वैश्विक सहयोग से होगा महामारी का खात्मा

दुनिया का कोई भी देश इस संक्रमण से पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। अत:, इस वैश्विक खतरे से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर संयुक्त रूप से कार्रवाई की आवश्यकता होती है। प्रत्येक देश को अपने नागरिकों को सुरक्षित रखने के लिए अपनी नीतियों में वैश्विक सहयोग, एकजुटता और देशों के बीच समन्वय स्थापित करना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि मानव को इस महामारी से हर सम्भव कम से कम नुकसान हो।

नोवेल कोरोना वायरस से उत्पन्न रोग महामारी में बदल गया है, जिसका विकराल रूप मानव जाति के लिए एक बड़ा वैश्विक खतरा बन गया है। कोरोना वायरस प्रमुख रोग जनकों (पैथोजेंस) में से एक है, जो मुख्य रूप से मानव श्वसन प्रणाली को प्रभावित करता है। दिसंबर 2019 के अंत में, रोगियों के एक समूह को शुरुआती तौर पर निमोनिया के लक्षणों के साथ अस्पतालों में भर्ती कराया गया था। प्रारंभिक रिपोर्टों में S-RS-CoV-2 नामक संभावित कोरोना वायरस को प्रकोप की शुरुआत माना गया, जिसे COVID-19 रोग का नाम दिया गया। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने सम्पूर्ण विश्व में फैलती इस महामारी को वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है।

पिछले प्रकोपों के अनुभवों से पता चलता है कि जैसे ही कोई महामारी विकसित होती है, वर्तमान स्वास्थ्य सुविधाओं से कहीं अधिक सार्वजनिक स्वास्थ्य गतिविधियों को बढ़ाने, रोग प्रबंधन के बुनियादी सिद्धांतों और उपलब्ध संसाधनों को यथासम्भव अधिकतम उपयोग करने की तत्काल आवश्यकता होती है। COVID-19 के प्रकोप के बाद व्यक्तिगत और सामुदायिक स्तर के प्रयासों को आपातकालीन तैयारियों में प्राथमिकता दी गई। वास्तव में, COVID-19 महामारी में व्यक्ति और समुदाय दोनों में मनोवैज्ञानिक और व्यवहार संबंधी बदलाव लाना और सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं की अधिकतम उपलब्धता सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण हैं। लंबे समय से माना गया है कि पर्याप्त पोषण की कमी से व्यक्तियों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ते हैं। वास्तव में, संतुलित आहार के अभाव में न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है।

कोविड-19 संक्रमण और पोषण

COVID-19 सहित वायरल संक्रमणों से निपटने में व्यक्ति के आहार और प्रतिरक्षा यानि इम्यूनिटी के स्तरों की एक महत्वपूर्ण भूमिका होती है। मौजूदा अध्ययन संकेत देते हैं कि आहार का लोगों की प्रतिरक्षा प्रणाली और रोग की चपेट में आने की संभावना पर गहरा प्रभाव पड़ता है। विशिष्ट पोषक तत्व अकेले या संयोजन में करके कोशिकाओं के संकेतक अणुओं के उत्पादन और जीन अभिव्यक्ति में बदलाव लाकर प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित कर सकते हैं, इसके अलावा, हमारा आहार आंत में मौज़ूद माइक्रोबियल संरचना का महत्वपूर्ण निर्धारक होता है और शरीर की प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाएं इसी पर आधारित होती हैं। हमारे पोषक तत्वों में ऊर्जा, प्रोटीन और विशिष्ट माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की कमी से प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती है और हमारा शरीर संक्रमण के प्रति संवेदनशील हो जाता है। यदि हमारे शरीर को पर्याप्त मात्रा में आयरन, जिंक और विटामिन ए, ई, बी 6, और बी 12 जैसे सूक्ष्मपोषक तत्व यानि माइक्रोन्यूट्रिएंट्स मिलते रहें तो हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली सुचारु रूप से कार्य करते हुए हमें रोगों से सुरक्षा प्रदान करती है। इसलिए, प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावी बनाए रखने के लिए पोषक तत्वों की कमियों से बचना अत्यंत महत्वपूर्ण है। यही पोषक तत्व प्रतिरक्षा कोशिका को प्रेरित करने, पारस्परिक क्रियाशीलता और रोग के उभरने में एक आवश्यक भूमिका निभाते हैं।

                              राष्ट्रीय स्तर पर कोविड-19 के दौरान पोषण संबंधित सिफारिशें

कम मूल्य की एक ऐसी भोजन थाली उपलब्ध कराना, उसका वितरण कराना, जो आबादी की स्वास्थ्य संबंधी समस्या दूर कर सके, देश में स्थानीय कृषि उत्पादों के उपयोग को सुनिश्चित करे, और देश में खाद्य वस्तुओं के आयात की निर्भरता दूर कर सके।

खाद्य वस्तुओं की खरीद के लिए धनराशि जुटाने के लिए संसाधनों का उपयोग किया जाए।

सामान्य रूप से आवश्यक, मूल खाद्य वस्तुओं पर लगने वाले कर पर छूट दी जाए जिससे कमज़ोर वर्ग के लोगों को वह सस्ते दामों में उपलब्ध हो सके।

कृषि और खाद्य उत्पादन से जुड़े उद्योगों को वित्तीय एवं अन्य सहायता प्रदान करना।

बाज़ार और खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर कड़ी निगरानी रखना और समय-समय पर निरीक्षण करना।

निजी क्षेत्रों, अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों और स्थानीय समुदायों के साथ एक नेटवर्क तैयार करना।

उच्च दर्ज़े की पारदर्शिता अपनाना जो लोगों में विश्वास पैदा करने, सहायता प्रदान करने और कार्य का अनुपालन करने के लिए महत्वपूर्ण होता है।

कोविड-19 महामारी, लॉकडाउन और स्वास्थ्य समस्याएं

COVID-19 वैश्विक महामारी ने आहार ग्रहण करने की हमारी पद्धति के सामने बड़ी चुनौतियां खड़ी कर दी हैं । सबसे पहले, दुनिया भर के कई देशों में लॉकडाउन की स्थिति की घोषणा की गई, केवल स्वास्थ्य और कुछ बहुत ज़रूरी सेवाओं को छोड़कर सभी सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के संस्थानों को बंद करने का निर्णय लिया गया। किसी के घर में रहने का सीधा प्रभाव उस व्यक्ति की जीवन शैली पर पड़ता है, जिसमें आहार की आदतें, खान-पान और शारीरिक गतिविधियां शामिल हैं। घर में बंद रहने के दौरान कम मात्रा में ऊर्जा का व्यय होता है। कम अवधि के लिए भी निष्क्रिय रहने पर शारीरिक गतिविधि का स्तर बहुत कम हो जाता है। इस स्थिति का हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। लॉकडाउन के दौरान घर में बंद रहने की स्थिति में हमारे खान-पान का स्वरूप बदल कर अनियमित हो जाता है, और हम लगातार भूख नहीं लगने की स्थिति में भी कुछ न कुछ खाते रहते हैं। इन स्थितियों में हमारे शरीर में कैलोरी का सेवन उच्च मात्रा में होता है जो मोटापे की चपेट में आने कारण बनता है।

कोविड-19 महामारी और मानसिक स्वास्थ्य

दुनिया भर के कई लोगों में COVID-19 वैश्विक महामारी के दौरान उनकी खान-पान की आदतों में आये बदलाव से भी भय और चिंता का माहौल बन गया है। लोगों की आहारीय आदतें इस प्रकोप से उत्पन्न तनाव,चिंता और भावनात्मक अशांति की स्थितियों से प्रभावित होती हैं। इसके अलावा, भय और उदासी जैसी भावनाएं भूख को मार देती हैं और आहार भी अनिच्छा से ग्रहण किया जाता है, अर्थात् खाने में आनंद की अनुभूति बिल्कुल नहीं होती। हाल ही में, भावनाओं और आहार ग्रहण करने की इच्छा के बीच सम्बंधों पर किए गये अध्ययन से पता चला है कि भोजन के सेवन में आने वाले बदलाव के लिए मनोवैज्ञानिक और शारीरिक क्रिया दोनों के माध्यम से तनावपूर्ण और भावनात्मक अवस्थाओं की प्राकृतिक प्रतिक्रिया जिम्मेदार हो सकती है।

 

             वैश्विक स्तर पर कोविड-19 के दौरान पोषण संबंधित सिफारिशें
*वैश्विक स्तर पर नियमित व्यापार संचालित हो, व्यापार में किसी भी प्रकार के प्रतिबंधों से बचा जाए जो पहले से ही कोविड-19 की मार झेल रहे सामान्य लोगों को खाद्यों और आहार सामाग्रियों के साथ-साथ कृषि उत्पादों की आपूर्ति के लिए लाभदायक साबित होगा।
*खाद्य वतुओं के आयात पर लगने वाली लागत और अन्य प्रतिबंधों को कम किया जाए।
इस प्रकार हमारे आहार और उनसे मिलने वाले पोषक तत्वों की मौज़ूदगी में अन्य रोगों की भांति कोविड-19 संक्रमण से उत्पन्न स्वास्थ्य समस्याओं को निश्चित रूप से कम किया जा सकता है। इसके लिए स्वास्थ्य के प्रति व्यक्ति की जागरूकता, सरकार द्वारा उठाए गए कदमों और वैश्विक सहयोग की भूमिका महत्वपूर्ण है।

 

महामारी के समय पर्याप्त मात्रा में पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के लिए प्रत्येक देश से आग्रह किया गया है कि कम कीमत के आहार की उपलब्धता सुनिश्चित करें जिससे आबादी की स्वास्थ्य संबंधी ज़रूरतें पूरी हो सकें, उस देश के स्थानीय खेतों में पैदा होने वाले खाद्यों का उपयोग किया जा सके, और विदेशों से खाद्य वस्तुओं के आयात को कम किया जा सके। इन खाद्यों के उत्पादन, वितरण और विभिन्न समुदायों में उनकी उपलब्धता के लिए राष्ट्रीय स्तर पर नीतियां बनाने के साथ तैयारी करने के लिए ठोस योजना तैयार करने की आवश्यकता है। इन नीतियों में खाद्य वस्तुओं की खरीद के लिए धन की व्यवस्था करना, सामान्य रूप से उपयोग किए जाने वाले खाद्यों पर कर यानि टैक्स में छूट देना, और कृषि एवं खाद्य उत्पादन उद्योगों को आर्थिक सहायता प्रदान करना शामिल है। खाद्य वस्तुओं की मांग और आपूर्ति पर कोविड 19 महामारी के प्रभाव के चलते उनकी कीमतें नियंत्रण से परे बढ़ गईं। इस स्थिति में राष्ट्रीय स्तर पर बाज़ारों और खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर कड़ी निगरानी रखने तथा निरीक्षण करने की आवश्यकता होती है।

              व्यक्तियों के लिए कोविड-19 के दौरान पोषण संबंधित सिफ़ारिशें

पूर्ण संतुलित आहार का सेवन करें, अनियमित रूप अनावश्यक खाते रहने से बचें।

ऐसे खाद्यों का सेवन करें जिनमें विटामिन ए, सी, ई, बी6 और बी12, ज़िंक एवं लौह यानि आयरन की प्रचुर मात्रा उपस्थिति हो, जैसे कि नींबू जाति के रसीले फल, हरी पत्तेदार सब्जियां, नट्स (काजू, बादाम, अखरोट, आदि), और डेयरी उत्पाद (दूध, दही, पनीर, मक्खन, चीज़, आदि)।

उत्तम जीवन शैली अपनाएं – जैसे कि नियमित व्यायाम करें, प्राणायाम करें और पर्याप्त नींद लें।

धूम्रपान, मदिरापान, मादक द्रव्यों के व्यसन से बचें।

कोविड-19 और पोषण यानि आहार सेवन के संबंध में भ्रामक सूचनाओं को प्रचारित-प्रसारित करने से बचें।

                         समुदाय के लिए कोविड-19 के दौरान पोषण संबंधित सिफारिशें

खाद्य वस्तुओं की जमाखोरी और उनकी अनावश्यक खरीददारी के विनाशकारी परिणामों के बारे में जागरूकता फैलाएं।

समुदाय में अल्पपोषित एवं कुपोषित लोगों विशेषत: वृद्धों एवं लम्बी अवधि से रोगग्रस्त व्यक्तियों की पहचान करें और यथासंभव उनको आहार संबंधी सहायता पहुंचाएं।

समुदाय के सभी लोगों के लिए आवश्यक खाद्य वस्तुओं की उपलब्धता, आर्थिक सहायता पहुंचाने के लिए एक विश्वस्त प्रणाली तैयार करें।

कोविड-19 महामारी का यात्रा पर प्रभाव

वैश्विक स्तर पर, वायु, जल अथवा सड़क मार्गों से एक देश से दूसरे देश में यात्रा करने को प्रतिबंधित किया गया, ताकि देश के नागरिकों को किसी अन्य देश से आने वाले संदिग्ध संक्रमित व्यक्तियों के सम्पर्क में आने से बचाया जा सके। देश की सीमा में भी अपने नागरिकों को सुरक्षित रखना आवश्यक है। हालांकि, इससे यात्रा, व्यापार और पर्यटन के रूप में देश को होने वाली आय पूरी तरह बाधित हो गई, साथ ही साथ नागरिक स्वतंत्रता का उल्लंघन भी हुआ है। जो देश आयातित खाद्यों पर बहुत अधिक निर्भर हैं, उन्हें सीमाओं के पूरी तरह बंद होने के परिणामस्वरूप आपूर्ति श्रृंखला के टूट जाने से अत्यंत कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इसलिए, देश में खाद्य आपूर्ति को सुनिश्चित करने के लिए वैश्विक व्यापार को निर्बाध रूप से संचालित करना और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों का पूर्ण उपयोग करना आवश्यक है। COVID-19 की उपस्थिति विश्व भर में होने से एक सबक यह मिला है कि दुनिया का कोई भी देश इस संक्रमण से पूरी तरह सुरक्षित नहीं है। अत:, इस वैश्विक खतरे से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर संयुक्त रूप से कार्रवाई की आवश्यकता होती है। प्रत्येक देश को अपने नागरिकों सुरक्षित रखने के लिए अपनी नीतियों में वैश्विक सहयोग, एकजुटता और देशों के बीच समन्वय स्थापित करना चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि मानव को इस महामारी से हर सम्भव कम से कम नुकसान हो।

निष्कर्ष में यह कहा जा सकता है कि इस महामारी की एक और विशेषता ज्ञात हुई है कि सामुदायिक, राष्ट्रीय और वैश्विक जैसे विभिन्न स्तरों का पारस्परिक सहयोग इस महामारी की त्रासदी को हल्का बना सकता है। समुदाय की एकता, सरकार की तैयारी और अंततः वैश्विक सहयोग इस महामारी से निपटने के लिए ज़रूरी हो गया है। इस परिप्रेक्ष्य में, निम्नलिखित कदम कोविड-19 के संक्रमण के पोषण संबद्ध खतरों व इससे उत्पन्न स्वास्थ्य समस्याओं से निपटने में सहायक हो सकते हैं।

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