ब्रज विकास ट्रस्ट

हमारा भारत वर्ष सदैव ही आध्यात्म से परिप्ाूर्ण रहा है। विभिन्न मतों-सम्प्रदायों के विभिन्न श्रद्धा स्थान हैं। स्थान-स्थान पर बने मन्दिरों के कारण लोगों की भि क्त आज भी जागृत होती है। भारत और दुनिया के अन्य देशों के लोग ब्रजभूमि में उनके दर्शन करने आते हैं। ब्रज में ही भगवान श्री कृष्ण के भक्तों की संख्या अत्यधिक है और देश-विदेश से लोग उनके दर्शन करने आते हैं। ब्रज में ही भगवान कृष्ण ने अपनी अधिकतम लीलाएं इसी भूमि पर की हैं, चाहे वह कालिया नाग मर्दन हो, चाहे राधा रानी और गोपियों से रास लीला हो या ग्वाल-बालों से मिलकर माखन चुराना या गायें चुराना हो। यह भूमि इन सभी की साक्षी रही है। ब्रज चौरासी कोस की परिक्रमा के माध्यम से भक्तजन उन सभी स्थानों के दर्शन कर सकते हैं, जहां पर भगवान श्री कृष्ण ने अपनी विभिन्न लीलाएं की थीं। इस परिक्रमा में कई मन्दिर तालाब, सुरम्य स्थल, कुण्ड इत्यादि आते हैं।

ब्रज विकास ट्रस्ट के उद्देश्य

ब्रज चौरासी कोस की परिक्रमा-मार्ग एवं उप मार्गों का निर्माण एवं जीर्णोद्धार कराना।

– ब्रज चौरासी कोस की परिक्रमा में आने वाले यात्रियों की सुविधा हेतु धर्मशाला,पण्डाल, रैन-बसेरों आदि का निर्माण कराना एवं सुविधा के समस्त उचित प्रबन्ध करना।

ब्रज क्षेत्र में आने वाले समस्त प्राचीन एवं गौरवप्ाूर्ण स्थानों की सुरक्षा

– वातावरण को श्ाुद्ध करने के लिए वृक्षारोपण करना एवं उनके रख-रखाव की उचित व्यवस्था करना।

– गायों की सुरक्षा एवं खान-पान की व्यवस्था हेतु गौशालाओं का निर्माण करना एवं उनका संचालन करना,

– ब्रज संस्कृति के प्रचार-प्रसार एवं देश में सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक जागरण के लिए सत-साहित्य का प्रकाशन तथा प्रसार करना।

– साधु-संन्यासियों एवं वानप्रस्थियों की सुविधा हेतु वानप्रस्थ-आश्रम का निर्माण एवं संचालन करना।

– आंख के अस्पताल एवं रिसर्च सेन्टर का निर्माण एवं उनका संचालन करना।

-विद्यालयों एवं महाविद्यालयों का निर्माण एवं उनका संचालन करना।

-अन्न क्षेत्र का निर्माण एवं संचालन, जिसमें साधु, महात्मा, संन्यासी व गरीबों के लिए भोजन का प्रबन्ध तथा अन्न, वस्त्र का वितरण करना।

– बाढ़, अकाल, महामारी एवं अन्य किसी आकस्मिक आपत्ति के समय दुर्घटनाग्रस्त जनता की सहायता करना।

– विद्यालयों में पढ़ने वाले निर्धन एवं असहाय छात्र-छात्राओं के लिए छात्रवृत्ति, भोजन तथा छात्रावासों का निर्माण एवं संचालन करना।

– मानव मात्र को निरोगी तथा स्वस्थ्य रखने के लिए योग शिविर एवं योगाश्रमों का निर्माण करना एवं उनका रख-रखाव व संचालन करना।

– जन-सामान्य की बौद्धिक प्रगति के लिए वाचनालय, प्ाुस्तकालय आदि की स्थापना एवं संचालन करना।

– मानव के सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक जागरण एवं उत्थान के लिए सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक शिविरों एवं आश्रमों का निर्माण करना एवं संचालन करना।

सेवाकार्य का श्ाुभारम्भ

सन 2006 की जन्माष्टमी से इस कार्य का श्ाुभारम्भ किया गया था। ब्रज की परिक्रमा का पहला दर्शन धुव नारायण मन्दिर के दर्शन तथा मधुवन और कृष्ण कुण्ड में स्नान से होती है। अत: इसका ही जीर्णोद्धार पहले करने का निश्चय किया गया। ब्रज के सर्वांगीण विकास हेतु संसाधन जुटाने के लिए ब्रज सेवा श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का संकल्प लिया गया। इसके लिए मुंबई के गोरेगांव उप नगर में बांग्ाुर नगर को इस कार्य का स्थल निश्चित किया गया। इस कार्यक्रम के साथ सवा ग्यारह लाख हनुमान चालीसा पाठ तथा अष्टोत्तर सहस्त्र अर्थात एक हजार आठ पोथियों के विभूषित भागवत ज्ञान यज्ञ का भी आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम 11 जनवरी, 2008 से 18 जनवरी 2009तक आयोजित किया गया। इसके अगले सोपान में ब्रज विकास सेवा यात्रा को और अधिक गति प्रदान करने तथा इसे सांस्कृतिक प्ाुनर्जागरण का अभियान बनाने के लिए यह निश्चित किया गया कि सन 2010 की कथा वृंदावन के पवित्र तीर्थ क्षेत्र में रमेश भाई ओझा के श्री मुख से करायी जाये। इसके लिए रमेश भाई ने भी 1008 श्रीमद्भागवत कथा और सवा लाख हनुमान चालीसा पाठ के अनुष्ठान के लिए अपनी सहर्ष सहमति प्रदान की। इस आयोजन की अपार सफलता के बाद मुंबई में 18 सितंबर, 2011 को इस्कॉन मन्दिर में परमप्ाूज्य कार्ष्णि ग्ाुरु शरणानंद जी के पावन सानिध्य में ट्रस्ट द्वारा एक शाम ब्रज के नाम कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में 18 नवंबर,2011 तक 252 पोथियों से विभूषित श्रीमद्भागवत कथा के आयोजन की घोषणा की गयी।

अत्यन्त प्राचीन होने के कारण इनकी अवस्था जीर्ण-शीर्ण हो गयी थी। जब भी कोई व्यक्ति तीर्थाटन या पर्यटन के लिए कहीं जाता है तो उसके लिए मानवीय सुविधाओं का होना आवश्यक है। आवास, स्नान, प्रसाधन,पेयजल जैसी आवश्यक सुविधाएं ब्रज चौरासी कोस में नगण्य थीं। श्रद्धालु बड़ी भक्ति भावना से यहां आते थे, परन्तु यहां की दुर्दशा देखकर उनका मन व्यथित हो जाता था। मन्दिरों के मुख्य मार्ग जर्जर थे। सीढ़ियां टूटी थीं, जिससे सदैव दुर्घटना की आशंका बनी रहती थी। कुण्डों का जल प्रदूषित हो गया था। इन सब समस्याओं को हल करने के लिए सन 2006 में विश्वनाथ चौधरी ने ब्रज चौरासी कोस की यात्रा की और ब्रज विकास ट्रस्ट नामक संस्था की स्थापना की।
इन सभी विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से जो लोगों से और धनराशि एकत्र हुई वह ब्रज चौरसी कोस परिक्रमा में आने वाले मन्दिरों और कुण्डों आदि के जीर्णोद्धार में व्यय की गयी। इस तरह की विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से देश के अन्य धार्मिक स्थानों पर भी जीर्णोद्धार करना आवश्यक है, क्योंकि इस तरह की विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से देश की संस्कृति और धर्म की रक्षा के लिए इन स्थानों का बचे रहना आवश्यक है, जिससे हम अपनी आने वाली पीढ़ियों को इनका दर्शन करवा सकें।

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