सावधानी ही बचाएगी कोरोना से जान

हम सभी लॉकडाउन के दंश से उत्पन्न सामाजिक आर्थिक एवं स्वास्थ्य संबंधी कठिनाइयों से भली भांति परिचित हैं। देश-प्रदेश में लॉकडाउन की स्थिति दोबारा ना उत्पन्न हो, इसके लिए हमें कोविड-19 से बचने के लिए सभी संभव तरीके अपनाने होंगें।

कोरोना वायरस विषाणु का एक ऐसा वर्ग है जो जंतुओं और मानव दोनों में रोग पैदा करता है। सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम यानी डअठड (एस ए आर एस) विषाणु स्ट्रेन डअठड-उेत के नाम से जाना जाता है जो कोरोना वायरस का एक उदाहरण है। वर्ष 2002-2003 मे एस ए आर एस दुनिया भर में बड़ी तेज़ी से फैला था। वायरस का यह नया स्ट्रेन सीरियस एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम कोरोनावायरस 2 (डअठड-उेत-2) के नाम से जाना जाता है। यही वायरस कोरोना वायरस डिजीज 19 यानि कोविड-19 के लिए जिम्मेदार पाया गया है। कोविड-19 से प्रभावित लगभग 80% लोग बिना किसी विशेष ईलाज के ठीक हो जाते हैं। इन लोगों में हल्के फ्लू जैसे लक्षण देखे जाते हैं। ऐसे छह व्यक्तियों में एक व्यक्ति में सांस लेने में तकलीफ़ जैसे गंभीर लक्षण उभर आते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 11 मार्च, 2020 को कोविड-19 को एक वैश्विक महामारी के रूप में घोषित किया। कोई वैश्विक महामारी तब उभरती है जब दुनिया के व्यापक क्षेत्रों में फैले रोगों के प्रति लोगों में प्रतिरक्षा शक्ति नहीं पाई जाती है।

कोविड-19 से सुरक्षित रखने के लिए बचाव महत्वपूर्ण

आज विश्व, कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर से जूझ रहा है। वर्तमान स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तथा उपयुक्त सावधानियां बरतते हुए स्वयं को और अपने परिवार के सदस्यों एवं आसपास के लोगों को सुरक्षित रखें। स्वयं को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए वे सभी उपाय अपनाने होंगे जिनसे आप भली-भांति परिचित हैं। कुछ भी नया नहीं है, परंतु इस लेख के माध्यम से बचाव के उन उपायों को नियमित रूप से अपनाने के लिए प्रेरित करने का एक प्रयास है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशानिर्देशों के अनुसार निम्नलिखित बिंदुओं के अनुपालन से कोरोना संक्रमण को फैलने से रोका और स्वयं को सुरक्षित रखा जा सकता है: –

थोड़े-थोड़े समय में अपने हाथों को धोते रहें। साबुन और पानी अथवा अल्कोहल युक्त सैनिटाइजर का प्रयोग करें।
अपने को उस व्यक्ति से दूर रखें जिसे खांसी अथवा छींकें आती हों।
जहां शारीरिक दूरी जिसे हम सोशल डिस्टेंसिंग कहते हैं, बनाए रखना संभव नहीं हो वहां मास्क पहनें।
अपनी आंखों, नाक अथवा मुंह को बार-बार नहीं छुएं।
जब कभी भी आपको खांसी अथवा छींक आए, अपनी नाक और मुंह को रुमाल, टिशू पेपर अथवा झुककर कोहनी से ढकें।
यदि आपकी तबीयत ठीक नहीं हो तो घर में ही रहें।
यदि आपको बुखार, खांसी और सांस लेने में दिक्कत हो तो चिकित्सक की सलाह लें। यदि आप अपने चिकित्सक अथवा स्वास्थ्य कार्यकर्ता को पहले से सूचित करते हैं तो आपको तत्काल स्वास्थ्य सुविधा प्राप्त हो सकती है, इस प्रकार आप अपने को सुरक्षित रख सकते हैं और किसी अन्य को विषाणु के संक्रमण से बचा सकते हैं।

उपयुक्त मास्क का प्रयोग

मास्क पहनना एक ऐसा सशक्त तरीका है जिससे आप स्वयं को किसी दूसरे से संक्रमित होने अथवा स्वयं से किसी अन्य को संक्रमित होने से बचा सकते हैं। हालांकि, केवल मास्क पहनना कोविड-19 के प्रति सुरक्षित नहीं माना जा सकता। इसके साथ साथ शारीरिक दूरी यानि सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखना तथा अपने हाथों को बार-बार धोना अत्यंत जरूरी है।
आजकल उपलब्ध मास्क को हम तो वर्गों में बांट सकते हैं ये हैं: मेडिकल मास्क और नॉन मेडिकल मास्क।
मेडिकल मास्क: यह मास्क प्रायः कोविड-19 से संक्रमित व्यक्तियों की देखभाल करने और उनको चिकित्सा सुविधाएं प्रदान करने वाले स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं द्वारा प्रयोग किया जाता है। जिन व्यक्तियों को पेशी में दर्द, हल्की खांसी, गले में ख़राश अथवा थकान जैसे हलके लक्षण पाए जाते हैं, उनके द्वारा भी यह मास्क प्रयोग किया जाता है। नॉन मेडिकल मास्क: यह साधारण कपड़े से निर्मित तीन परतों वाला मास्क होता है, भीतरी कॉटन से बनी परत आपकी सांस के साथ निकली ड्रॉपलेट (सूक्ष्म कण) को सोख लेती है। बीच की परत ड्रॉपलेट्स को छान देती है तथा बाहरी पोलिएस्टर निर्मित परत बाहर से आने वाली नमी को रोक देती है। जिसमें बीच में एक हाइड्रोफिलिक परत होती है जिसके द्वारा खांसी अथवा छींक से निकले नम सूक्ष्म कण सोख लिए जाते हैं और वे मास्क के बाहर निकल नहीं पाते। यह साधारण मास्क 60 वर्ष से कम आयु के लोगों अथवा कोरोना संक्रमण के लक्षणरहित लोगों द्वारा प्रयोग किया जाता है। ध्यान रहे कपड़े से बना मास्क आपके आसपास लोगों को सुरक्षित रख सकता है परंतु, स्वयं को सुरक्षित रखने के लिए किसी भी व्यक्ति से स्वयं को कम से कम 1 मीटर फासले पर रखें। मास्क को पहनने से पहले और उसे उतारने से पहले और उतारने के बाद हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोने चाहिए। बेहतर तो यह होगा कि चेहरे पर लगे मास्क को जितनी बार छुएं उतनी बार अपने हाथों को धोएं। ध्यान रहे कि मास्क मुंह और नाक को अच्छी तरह ढंके। इस मास्क को प्रतिदिन धोएं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के दिशा निर्देशों के अनुसार मेडिकल और नॉन मेडिकल दोनों प्रकार के मास्क के प्रयोग के संबंध में जन सामान्य और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को आवश्यक प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।

कोविड 19 के प्रति वैक्सीनों से बचाव सर्वोत्तम

भारत में दिनांक 16 जनवरी, 2021 से कोविड-19 से बचाव के लिए दो वैक्सीनों को प्रयोग में लाकर पूरे देश में टीकाकरण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इनमें प्रथम भारत में ही निर्मित पूर्ण स्वदेशी कोवैक्सिन नामक वैक्सीन है जिसे केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद् के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित किया गया है और हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक नामक कंपनी द्वारा तैयार किया जा रहा है। दूसरी वैक्सीन है कोवीशील्ड जिसे ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनेका द्वारा संयुक्त रूप से विकसित और भारत के पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा निर्मित किया जा रहा है। भारत में कोविड-19 की बेतहाशा वृद्धि को देखते हुए भारत सरकार ने इनके द्वितीय प्रावस्था के क्लिनिकल ट्रायल्स से मिले परिणामों के आधार पर आपातकालीन प्रयोग कि लिए मंजूरी दी थी। हालांकि, अब इन दोनों वैक्सीनों के थर्ड फेज़ के क्लिनिकल ट्रायल्स में 80% प्रभावकारिता मिलने से इन्हें पूर्ण सुरक्षित माना गया है।

कोविड-19 से बचाव के अन्य तरीके

आज देश में महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, केरल, कर्नाटक जैसे कई राज्यों में कोविड-19 से पीड़ित होने वाले रोगियों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि होती जा रही है। भारत के प्रधानमंत्री, प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों, महानगरों की प्रशासकीय संस्थाओं द्वारा प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से लोगों को कोविड-19 संक्रमण से बचने के लिए नियमित रूप से आह्वान किया जा रहा है। परंतु, लोगों की लापरवाही का ही परिणाम है कि देश में कोविड-19 ने विस्फोटक रूप धारण कर लिया है। कोविड-19 से बचने के लिए मास्क पहनना, बार-बार हाथों को धोना, सोशल डिस्टेंसिंग अपनाना, वैक्सीन का टीकाकरण कराना, आदि अत्यंत महत्वपूर्ण उपाय हैं। इनके अलावा आज ज़रूरत है कि हम अनावश्यक घर से बाहर ना निकलें, दैनिक उपयोग की जरूरी वस्तुओं को ख़रीदने के लिए कम से कम बाहर निकलें, सामाजिक एवं धार्मिक सम्मेलनों में भाग लेने से बचें, विवाह इत्यादि के अवसर पर कम से कम लोगों को आमंत्रित करें, मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारे और चर्च जैसे धार्मिक स्थलों में कम से कम लोगों की उपस्थिति रखें, यदि बहुत आवश्यक न हो तो वायु, ट्रेन अथवा सार्वजनिक परिवहन की बसों से यात्रा न करें, वैज्ञानिक बैठकों और सम्मेलनों का आयोजन ऑनलाइन किया जाए, भारत सरकार के दिशानिर्देशों के अनुसार कार्यालयों में कर्मचारियों की उपस्थिति 50% से कम रखी जाए, पर्यटन कार्यक्रमों को फिलहाल स्थगित किया जाए। आज महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, केरल के कई शहरों के साथ-साथ राजधानी दिल्ली में दोबारा लॉकडाउन लगाने जैसी की स्थिति उत्पन्न हो गई है। हम सभी लॉकडाउन के दंश से उत्पन्न सामाजिक आर्थिक एवं स्वास्थ्य संबंधी कठिनाइयों से भली भांति परिचित हैं। देश-प्रदेश में लॉकडाउन की स्थिति दोबारा ना उत्पन्न हो, इसके लिए हमें कोविड-19 से बचने के लिए सभी संभव तरीके अपनाने होंगें।

आपकी प्रतिक्रिया...