पाकिस्तान का भविष्य कैसा होगा?

अपने देश में बीच-बीच में इस प्रश्न पर चर्चा होती रहती है कि ‘पाकिस्तान का निर्माण किसने किया?’ कुछ दिन पूर्व कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह ने कहा कि सशक्त राष्ट्र का सिद्धान्त मूलत: वीर सावरकर का है। आगे चलकर इसे जिन्ना ने अंगीकार कर लिया। दिग्विजय सिंह अपने मूर्खतापूर्ण वक्तव्य के लिए प्रसिद्ध हैं। समाचार पत्रों के सिद्धान्त के अनुसार यदि किसी कुत्ते ने किसी व्यक्ति को काट लिया, तो वह समाचार नहीं होता। इसके विपरीत यदि किसी व्यक्ति ने कुत्ते को काट लिया तो वह समाचार बन जाता है। दिग्विजय सिंह के वक्तव्य इसी तरह के होते हैं। पाकिस्तान की मूलसंकल्पना सर सैय्यद अहमद खान ने 19 वीं शदी के उत्तरार्ध में प्रस्तुत किया था। बदरुद्दीन तैय्यब ने उनका समर्थन किया था। इकबाल ने उसका तत्वज्ञान तैयार किया और जिन्ना ने अंग्रेंजों के इशारों पर नाचते हुए केवल भाषण, लेखन और दंगे करके पाकिस्तान ले लिया। ऐसे पाकिस्तान का सावरकर ने कभी भी समर्थन नहीं किया था। वीर सावरकर का मत था कि मुसलमान अलगाववादी होते हैं, हिन्दुओं के साथ आने में वे स्वयं तैयार नहीं होंगे। हिन्दुओं को संगठित होकर सत्ता की शक्ति अपने पास लेकर मुसलमानों को अपने साथ जोड़ना चाहिए। सावरकर जी का यह विचार उनके अलग-अलग लेखों और भाषणों में मिलता है। पाकिस्तान के निर्माण का श्रेय अंग्रेज और गांधी-नेहरू के नेतृत्व वाली कांग्रेस को देना चाहिए। पाकिस्तान के निर्माण की चर्चा शुरू होते ही दिग्विजय सिंह और उनके साथी शपथ लेकर कहने लगते है- ‘इदं न मम्’। अर्थात यह कार्य कांग्रेस का नहीं है। यह उनकी निर्लज्जता है। वस्तुत: कांग्रेस द्वारा स्थापित पाकिस्तान आज कैसा है यह देखना ही बहुत मजेदार है।

वीर सावरकर का मत- मुसलमानों के विषय में सावरकर कहते हैं, ‘एक पुरानी और पिछड़ी संस्कृति को ही दृढ़ता पूर्वक आज तक पकड़े रहने से तुम नि:सन्देह विज्ञान के प्रभाव के नीचे दब जाओगे। अर्थात कुरान में पैगम्बर द्वारा व्यक्त अक्षर और अलंघनीय मानी जाने वाली परम्परागत प्रवृत्ति को त्यागकर मनुष्य के हित में आज जो कुछ है, उसे बेहिचक आचरण में धारण करने की अद्यतन प्रवृत्ति को स्वीकार करो।’ (सन्दर्भ : मला उमजलेले सावरकर, डॉ. अरविन्द गोडबोले, पृष्ठ-148)। सावरकर का यह मत पाकिस्तान के निर्माण से पहले का है। एक पुरानी और पिछड़ी संस्कृति को पकड़कर पाकिस्तान का निर्माण किया गया। मुहम्मद अली का परिचय नास्तिक के रूप में दिया जाता है। जबकि मुस्लिम धर्मशास्त्र के अनुसार नास्तिक को जीवित रहने का ही अधिकार नहीं है। परन्तु जिन्ना धूर्त थे, महत्वाकांक्षी थे। अपनी महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए उन्होंने इस्लाम का सहारा लिया। आज का पाकिस्तान उनकी कल्पना में ही नहीं था। पिछले तीन-चार वर्षों से पाकिस्तान की संविधान सभा में 11 अगस्त, 1947 को दिया गया मुहम्मद अली जिन्ना का भाषण बार-बार उद्धृत किया जाता है। लाल कृष्ण आडवानी ने भी उसे उद्धृत किया है। उस भाषण में एक वाक्य ऐसा है- ‘तुम्हारा धर्म, पंथ, जाति, वंश कोई भी हो, इसका राज्य का शासन चलाने से कोई सम्बन्ध नही है। अपना राज्य धर्मनिरपेक्ष होगा।’ जिन्ना का यह भाषण उस समय सुनकर सबको धक्का पहुंचा था। मुसलमानों का राज्य और धर्म निरपेक्ष? कल कोई यह कहे कि मैने शाकाहारी शेर देखा है, तो लोग उसे पागल कहने लगेंगे पाकिस्तान के निर्माण से पूर्व विश्व में अनेक इस्लामी देश थे। उनमें एक भी देश धर्म निरपेक्ष नहीं था। वे धर्मनिरपेक्ष हो ही नहीं सकते। कुराण में इसकी आज्ञा ही नहीं है। उसके बाद जिन्ना जल्दी ही बदल गये, संविधान का निर्माण हुआ और उसमें सुनिश्चित किया गया कि देश का प्रमुख मुसलमान ही होगा। गैर मुसलमान देश का प्रमुख हो ही नही सकता।

भारत का संविधान 1950 से जैसे का तैसा ही है। उसमें सौ के आस-पास संशोधन किये गये है, किन्तु संविधान नहीं बदला। पाकिस्तान का पहला संविधान 1958 में लागू किया गया, दूसरा 1962 में और तीसरा 1973 में लागू किया गया। इस तीसरे संविधान में के अनुसार पाकिस्तान का नाम ‘इस्लामिक रिपब्लिक आफ पाकिस्तान’ रखा गया है। दूसरे शब्दों में जिन्ना का सेकुलर पाकिस्तान कब्र में दफन कर दिया गया। इस्लाम पाकिस्तान का राजधर्म है। पाकिस्तान में अन्य धर्मावलम्बियों को अपने मत का प्रचार करने पर पाबन्दी है। पाकिस्तान में पाखण्ड विरोधी कानून है। यह कानून बहुत से मुसलमानों को मान्य नहीं है। पंजाब के गवर्नर सलमान ताशीर को भी मान्य नहीं था। उनकी हत्या 4 जून, 2011 को उनके अंगरक्षक मलिक मुमताज कादरी ने कर दी। मुमताज कादरी को वकीलों धर्मवीर की संज्ञा दी। अर्थात जिस पिछड़ेपन का विषय वीर सावरकर ने उठाया था उसका दर्शन यहां मिलता है। पाकिस्तान में मदरसों में शिक्षा दी जाती है। इसके लिए उसे सऊदी अरब से अकूत धन मिलता है। वहाँ पढ़ायी जाने वाली पुस्तकों में अन्य धर्मों के प्रति विद्वेष की भावना जगायी जाती है। मदरसों से पढ़-लिखकर निकलने वाले विद्यार्थी पर धर्मियों के प्रति मन में विद्वेष रखते हैं। इसी से जिहादी तैयार होते हैं। इनमें से कुछ जिहादी आत्मघाती बन जाते हैं।

अयशस्वी देश- दुनिया में पाकिस्तान की छवि एक कुख्यात देश की है। अमेरिका के वाशिंगटन से ‘फारेन पालिसी’ नामक पत्रिका प्रकाशित होती है। इस पत्रिका में विश्व के कुख्यात देशों के नामों की सूची दी गयी है। उसमें पाकिस्तान का तेरहवां क्रमांक है। कुख्यात देश घोषित करने की पीछे उन्होंने कुछ मापदण्ड तय किये है, वे इस प्रकार है-
जो देश अपनी जमीन खो देता है।

जिस देश में सामूहिक नेतृत्व और निर्णय नहीं होता है।
जो देश अपने नागरिकों को सामान्य सुविधाएं नहीं दे सकते हैं।
जो देश अपने पड़ोसी देशों के साथ संवाद स्थापित नहीं कर सकते हैं।

इस आधार पर पाकिस्तान एक बदनाम देश है, यह उन्होंने निष्कर्ष निकाला है। 1971 में पाकिस्तान ने बांग्लादेश को गवां दिया। पाकिस्तान का वह सीमावलीं भाग जिसे संघ शासित जनजातीय क्षेत्र (फाटा-फेडली एडमिनिस्टर्ड ट्राइवल एरिया) कहा जाता हैं, केन्द्र शासन के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। बलूचिस्तान में बलूचों ने विद्रोह कर दिया है। सिन्ध प्रान्त अशान्त बना हुआ है। सिन्ध में सिन्धी भावना प्रबल हो गयी है। बलूच और सिन्ध पाकिस्तान में नहीं रहना चाहते।

पाकिस्तान में किसकी सत्ता है? यह प्रश्न भी अत्यन्त महत्वपूर्ण है। पाकिस्तान में आज जनता द्वारा चुनी हुयी सरकार है। शासन के तीन अंग होते हैं- विधान मण्डल, कार्यपालिका और न्यायपालिका। संसदीय लोकतंत्र में विधायिका और कार्यपालिका एक ही होते हैं। न्यायपालिका स्वतन्त्र होती है। विधायिका और कार्यपालिका के ऊपर न्यायपालिका द्वारा जब भी प्रतिबन्ध लगाया जाता है, तब संघर्ष शुरू हो जाता है। ऐसा ही संघर्ष 1974-75 में भारत में भी हुआ था। उसी के पश्चात देश में स्व. इन्दिरा गांधी द्वारा आपात काल लागू कर दिया गया। आगे चलकर आपातकाल समाप्त हुआ और अपने देश के राजनेता अधिक चालाक हो गये। इस समय अपने देश में कार्यपालिका और न्यायपालिका अर्थात प्रधानमंत्री और सर्वोच्च न्यायालय में कभी संघर्ष नहीं होता है। पाकिस्तान में 1960 से न्यायपालिका और प्रधानमंत्री अथवा राष्ट्रपति के बीच संघर्ष चल रहा है। इस समय यह संघर्ष चरम पर है। उसका संक्षिप्त विवरण ऐसा है कि पाकिस्तान की सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश इफ्तिकार मोहम्मद चौधरी ने 25 अप्रैल, 2012 को प्रधानमंत्री युसुफ रजा गिलानी के खिलाफ निर्णय दिया कि उन्होंने न्यायालय की अवमानना की है। मंगलवार दिनांक 19 जून, 2012 को चौधरी साहब ने युसुफ रजा गिलानी को प्रधानमंत्री पद से हटाने और संसद की सदस्यता रद्द करने का आदेश दिया। सर्वोच्च न्यायालय ने प्रधानमंत्री युसुफ रजा गिलानी को अप्रैल से पहले आदेश दिया था कि वे राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच कराएं। स्वीटजरलैण्ड में उनके कितने बैंक खाते हैं, उनमें कितना पैसा जमा है, इसकी जानकारी मांगे जाने वाला पत्र स्वीटजरलैण्ड की सरकार को लिखा जाए। अपने ही देश के राष्ट्रपति के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच का आदेश सिर्फ पाकिस्तान का ही सर्वोच्च न्यायालय दे सकता है। दुनिया के अन्य किसी देश का न्यायालय ऐसा हास्यपद आदेश नहीं देगा।

प्रधानमंत्री गिलानी ने वह आदेश मानने से इंकार कर दिया। पाकिस्तान के संविधान के अनुसार जो व्यक्ति देश के सर्वोच्च पद पर है, पद पर रहते हुए उसके ऊपर लगाये गये किसी भी आरोप की जांच नहीं की जा सकती। राजनीति शास्त्र में एक बात सिखायी जाती है, ‘राजा कोई गलती नहीं कर सकता’ (किंग कैन डू नो रांग)। अर्थात सरकार के सर्वोच्च पद पर बैठा व्यक्ति कोई भी गुनाह नहीं कर सकता। अपवाद स्वरूप परिस्थितियों में न्यायपालिका सर्वोच्च पद पर बैठे व्यक्ति के विरूद्ध संज्ञान ले सकती है। अमेरिका में राष्ट्रपति निक्सन ‘वायू गेट कांड’ में फांस गये थे। उनका अपराध सिद्ध हो गया और उन्हें अपना राष्ट्रपति पद छोड़ना पड़ा था। इतना बड़ा अपराध होने पर भी वहां की सरकार ने उन्हें कोई दण्ड नहीं दिया। आगे चलकर बिल क्लिंटन का सेक्स स्कैण्डल हुआ, वे भी दोषी सिद्ध हुये, किन्तु उन्हें भी सजा नहीं दी गयी। पाकिस्तान में सब उलटा ही होता है। सरकार चलाने का काम न्यायपालिका का नहीं है। यह काम जनता द्वारा चुने गये प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति का है। इस तरह से कोई देश चल नहीं सकता है।

लोकतांत्रिक पद्धति से देश चलाने के लिए संसदीय व्यवस्था का पालन करना पड़ता है। विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका को यह करना पड़ता है। पाकिस्तान के बारे में यह प्रश्न उठता है कि क्या वहाँ संसदीय व्यवस्था का पालन किया जाता है। पाकिस्तान में सेना ही सर्वशक्तिमान है। उसे नागरिक प्रशासन पर विश्वास नहीं है। वहाँ की पूरी अर्थव्यवस्था सेना के हाथ में है। सेना किसी भी तरह का कर नहीं देती। अनेक उद्योगों पर उसने अलग-अलग तरह से कब्जा किया हुआ है। सेना जब चाहती है नागरिक प्रशासन को सत्ताच्युत करके प्रशासन अपने हाथ में ले लेती है। अयूब खान ने यही किया। उनके पश्चात याह्या खान ने भी ऐसा ही किया। आगे चलकर जुल्फीकार अली भुट्टो को प्रधानमंत्री के पद से हटाकर जिया उल हक ने सत्ता हथिया ली। हत्या का आरोप लगाकर भुट्टो को फांसी पर लटका दिया। परवेज मुशर्रफ ने मियां नवाज शरीफ को पद से हटाकर सत्ता पर कब्जा कर लिया। उन्होंने जिया उल हक की तरह नवाज शरीफ को फांसी पर नहीं लटकाया। उन्हें केवल देशनिकाला की सजा दे दी। इससे पहले नवाज शरीफ ने पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो को देश से निकाल दिया था। उनके पति आसिफ अली जरदारी को लम्बे समय तक जेल में बन्द कर रखा। आज वही जरदारी पाकिस्तान के राष्ट्रपति हैं। सात-आठ साल तक सत्ता का सुख भोगने के बाद मुशर्रफ को देश छोड़ना पड़ा। इस समय वे इंग्लैण्ड में रह रहे हैं।

भारत में भी सत्ता का परिवर्तन होता है, परन्तु यहाँ पर किसी प्रधानमंत्री को फांसी पर नहीं लटकाया जाता। बेनजीर भुट्टो की तरह हत्या नहीं की जाती। उन्हें जेल में भी नहीं बन्द किया जाता है। यह सब पाकिस्तान की संस्कृति के अनुरूप वहां होता है। देश अच्छी तरह से चलाने के लिए देश की सभी संस्थाओं अच्छा होना पड़ता है। सभी संस्थाओं को मर्यादित ढंग से अपना काम करना पड़ता है। यह मर्यादा देश के संविधान द्वारा निर्धारित की जाती है। इसके लिए संविधान का सम्मान करना होता है। पाकिस्तान के राजनेता ‘कपडे बदलने की तरह देश का संविधान बदलते हैं। इसलिए वहाँ संविधान के प्रति आस्था और श्रद्धा का निर्माण नहीं हो पाता है। अयशस्वी राज्य होने का यह भी एक कारण है।

आतंकवादी देश- आज पूरी दुनिया में आतंकवादी विरोधी वातावरण बना है। आतंकवाद के विरुद्ध अमेरिका के नेतृत्व में नाटो संगठन ने युद्ध की घोषणा कर दी है। कोई भी सफल देश आतंकवाद को अपने देश की नीति नहीं बनाता। पाकिस्तान भी असफल होते हुये भी आतंकवादी देश है। आतंकवाद वहाँ की नीति का एक भाग है। पाकिस्तान की आई एस आई इसी में लगी हुई है। भारत में आतंकवादी आक्रमण होते हैं। मुंबई में जो आतंकवादी पकड़े गये, उनको आई एस आई ने प्रशिक्षित किया था। इस बात को आतंकवादी भी मानते हैं। अमेरिका पर भी आतंकवादी आक्रमण हुये हैं। उन आक्रमणों में पाकिस्तान का हाथ होना सिद्ध हो गया अमेरिका द्वारा भगोड़ा घोषित आतंकवादी ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान ने संरक्षण दिया था। एबटाबाद में पाकिस्तान की सेना की छावनी है। वहाँ एक बड़े बंगले में ओसामा छिपकर रह रहा था। पाकिस्तान बार-बार यह कह रहा था ओसामा उसके देश में नहीं है। अमेरिका ने उसे खोज निकाला और अपने चार हेलीकाप्टर भेज कर मौत के घाट उतार दिया।

पाकिस्तान में असंख्य आतंकवादी संगठन है। सरकार द्वारा प्रतिबंधित 38 संगठन है। किन्तु ये प्रतिबन्ध केवल कागज पर हैं। प्रतिबन्धित संगठन नये-नये नाम से अपना कार्य जारी रखते हैं। आई एस आई को इन संगठनों की जरूरत है। खुद पाकिस्तान इन आतंकवादियों से त्रस्त है। पिछले वर्ष 2011 में वहाँ 476 आतंकवादी घटनायें हुयीं। इनमें 41 आत्मघाती घटनायें थी। इन घटनाओं में 6, 142 लोग मारे गये, जिनमें 2797 नागरिक और 469 सैनिक थे। वस्तुत: पाकिस्तान एक मुस्लिम देश है। आतंकवादी संगठन भी मुस्लिम हैं। इसका मतलब है कि पाकिस्तान में मुसलमान ही मुसलमान को मार रहे हैं। शिया और सुन्नी आपस में लड़ते-मरते हैं। दोनों मिलकर अहमदिया मुसलमानों को मारते हैं। यह उनका धार्मिक संघर्ष है। इस आतंकवादी संघर्ष में राजनीतिक रंग दिखायी देता है। भारत के विभाजन के उपरान्त यहाँ से जो मुसलमान पाकिस्तान गये, उन्हें मुहाजिर कहा जाता है। वे वहाँ आज भी बाहरी मुसलमान बने हुये है। उनके ऊपर भी आतंकी हमले होते हैं। सीमान्त प्रान्त में रहने वाले पख्तनू मुसलमान, पंजाबी, बलूची मुसलमानों को मारते हैं। अलग-अलग राजनीतिक दलों में भी संघर्ष होता रहता है।

भविष्य- अफगाणिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी शुरू हो गयी है। वहाँ तालिबानी लड़ाकुओं का शासन आयेगा। इन तालिबानियों का पाकिस्तान ने तैयार किया है। 9/11 को अमेरिका पर हमला इन्हीं लोगों ने किया था। उनके अड्डे पाकिस्तान में हैं। पाकिस्तान परमाणु शस्त्र-सम्पन्न देश है। ऐसा देश असफल हो चुका है और आतंकवादी संगठनों का अड्डा बना है। भविष्य में यदि किन्हीं कारणों से पाकिस्तान का विभाजन हुआ, तो परमाणु बम किसके हाथ लगेंगे। यदि वे बम आतंकवादियों के हाथ लग गये तो वे मनमानी प्रयोग करेंगे। मानवजीवन के प्रति उनकी कोई आस्था नहीं है। उनके द्वारा किये गये आतंकी हमलों से यह बात सिद्ध हो चुकी है। वे परमाणु बम का उपयोग भारत के विरुद्ध करने में तनिक भी संकोच नहीं करेंगे। तालिबान का यह स्वप्न है कि पहले पाकिस्तान और फिर हिन्दुस्तान का पूरा भू-भाग इस्लाममय होना चाहिये।
भविष्य का पाकिस्तान कैसा होगा, इस विषय पर अमेरिका में खूब अध्ययन हो रहा है। इसके एक अध्ययन कर्ता हैं डॉ. स्टीफन कोहेन। उनकी ‘दि फ्यूचर आफ पाकिस्तान’ पाकिस्तान के ऊपर लिखी गयी अच्छी पुस्तक है। उनका एक लम्बा साक्षात्कार दि एक्सप्रेस ट्रिब्यून, संडे मैगजीन में 15 जनवरी, 2012 को प्रकाशित हुआ था। यह साक्षात्कार मलिक सिराज अकबर ने लिया था। इसमें एक प्रश्न पूछा गया है कि पाकिस्तान के सामने धोकादायक क्षण कौन से हैं और उनका क्रान्तिकारी पर्याय क्या है? इस प्रश्न का उत्तर कोहेन ने दिया है। उनका कहना है-

‘पुस्तक में पाकिस्तान की तुलना मैंने कई देशों के साथ की है। ईरान के मुल्ला राज्य की नकल पाकिस्तान नहीं कर सकता, क्योंकि पाकिस्तान की सेना मुल्ला की अपेक्षा शक्तिशाली है। पाकिस्तान के सामने द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात अस्थिर हुये रूस का पर्याय भी हो सकता है। उस समय अस्थिर रूस में जार का शासन खत्म हो गया और सत्ता पर काबिज वर्ग का विश्वास भी समाप्त हो गया। क्रान्तिकारियों ने देश का शासन अपने हाथ में ले लिया। यूरोप के यूगोस्लाविया अथवा दो दो विश्वयुद्ध के बीच के जापान का पर्याय भी हो सकता है। उस समय जापान में सेना ने अपने शासन का एस्ता चुना था। परमाणु बम सम्पन्न और इतने बड़े क्षेत्रफल वाले किसी देश को इतनी कठिन परिस्थिति में जाते हुए, मैंने इतिहास में कभी नही देखा। जब सोवियत संघ का विघटन हो गया, तो शेष बचे रूस ने यूरोपीय देश बनाने का प्रयत्न किया। पाकिस्तान को आगे भी दक्षिण एशिया का देश पर्याय है।’

पाकिस्तान मध्य एशिया के अरबी, तुर्की और इरानी मुस्लिम देशों के एक ओर है। और दूसरी ओर भारत है। पाकिस्तान की पूरी जनता एक समय में भारतीय संस्कृति का हिस्सा थी। भारत और पाकिस्तान दोनों की जनता का वंश वृक्ष एक है, पूर्वज एक हैं, इस्लाम से पूर्व का इतिहास एक है, प्राचीन संस्कृति के प्रमाण पाकिस्तान में हैं, तक्षशिला पाकिस्तान में है, वहीं पर मोहनजोदड़ो है। श्रीराम के पुत्र द्वारा बसाया हुआ शहर लाहौर पाकिस्तान में है, वहीं पर हिंगलाज माता का मन्दिर है। महाभारत कालीन युद्धिष्ठिर- पक्ष सम्वाद की घटना वहीं घटी थी। पाणिति का जन्मस्थान पाकिस्तान में हैं। यह पाकिस्तान का संक्षिप्त परिचय है। इस्लाम अरब देशों से आया और अरब संस्कृति लेकर आया। पाकिस्तान में संस्कृति का संघर्ष अरब संस्कृति और पुरातन भारतीय संस्कृति के बीच है। उस पर इस्लाम की झलक है। पाकिस्तान के सामने प्रश्न है कि अपनी पहचान कौन सी है। सावरकर का कहना था कि पाकिस्तान के मुसलमानों को आधुनिक बनना है या फिर मध्य युगीन संस्कृति से चिपके रहना है। आधुनिकता का मापदण्ड है लोकतन्त्र, मानवीय मूल्यों की स्थापना, विविधता का आदर, उपासना की स्वतन्त्रता, विज्ञान के प्रति निष्ठा। स्वातन्त्र्यवीर सावरकर ने इन्हीं विशेषताओं का आग्रह किया था जो सभी भारतीयों के लिए था। पाकिस्तान ने भारत के साथ शत्रुता का व्यवहार करते हुए उत्थान करने का मार्ग अपनाया, तो वह आपस में ही लड़कर समाप्त हो जाएगा। और भारत के साथ मित्रता करते हुए आगे बढ़ने का एस्ता चुना तो उसे अपनी पहचान मिलेगी। ईश्वर ने पाकिस्तान का भविष्य भारत के साथ जोड़कर निर्धारित किया है। प्राकृतिक रूप से जो भू भाग भौगोलिक दृष्टि से एक है, उस का कृत्रिम विभाजन अप्राकृतिक है, पाकिस्तान की घटना से यह सिद्ध हो गया है।

आपकी प्रतिक्रिया...