भारत के लिए खतरा रोहिंग्या मुसलमान

जांच में पता चला कि अलकायदा का आतंकवादी रहमान कई रोहिंग्याओं से सीधे संपर्क में था और वह दिल्ली, मणिपुर और मिज़ोरम में बेस बनाकर रोहिंग्या मुसलमानों को अलकायदा में भर्ती करना चाहता था। बताया जाता है कि रहमान अल कायदा के टॉप कमांडर से सीधे संपर्क में था और उनके निर्देश पर नापाक इरादों को अंजाम देने की तैयारियों में जुटा हुआ था। यह बात किसी से छुपी हुई नहीं है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई रोहिंग्या मुसलमानों को भारत में आतंकवादी हमला करने के लिए इस्तेमाल करना चाहती है। इस काम को अंजाम देने के लिए उसने भारत में अपने स्लीपर सेल के नेटवर्क को सक्रिय कर दिया है।

शरणार्थी संकट दुनिया के लिए एक नई मुसीबत बनकर सामने आ रहा है। जिससे दुनिया भर के देश भयभीत है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। पहले से ही भारत में घुसपैठ कर चुके करोड़ों बांग्लादेशी और अब रोहिंग्या मुसलमानों की अवैध गैरकानूनी घुसपैठ चिंता का सबब बनी हुई है, जो हमारे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा है। यदि समय रहते इस पर काबू नहीं पाया गया तो हालत बद से बदतर हो सकते हैं। दुनिया भर में ऐसा देखा जा रहा है कि शरणार्थियों को शरण देने वालों की ही अर्थी उठने लगी है और वह भी शरणार्थियों के द्वारा। इसलिए अब इस पर बहस छिड़ गई है कि मानवता के आधार पर शरण देना चाहिए या नहीं? अथवा शरणार्थियों के पृष्ठभूमि, इतिहास और वर्तमान में उनके चाल, चरित्र और व्यवहार को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेना चाहिए। पलायन और शरणार्थी संकट को अब संदेह की नज़र से देखा जाने लगा है। बीते 5 दशकों से विभिन्न कारणों से पलायन का सिलसिला लगातार जारी है। एक सोची समझी साज़िश के तहत किसी भी देश की डेमोग्राफी चेंज करने हेतु शरण लेने की आड़ में बड़ी संख्या में घुसपैठ की जाती रही है। साथ ही शरणार्थी द्वारा हिंसा, आतंकवादी हमला, राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल होना आम बात हो चली है। मानवता के आधार पर यूरोपीय यूनियन ने शरणार्थियों को बड़ी संख्या में अपने देशों में शरण दी थी, लेकिन, उसे इसका भयंकर खामियाज़ा भुगतना पड़ रहा है। इस मामले में लंबे अरसे से भारत भी भुक्तभोगी रहा है।

रोहिंग्याओं को वापस जाना ही होगा – केंद्र सरकार

राहत की बात यह है कि मोदी सरकार ने घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें देश से खदेड़ने की पहल की है और सर्वोच्च न्यायालय ने भी इस संदर्भ में रोहिंग्या मुसलमानों को देश से बाहर निकालने पर अपनी सहमति दर्शाई है। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय से कहा है कि भारत को घुसपैठियों की राजधानी नहीं बनाया जा सकता, रोहिंग्या को वापस जाना ही होगा। सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और विशेष अधिवक्ता हरीश साल्वे ने न्यायालय को बताया कि भारत ने शरणार्थी संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, इसलिए सरकार की कोई कानूनी जिम्मेदारी भी नहीं बनती। कानून के तहत ही रोहिंग्या मुसलमानों को म्यांमार को सौंपा जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भारत सरकार के किसी अन्य देश से कैसे संबंध है या आपसी सहयोग और विश्वास कितना है, इस पर न्यायालय कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकता। न्यायालय ने भी इस बात को स्वीकार किया है। बहरहाल, सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है।

जिहादी रक्तपात से सना है रोहिंग्याओं का इतिहास

कहते हैं यदि किसी की समस्या का निदान ढूंढना हो तो उसकी जड़ों की ओर जाना चाहिए और रोहिंग्याओं की जड़ों को टटोलना है तो उसके अतीत को देखना होगा तब हमें पता चलेगा कि रोहिंग्याओं का इतिहास जिहादी रक्तपात से सना हुआ है। जिसे जानने समझने के बाद कोई भी सभ्य देश रोहिंग्या मुसलमानों को अपने देश में शरण देने की भूल कभी नहीं कर सकता और भारत तो बिल्कुल भी नहीं सोच सकता क्योंकि सैकड़ों वर्षो से भारत ने जिहाद का नंगा नाच और खूनी संघर्ष केवल देखा ही नहीं बल्कि झेला भी है। नरपिशाच रोहिंग्या मुसलमानों ने वर्ष 2017 में म्यांमार के अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय का बड़ी ही निर्ममता से सामूहिक नरसंहार किया था। बच्चे-बूढ़े, महिला-पुरुष, युवा किसी पर भी उन्होंने रहम नहीं किया।उन्होंने सभी को मौत के घाट उतार कर ज़मीन में दफ़ना दिया गया। जिन्होंने इस्लाम कबूल किया केवल उन्हें ही जीवित छोड़ा गया। इसका पता तब चला जब 99 हिंदूओं की लाश सामूहिक कब्र से बरामद हुई।

आईएसआई और आतंकवादियों से जुड़े हैं रोहिंग्याओं के तार

देश की खुफिया एवं सुरक्षा एजेंसियों ने रोहिंग्या मुसलमानों की घुसपैठ को देश के लिए गंभीर खतरा बताया है और केंद्र सरकार ने भी सर्वोच्च न्यायालय में अपनी ओर से दलील दी है कि रोहिंग्या मुसलमान हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है। बीते कुछ वर्षों में दिल्ली, जम्मू, उत्तर प्रदेश, हैदराबाद एवं मेवात सहित अन्य जगहों से आतंकी मामलों में रोहिंग्या मुसलमान गिरफ्तार हुए है तथा आतंकवादी गतिविधियों में इनकी भूमिका साबित हुई है। रोहिंग्याओं को आतंकी ट्रेनिंग देने वाला अलकायदा का आतंकवादी रहमान भी दिल्ली से गिरफ्तार हुआ था। जांच में पता चला कि अलकायदा का आतंकवादी रहमान कई रोहिंग्याओं से सीधे संपर्क में था और वह दिल्ली, मणिपुर और मिजोरम में बेस बनाकर रोहिंग्या मुसलमानों को अलकायदा में भर्ती करना चाहता था। बताया जाता है कि रहमान अलकायदा के टॉप कमांडर से सीधे संपर्क में था और उसके निर्देश पर अपने नापाक इरादों को अंजाम देने की तैयारियों में जुटा हुआ था। यह बात किसी से छुपी हुई नहीं है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई रोहिंग्या मुसलमानों को भारत में आतंकवादी हमला करने के लिए इस्तेमाल करना चाहती है। इस काम को अंजाम देने के लिए उसने भारत में अपने स्लीपर सेल के नेटवर्क को सक्रिय कर दिया है।

भारत में व्यापक स्तर पर फैला हुआ है स्लीपर सेल का नेटवर्क

किसी भी देश में शत्रु राष्ट्र के स्लीपर सेल का होना खतरे से खाली नहीं है। किसी भी आतंकी हमले में सीधे तौर पर स्लीपर सेल ही मददगार होते हैं। स्लीपर सेल के नेटवर्क को ध्वस्त करना और उसका समूल नाश करना ही राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहतर है। सुरक्षा एजेंसियों ने आगाह किया है कि रोहिंग्या को भारत में बसाने में और आतंकवाद की ओर ले जाने में स्लीपर सेल सक्रिय हो गया है। इन स्लीपर सेल में राजनीति, मीडिया, एनजीओ एवं मानव अधिकार की आड़ में काम करने वाले लोग शामिल है।

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