नांदेड़ घटना: सिख समुदाय का बदलता रुप!

गुरु गोविंद सिंह के बलिदान को देश आज भी नहीं भूलता है क्योंकि उन्होंने अपने धर्म के लिए जान दे दी। गुरुनानक देव जी के भी बलिदान और सेवाभाव को भी पूरा देश याद करता है। यह कह सकते है कि किसी भी सिख को देखने के बाद एक अच्छे विचार मन में आते है क्योंकि उन्हें सेवा भाव सिखाया जाता है पूरी दुनिया में अगर लंगर कोई चलाता है तो वह सिख ही है जो अलग अलग भागों में लंगर चला कर आम और मजबूर लोगों की सेवा करते है। राष्ट्रवादी विचारधारा से प्रभावित सिख समुदाय ने आजादी की लड़ाई में बहुत बलिदान दिया था और आज भी सीमा पर यह दुश्मनों को लोहा दे रहे है।

पिछले कुछ दिनों से देश के सिखों के हालात बदले बदले से नजर आ रहे है। ना जाने किन कारणों से प्रभावित हो कर यह समुदाय अब कहीं कहीं पर राष्ट्रविरोधी कार्यों को अंजाम दे रहे है। सिख समुदाय अपनी धार्मिक मान्यता के अनुसार अपने साथ तलवार रखता है और इसके लिए उन्हें किसी से आज्ञा लेने की भी जरुरत नहीं होती लेकिन आज कल इसका दुरुपयोग होता नजर आ रहा है। अगर सबसे ताजा मामला देखा जाए तो महाराष्ट्र के नांदेड़ में सिख समुदाय के कुछ लोगों ने जमकर उत्पात मचाया और पुलिसवालों को तलवार से घायल कर दिया।

महाराष्ट्र में कोरोना का प्रभाव बहुत की तेजी से बढ़ रहा है जिससे तमाम त्यौहारों और उत्सवों पर रोक लगाई जा रही है इसी कड़ी में महाराष्ट्र सरकार ने सिखों के होला-मोहल्ला जुलूस को करने की इजाजत नहीं दी। सरकार का यह आदेश उन्हे रास नहीं आया और उन्होने सुरक्षा में खड़े पुलिसकर्मियों पर ही हमला बोल दिया। नांदेड़ गुरुद्वारे में करीब 300 से अधिक संख्या उपस्थित सिख समुदाय के लोग पुलिस पर ही टूट पड़े और तलवारों से हमला करना शुरु कर दिया। वहां गाड़ियों को भी बुरी तरह से क्षतिग्रस्त कर दिया गया। इस घटना में करीब 4 पुलिसकर्मी बुरी तरह से घायल हुए है जबकि हल्की चोट कई लोगों को आयी है। इस घटना की निंदा हर तरफ से हो रही है क्योंकि इसमें उन लोगों को बेवजह निशाना बनाया गया जो अपनी ईमानदारी से नौकरी कर रहे थे। सोशल मीडिया पर इस घटना की वीडियो भी उपलब्ध है जिसमें साफ साफ यह दिख रहा है कि कुछ लोग पुलिस बैरिकेड को तोड़कर बाहर आ रहे है और पुलिस पर तलवार से हमला कर रहे है।

हाल ही में किसान आंदोलन में भी सिखों का एक अलग रुप देखने को मिला था। हमेशा से देश के लिए अपनी आहुति देने वाले यह लोग सरकार और देश के खिलाफ खड़े होते नजर आये। अगर किसी बात को लेकर सरकार से मतभेद है तो उसके लिए अदालत और कानून बना है लेकिन सरकार के विरोध के लिए आम जनता को परेशान करना, सड़कों को पूरी तरह से बंद करना कहां तक सही है? किसान आंदोलन की हद तो तब हो गयी जब यह लोग जबरदस्ती लालकिले में घुस गये और वहां भगवा झंडा फहरा दिया। बताया जाता है कि इस दौरान लाल किले के कुछ बहुत ही महत्वपूर्ण सामान गायब हो गये जो हजारों सालों से लाल किले में संजोकर रखे गये थे। सिख समुदाय किसान आंदोलन के दौरान ऐसे लोगों के साथ भी खड़ा हुआ नजर आया जिसे देख हर कोई हैरान था।

इससे पहले ऐसी ही एक घटना पंजाब के पटियाला में देखने को मिली थी जहां सब्जी मंडी में जब कुछ सिखों को जाने से रोका गया तो एक निहंग सिख ने पुलिसवाले का हाथ की काट दिया। निहंग सिख के कई लोग एक गाड़ी से सब्जी मंडी में घुसने की कोशिश कर रहे थे लेकिन उन्हे बैरिकेड के द्वारा रोका गया और पास दिखाने को कहा गया लेकिन उन्होंने पास दिखाने की जगह पास मांगने वाले एएसआई का हाथ की काट दिया। हमला इतना तगड़ा था कि एएसआई का हाथ की कट कर अलग हो गया।

अगर आप किसी के इतिहास में झांककर देखते है तो वहां आप को सकारात्मक और नकारात्मक दोनों ही बातें देखने को मिलती है क्योंकि अपने अपने समय पर सब कुछ सही होता है लेकिन अगर आप सिखों के इतिहास पर नजर डालें तो गुरु नानक देव से लेकर अभी तक इनमें नकारात्मक वाले उदाहरण आप को बहुत ही कम मिलेंगे। सिखों ने हमेशा अपने देश और धर्म को प्राथमिकता दी है और उसके लिए बलिदान भी दिया है। सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह ने महाराष्ट्र के नांदेड़ में ही अपने जीवन की आखिरी सांस ली थी और सभी को यह बता गये कि देश और धर्म से बढ़कर कुछ नहीं है।

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