवर्तन करवा कर उनकी शादी मुस्लिमों से करवा दी जाती है।

पाकिस्तानी हिंदुओं के बड़ी तादाद में भारत जाने की खबरों के बीच राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने सिंध सरकार को एक कानून का मसौदा तैयार करने का निर्देश दिया है। इस कानून के जरिए संविधान में संशोधन किया जाएगा, ताकि सिंध में अल्पसंख्यकों के जबरन धर्मांतरण को रोका जा सके। जरदारी ने सिंध के मुख्यमंत्री कासिम अली शाह को सिंध के कानूनमंत्री अयाज सुमरो के नेतृत्व में एक समिति गठित करने का निर्देश दिए है। यह समिति संविधान संशोधन के लिए एक कानून का मसौदा तैयार करेगी। समिति में हिंदू पंचायत के चुने गए प्रतिनिधियों और नेताओं को शामिल किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि काफी समय से हिंदू समुदाय के लोग जबरन धर्मांतरण के खिलाफ कड़ा कानून बनाए जाने की मांग करते आ रहे हैं।
राष्ट्रपति जरदारी ने सांसदों की एक तीन सदस्यीय समिति बनाकर उसे देश में रह रहे अल्पसंख्यक हिंदुओं से बातचीत करने को कहा है। समिति से कहा गया है कि वह सिंध प्रांत में रह रहे हिंदुओं को सुरक्षा के प्रति आश्वस्त करे। इस समिति में सिनेटर हरि राम, नेशनल असेंबली के सदस्य लालचंद और संधीयमंत्री मौला बख्श चांदियों को शामिल किया गया है। राष्ट्रपति जरदारी के तमाम आश्वासनों के बावजूद पाकिस्तान का हिंदू समाज यह भरोसा नहीं कर पा रहा है कि वहां के कट्टरपंथियों से सरकार उनकी रक्षा सुनिश्चित कर पाएगी।

पाकिस्तान में इन दिनों अल्यसंख्यकों के साथ घट रही पीड़ादायक खबरों से साफ है कि वहां उनके जानमाल को भारी खतरा है। यह मानवाधिकारों और धार्मिक अधिकारों का घोर उल्लंघन है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की यह नैतिक जिम्मेदारी है कि वह इस मसले को गंभीरता से ले। यह एक दुखद बात है कि 20 वर्षीय सुनील नामक एक हिंदू युवक का रमजान के दौरान धर्मांतरण पाकिस्तान के एक टीवी चैनल से सीधे प्रसारित किया गया। एक अल्पवयस्क हिंदू लड़की का अपहरण करके उसका जबरन धर्मांतरण कराके विवाह कराया गया और मां-बाप की शिकायत का पुलिस ने कोई संज्ञान नहां लिया। यह हिंदू मुसलमान का मामला नहीं है बल्कि मानवता का मामला है। यद्यपि पाक सरकार सभी नागरिकों के बाबरी का दावा करता है लेकिन वहां कट्टरपंथियों की तूती बोल रही है, ऐसे माहौल में वहां की सरकार और प्रशासन भी अपने अल्पसंख्यकों को संरक्षण देने मे नाकारा साबित ही रहा है। भारत सहित विश्व समुदाय की यह जिम्मेदारी है कि वे पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों के मानवाधिकारों के लिए अपनी आवाज बुलंद करे।
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