TMC की प्रताड़ना से परेशान नेता व जनता, दलबदल और बदलाव के लिए तैयार

दिसंबर के सर्द मौसम में पश्चिम बंगाल की सियासत बेहद गर्म है। वजह राजनीति से जुड़ी है। नए समीकरण का असर आसमान से जमीन पर बहुत साफ नजर आ रहा है। टीएमसी के लिए 19 दिसंबर का अपशगुन भाजपा के लिए साल 2020 का सबसे बड़ा शगुन बन गया। तृणमूल कांग्रेस के सौभाग्य सितारे शुभेंदु अधिकारी दल बल के साथ भाजपा का हिस्सा बन गए, कभी तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी के दो बाजू रहे तृणमूल के दोनों शीर्ष नेता अब भाजपा की शोभा और सामर्थ्य का हिस्सा है। 
 

कभी दीदी के सबसे खास रहे मुकुल रॉय ने 2017 में बगावत के जिस बिगुल को फूंका था अब उस बिगुल में शुभेंदु अधिकारी ने अपना स्वर मिलाकर बगावत के स्वर को और तेज कर दिया है। बंगाल के आसमान में परिवर्तन की लिखावट अब पहले से कहीं ज्यादा गहरी हो गई है इस लिखावट की स्याही भाजपा के बलिदानी कार्यकर्ताओं के उस रक्त बूंद से बनी है जिसने हिंसा की खूनी रंग को आत्मोसर्ग के केसरिया में बदला है। बंगाल के समूचे आकाश में सोनार बांग्ला की लिखावट जिन कूचियों से हुई है वे कूचिया भाजपा के लाखों कार्यकर्ताओं के हाथ में आबाद है। 

 
बंगाल में रक्तपिपासना पर उतारू तृणमूल संगठन और सरकार की हर प्रताड़ना को भोग कर मैदान में अड़े रहना सामर्थ्य और सहनशीलता की पराकाष्ठा है। सियासी आतंक और अन्याय के सामने दशकों तक चुप्पी साधे रखने वाला समाज अब मुखर होने लगा है, हिंसा और लूट के खिलाफ उठ रही आवाम की आवाज में तृणमूल के होश उड़ा दिए हैं। दीदी का डर और बौखलाहट चरम पर है बंगाल का स्वाभिमान दलिय प्रतिबद्धताओं की सरहद लगने लगा है। माटी से मानुष तक बंगाल में परिवर्तन की बयार तेज होने लगी है। बंगाल बदलाव में भाजपा की पीढ़ियों की साधना मौजूदा नेतृत्व का कौशल और परिश्रम एक बड़ा कारण तो है ही, पर साथ में कुछ गहरे और जरूरी कारण तृणमूल की सरकार और संगठन के भीतर भी मौजूद हैं। 
 
बरहाल पश्चिम बंगाल के आसमान का रंग बदलने लगा है। वाम के गहरे लाल से टीएमसी के दौर में सुर्ख नीला हुआ आसमान अब चटक भगवा होने लगा है। आसमान का भगवा होना भोर और भाग्योदय दोनों की गवाही है। टीएमसी की नीली सरकार और सियासत के रग रग में शामिल हिंसा के खूनी रंग और कट कमीशन करप्शन की स्याह काले रंग ने उत्सव और उदय के रंग भगवा को और चटक कर दिया है। 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान टीएमसी के 18 लोकसभा सीट पर विजय पताका लहरा चुकी भाजपा की विजय यात्रा पहले से ज्यादा सुसज्जित और शक्ति संपन्न दिख रही है। भाजपा के मुकाबले टीएमसी की सेना और सेहत दोनों में गिरावट जगजाहिर है। टीएमसी प्रमुख और राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के तमाम सिपहसालार, सेनापति और सामंत लगातार टीएमसी से दूर हो रहे हैं जिससे यह साफ साबित होता है कि टीएमसी के भीतर विरोध और विद्रोह चरम पर है। 
कटमनी, करप्शन के तंत्र में आकंठ डूबी तक टीएमसी की सरकार से बंगाल की आवाम सरकार पोषित गुंडई, हत्या और हिंसा के खिलाफ अब मुखर हो गई है। समाज कल्याण की नीतियों में भेद करने वाली टीएमसी की सरकार पर राज्य की जनता रत्ती भर भी भरोसे के लिए तैयार नहीं है, साथ ही ममता बनर्जी की ओर से पार्टी में परिवारवाद थोपा जाना भी पार्टी के बिखराव का बड़ा कारण है। 
सौजन्य- पाञ्चजन्य

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