देश में ट्रेनों का बदलता स्वरुप, बिना ड्राइवर के भी चलेगी ट्रेन

अगर आप किसी बुजुर्ग से यह कहेंगे कि बिना ड्राइवर के भी ट्रेन चलती है तो शायद उसको आप की यह बात मज़ाक लगेगी, क्योंकि उसके मन में हजार सवाल पैदा होंगे, बिना ड्राइवर वाली ट्रेन रुकेगी कैसे? ट्रेन को खुद से स्टेशन का पता कैसे चलेगा? अगर कोई ट्रेन के सामने आता है तो वह रुक नहीं सकेगी लेकिन टेक्नॉलिजी ने आज इसे भी सही साबित कर दिया। देश को पहली बिना ड्राइवर वाली ट्रेन मिल गयी है जिसका उदघाटन खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। पीएम मोदी ने इसे देश के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि इस नयी टेक्नॉलिजी से दुर्घटनाओं पर रोक लगेगी। 
 
प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होने तीन साल पहले इस लाइन का शिलान्यास किया था और अब इसके उदघाटन का भी सौभाग्य मिला है जिससे यह साबित होता है कि देश तेजी से तरक्की कर रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि दिल्ली में मेट्रो पूर्व पीएम अटल जी की देन है। 2014 में जब बीजेपी केंद्र में आयी तो सिर्फ 5 शहरों में ही मेट्रो की सुविधा थी जबकि वर्तमान में 18 शहरों में यह सुविधा उपलब्ध हो चुकी है और 2025 तक मोदी सरकार इसे 25 से ज्यादा शहरों तक पहुंचाना चाहती है। मेट्रो आम ट्रेनों का बदलता स्वरूप है और यह कम दूरी के लिए इस्तेमाल होती है। भारत में मेट्रो ट्रेन को शहर के अंदर तक ही सीमित रखा गया है और इसमें सिर्फ यात्री ही यात्रा करते है। 
 
देश की राजधानी दिल्ली को बिना ड्राइवर वाली पहली ट्रेन मिल गयी है इसको लेकर लोगों में इस बात की खुशी है कि इसका अनुभव कैसा होगा तो वहीं इस बात का डर भी है कि आखिर इस ट्रेन की यात्रा कितनी सुरक्षित होगी। बिना ड्राइवर वाली यह ट्रेन जनकपुरी से बोटैनिकल गार्डेन तक चलेगी जिसकी कुल दूरी 37 किमी है। जानकारी के मुताबिक इस ट्रेन में ऐसी खासियत है कि यह पूर्णरुप से ऑटोमैटिक है जो किसी भी गलत सूचना पर रुक जायेगी और अगर एक ही ट्रैक पर दो ट्रेने आ जाती है तो यह चलना बंद कर देगी।
 
कैसे चलेगी बिना ड्राइवर वाली मेट्रो? 
बिना ड्राइवर वाली मेट्रो कैसे चलेगी यह सवाल सभी के मन में होगा क्योंकि यह आम लोगों के लिए मात्र एक कल्पना भर है। बिना ड्राइवर वाली ट्रेन को DMRC के तीन कमांड सेंटरों से संचालित किया जायेगा। मेट्रो ट्रेन को सिग्नल और जीपीएस तकनीक से चलाया जायेगा। कमांड सेंटर ट्रेन से पूरी तरह से कनेंक्टेड होंगे जो रियल टाइम में काम करेंगे।   
 
भारत सहित पूरी दुनिया टेक्नॉलिजी के पीछे भाग रहा है। सरकारें गांव को भी पूरी तरह से शहर बनाने पर तुली हुई है और ऐसा ही चलता रहा तो कुछ सालों बाद गांव पूरी तरह से ही खत्म हो जायेंगे। शहरीकरण और टेक्नॉलिजी को तेजी से ग्रहण किया जा रहा है जिससे प्रकृति के साथ खिलवाड़ हो रहा है और सभी को बाजारों पर आश्रित किया जा रहा है। शहरीकरण और टेक्नॉलिजी से भौतिक सुख बढ़ जाता है। इंसान की हर सुविधा उसके हाथों में होती है मात्र एक बटन दबाने से ही उसका काम हो जाता है लेकिन इसका दुष्परिणाम भी होता है जो बहुत घातक होता है। 
 
मोदी सरकार ने जब से देश की बागडोर संभाली है तब से ही ट्रेनों में सुधार हो रहा है। आजादी के बाद से देश में बहुत कुछ बदला लेकिन ट्रेन की स्थिति में कुछ ज्यादा सुधार देखने को नहीं मिला है। देश में ट्रेनों का देरी से चलना आम बात होती है। स्टेशनों की हालत जो करीब 20 साल पहले थी वहीं आज भी देखने को मिलती है लेकिन मोदी सरकार के राज-काज में ट्रेन की गति, स्थिति और टेक्नॉलिजी में सुधार हुआ है और आगे भी हो रहा है। देश को तेज गति की ट्रेनें मिली है जो आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित है। 

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