छठ पर्व का महत्व

‘छठ पर्व’ सूर्य आराधना का पर्व है। इस संसार मे सूर्य ही प्रत्यक्ष देवता हैं। सूर्य से ही इस पृथ्वी लोक में प्राणियों का अस्तित्व है। सूर्य अगर दीर्घकाल तक अस्त रहें तो यह संसार प्राणी विहीन हो जायेगा, क्योंकि सूर्य के प्रकाश से ही ‘आक्सीजन’ बनता है, जो कि जीवन का आधार है।

छठ महापर्व का वैज्ञानिक आधार भी है। इसी तिथि को सूर्य मकर रेखा से विषुवत रेखा में जाता है। मान्यता यह है कि, इस तिथि को जो व्यक्ति जल में खड़े होकर सूर्यदेव को अर्घ्य देता है, वह समस्त व्याधियों से मुक्त होता है, विशेष कर चर्म रोग से। इसीलिये छठ महापर्व में सूर्यास्त एवं सूर्योदय दोनों समय जल में खड़े होकर सूर्य को जल अर्पण कर पूजा की जाती है।

छठ पूजा का विधान इस प्रकार है- छठ व्रती चौथ को सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं, पंचमी को दिनभर उपवास रखते हैं, संध्याकाल को खीर खाते हैं व जलग्रहण करते हैं, जिसे ‘खरना’ कहते हैं। तदुपरान्त निराजल व्रत रखते हैं। षष्ठी के दिन सूर्यास्त के समय जल में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देते हैं व जल के पास ही वेदी बनाकर पूजा सामग्री के साथ दीपक प्रज्ज्वलित कर रात्रि जागरण करते हैं। रात्रि में छठ के गीत गाते हैं। सप्तमी को सूर्योदय के समय जल में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देते हैं। उसके बाद वस्त्र बदल कर प्रसाद ग्रहण करते हैं। प्रसाद में ‘ठोकवा’ का विशेष महत्व है। जलग्रहण करने के उपरान्त व्रत सम्पन्न होता है।

दीपावली के छठे दिन ‘षष्ठी’ को यह व्रत मनाया जाता है। इसे ‘छठ मैया’ भी कहते हैं। सभी व्रती छठ मैया की जय-जयकार करते हैं व गीत गाते हैं। ‘छठ महापर्व’ को छठ मैया की पूजा आराधना करके मनाया जाता है। इसकी एक पौराणिक कथा है। जब अयोध्या के राजा श्रीराम ने माता सीता को वन में भेज दिया, तो वे वाल्मीकि आश्रम में रहने लगीं। उस समय सीता माता गर्भवती थीं, आश्रम में सभी संन्यासी थे। आश्रम पूर्णरूप से स्त्रीविहीन था। सीता माता को यह चिंता थी कि स्त्रीविहीन इस आश्रम में प्रसव के समय उन्हें कौन संभालेगा? इस समस्या के निवारण हेतु उन्होंने अपने कुल देवता ‘सूर्य’ की स्तुति की। सूर्य भगवान ने प्रकट होकर उन्हें आशीर्वाद दिया एवं सीता माता को चिन्तामुक्त किया। प्रसव के पूर्व ही ‘सूर्य’ नारी रूप धारण कर वहां उपस्थित हुए। उन्होंने एक स्त्री के रूप में सीता माता की सेवा सुश्रूषा की। कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी को उन्होंने लव-कुश को आशीर्वाद दिया और अंतरध्यान हो गये। इसलिये इस पर्व को ‘छठ मैया’ के रूप में मनाया जाता है।

यह पर्व विशेष रूप से बिहार एवं पूर्वी उत्तर प्रदेश में बहुत धूमधाम से मानाया जाता है। बिहार का तो यह सबसे महत्वपूर्ण पर्व है ही, परन्तु अब धीरे-धीरे सम्पूर्ण देश में यह त्योहार मनाया जाने लगा है। मुंबई में अनेक स्थानों पर यह पर्व मनाया जाता है-जैसे, जुहू चौपाटी, वर्सोवा चौपाटी, पवई तालाब, मडआईलैंड, भायन्दर चौपाटी इत्यादि। मुंबई में इसके जनक हैं मोहन मिश्र। वे पिछले 18 वर्ष से जुहू चौपाटी पर ‘छठ व्रतियों’ के सेवा हेतु भव्य आयोजन करते हैं। मोहन मिश्र ने सन् 1994 में तात्कालीन भाजपा विधायक श्री अभिराम सिंह की सहायता से दो पंडालों का निर्माण कराया और प्रसाद की व्यवस्था की। उसके बाद भारतीय जनता पार्टी ने भी इस कार्य हेतु सहयोग दिया। राजेश शर्मा, आर. यू. सिंह, अरुण देव, मदन त्रिवेदी, सुरेन्द्र दूबे, इत्यादि अनेक कार्यकर्ता इस कार्य में सहभागी बने। अब तो भव्यमंच, ‘सूर्य यज्ञ’ सांस्कृतिक कार्यक्रम, फल, दूध एवं भोजन की व्यवस्था, विश्रामालय, ध्वनिप्रेक्षक, इत्यादि की व्यवस्था सुचारु रूप से आठ वर्षो से चल रहा है। जब इस भव्य आयोजन को संजय निरूपम ने देखा, तो आश्चर्य चकित रह गये, लाखों की संख्या मे भक्त यहां आते है, जिनका राजनैतिक लाभ उठाया जा सकता है, तो उन्होने ‘बिहार फ्रंट’ नामक संगठन (ट्रस्ट) बनाकर जुहू सागर तट पर अतिविशाल मंच बनाकर, प्रचार-प्रसार के साथ, आयोजन किये, परन्तु उनका यह कार्यक्रम पूर्ण रूपेण राजनैतिक एवं ग्लैमराइज था। मुंबई में छठ पर्व, के प्रचार-प्रसार का श्रेय संजय निरूपम को जाता है, जुहू का सामाजिक संगठन ‘‘जुहू सिटीजन वेल्फेयर एसोशियेशन ने ‘छठ पूजा’ पर प्रतिबन्ध लगाने हेतु उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दाखिल कर दी, उच्च न्यायालय ने ‘छठ पूजा’ के सेवा कार्य पर प्रतिबन्ध लगा दिया, केवल शांति पूर्वक पूजा कर सकते हैं। उसके बाद मोहन मिश्र ‘छठ उत्सव महासंघ’ संजय निरुपम का बिहार फ्रंट, अभिराम सिंह का बिहार झारखंड छठ उत्सव’ इत्यादि संस्थाओं ने मे उच्च न्यायालय के निर्णय के विरोध मे सर्वोच्च न्यायालय में अपील किये, सर्वोच्च न्यायालय ने कुछ शर्तो के साथ उन्हें सेवा कार्य करने की अनुमति प्रदान की, परन्तु वे मंच का उपयोग किसी राजनैतिक पार्टी के लिए उपयोग नहीं करेगे। मंच व आस पास किसी राजनैतिक पार्टी का ध्वज नही लगायेंगे, तथा एक लाख रुपये, अग्रिम रूप जमा करा लिया जाता है (डिपाजिट) अगर कोई नियम का उल्लंघन करता है तो वह धनराशि जप्त हो जायेगी, नहीं तो सम्पूर्ण राशि वापस प्राप्त हो जायेगी।

इस वर्ष भी विशाल रूप से छठ पूजा का आयोजन किया गया था। विभिन्न सांस्कृति कार्यक्रमों का भी अयोजन किया गया था, परंतु बाला साहब ठाकरे के अचानक देहावसान के कारण सभी सांस्कृतिक कार्यक्रमों को रद्द कर दिया गया और शांतिमय वातावरण में संपूर्ण विधिविधान के साथ पूजा की गयी। छठ पूजा मुंबई में कई स्थानों पर आयोजित की गयी। दादर चौपाटी पर महंत चौबे और उर्मिला चौबे द्वारा इसका आयोजन किया गया। अक्सा बीच पर आर.यू.सिंह द्वारा छठ पूजा आयोजित की गयी। पवई,भाइंदर,जुहु बीच और अन्य कई स्थानों पर छठ पूजा का आयोजन किया गया। जुहु चौपाटी पर 11 ब्राह्मणों द्वारा सूर्य यज्ञ किया गया। यह यज्ञ सूर्यास्त से लेकर सूर्योदय तक चलता है। इस अवसर पर लगभग 15000 लोगों को महाप्रसाद और 10000लोगों को पानी की बोतलें वितरित की गयी।

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