जनता का मोदी-नीतीश पर भरोसा कायम

विपक्ष को सिर्फ विरोध के लिए विरोध की प्रवृत्ति का परित्याग करना श्रेयस्कर है। जबकि, सत्ता पक्ष को बिना किसी भेदभाव सबके लिए समान रूप से काम करना चाहिए। यही बिहार की गौरवशाली राजनीतिक परंपरा भी रही है। उम्मीद है कि पक्ष-विपक्ष दोनों इस बात का विशेष ध्यान रखेंगे।

बिहार की जनता ने नतीजा सुना दिया है और एक बार फिर भाजपा-जदयू गठबंधन को राज्य की बागडोर सौंप दी है। चुनाव नतीजों को लेकर काफी ऊहापोह थी और शुरुआती रुझानों ने तो राजनेताओं की धड़कनें बढ़ा दी थीं। लोकतंत्र की यह खूबसूरती है कि जनता सत्ता की मालिक होती है और चाबी उसके पास होती है। तेजस्वी यादव के नेतृत्व में महागठबंधन को जनता ने सत्ता की चाबी नहीं सौंपी। भाजपा-जदयू गठबंधन पर जनता ने एक बार फिर भरोसा जताया है। यह सही है कि बिहार में विकास के व्यापक काम हुए हैं। पर, इसकी रफ्तार और तेज करने की जरूरत है।

इस बार के विधानसभा चुनाव में जिस तरह युवा वर्ग की आकांक्षाओं का उभार देखने को मिला, उसे शीघ्र पूरा नहीं किया गया तो निश्चय ही वे हताश-निराश होंगे, जो ठीक नहीं। इसके लिए सरकारी नौकरियों के साथ व्यापक स्तर पर रोजगार के अन्य अवसर भी पैदा किया जाना आवश्यक है। समझना होगा कि बिहार एक बहुत बड़ा बाजार है। यहां उद्योग-धंधों की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। इस दिशा में योजनाबद्ध तरीके से ईमानदार प्रयास करने की जरूरत है। बंद पड़े पुराने उद्यगों को फिर से शुरू कराने के साथ-साथ नए उद्योग स्थापित करके संभावनाओं के द्वार खोलने होंगे। प्रयास होना चाहिए कि प्रदेश में आने वाले नए उद्यमियों को प्रशासनिक जटिलताओं से बचाते हुए सरकार की ओर से मिलने वाली सभी सहूलियत समय पर उपलब्ध कराई जाए। इच्छाशक्ति के साथ कदम बढ़ाया जाए तो इस क्षेत्र में आसानी से बेहतर उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं। ध्यान रहे कि यह समय पुरानी बातों को लेकर एक-दूसरे को घेरने या फिर कठघरे में खड़ा करने का नहीं है, बल्कि नई लकीर खींचने का सुअवसर है। सत्ता पक्ष को कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ते हुए अपने वादों को यथाशीघ्र पूरा करने का प्रयास करना चाहिए, जबकि विपक्ष को सजग रहते हुए जन आकांक्षा के अनुरूप कार्य करना होगा। जनादेश को पूरी तरह सार्थक करने के लिए सामूहिक प्रयास की दरकार है। प्रदेश में रोजगार, शिक्षा, कृषि, उद्योग, ग्रामीण, विकास से लेकर विज्ञान-प्रौद्योगिकी सहित तमाम मोर्चों पर कार्य हुआ है। लेकिन, अभी बहुत कुछ करना शेष है। आंकड़े जो हों, लेकिन नई सरकार के समक्ष यह एक बड़ी चुनौती होगी कि किस तरह पुलिस महकमे में भ्रष्टाचार कम किया जाए और दिन-प्रतिदिन के काम में किसी स्तर से राजनीतिक हस्तक्षेप न हो।

बिहार में जारी विकास की गति को न सिर्फ कायम रखने की, बल्कि उसे तेज करने की चुनौती होगी। बढ़ती आबादी की जरूरतों व नई उम्मीदों को विकास की गति तेज करके ही पूरा किया जा सकता है। नई सरकार के समक्ष यह बड़ी चुनौती होगी कि केंद्र सरकार से पहले की तरह ही तालमेल बनाए रखकर विकास की और भी अधिक योजनाएं लाई जाएं। यह सुनिश्चित करना होगा कि किस तरह केंद्र से आर्थिक मदद न सिर्फ जारी रहे बल्कि बढ़े। इसके लिए पक्ष-विपक्ष दोनों को आपसी सहयोग-विश्वास के साथ सही दिशा में आगे बढ़ना होगा। विपक्ष को सिर्फ विरोध के लिए विरोध की प्रवृत्ति का परित्याग करना श्रेयस्कर है। जबकि, सत्ता पक्ष को बिना किसी भेदभाव सबके लिए समान रूप से काम करना चाहिए। यही बिहार की गौरवशाली राजनीतिक परंपरा भी रही है। उम्मीद है कि पक्ष-विपक्ष दोनों इस बात का विशेष ध्यान रखेंगे। साथ ही वक्त आ गया है कि बिहार भविष्य की ओर देखे। पिछली बार जो प्रयास किए, उनसे सीख लेकर उत्साह के साथ आगे बढ़े, भविष्य का चिंतन करें। बिहार आगे बढ़ेगा, तभी देश भी आगे बढ़ेगा।

आपकी प्रतिक्रिया...