आशिदा … अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वदेशी पहचान

आशिदा स्मार्ट सॉल्यूशन फॉर पॉवर प्रोटेक्शन एंड कंट्रोल कंपनी बिजली के अलग-अलग उपकरण बनाती है जो वर्तमान में कई कंपनियों और घरों में इस्तेमाल किए जाते हैं। आशिदा भारत की एकमात्र प्रमुख कंपनी है जिसने स्वदेशी रुप से स्टैटिक और न्यूमेरिकल रीले की एक श्रृंखला विकसित की है और कंपनी लगातार डायरेक्टरों सुयश कुलकर्णी और सुजय कुलकर्णी के नेतृत्व में विकसित होती जा रही है।

आशिदा इलेक्ट्रॉनिक्स बिजली के उपकरण बनाने वाली कंपनी है इस कंपनी की दो बातें खास है पहली की यह कंपनी एक परिवार के लोगों द्वारा चलाई जा रही है जिसमें छोटे से लेकर बड़े तक सभी एक ही परिवार या सगे संबंधी है दूसरा इस कंपनी को आगे बढ़ाने में महिलाओं ने अहम भूमिका निभाई है।

हर सफल पुरुष के पीछे महिला का हाथ होता है यह तो सभी जानते है लेकिन महिलाओं को आगे लाने में पुरुष भी बड़ी भूमिका निभाते है। हमारे देश में महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए सबसे पहले अपने पुरुष संबंधी से परमिशन लेनी होती है वह चाहे पिता हो या फिर पति, अगर उसकी इच्छा नहीं होगी तो घर की महिलाएं बाहर नहीं निकल सकती है। आज हम बात कर रहे है एक ऐसी नामचीन कंपनी की जिसमें महिलाओं ने अपना अहम योगदान दिया है। जिन क्षेत्रों को महिलाओं से दूर रखा गया था उसमें भी यहां महिलाओं को मौका मिला और उन्होने अपनी काबिलियत साबित की। सन 1970 में श्री भाऊ कुलकर्णी और श्री कृष्ण नाइक ने आशिदा इलेक्ट्रॉनिक्स की स्थापना की थी। इस कंपनी में भाऊ साहब की पत्नी आशालता कुलकर्णी भी बराबर का सहयोग दे रही थी क्योंकि उन्हे भाऊ साहब का पूरा सहयोग मिला हुआ था और यहीं से कंपनी में महिलाओं की हिस्सेदारी शुरू हुई। भाऊ साहब घर की महिलाओं को आगे लाने के पक्ष में थे और उनका कहना था कि अगर घर की महिलाएं कंपनी का काम संभालती है इससे कंपनी को और आगे तक ले जाया जा सकता है। महिलाओं पर घर और बच्चों की भी जिम्मेदारी होती है इसलिए भाऊ साहब ने महिलाओं के लिए एक अलग ही नियम बना रखा था कि जिस महिला का बच्चा जितना बड़ा होगा उसे बच्चे की उम्र का आधा समय कंपनी में देना होगा यानी अगर किसी का बच्चा 2 साल का है तो वह महिला 1 घंटे प्रतिदिन कंपनी में काम करेगी और जिसका बच्चा 16 साल का है वह 8 घंटे कंपनी में काम करेगी।

भाऊ साहब की महिलाओं को आगे करने की तरकीब काम आयी और कंपनी ने देखते ही देखते जोर पकड़ लिया। घर और संबंधी महिलाओं ने भी कंपनी को अपनी मेहनत से जल्द ही एक नये मुकाम पर पहुंचा दिया। इस पूरी सफलता का श्रेय भाऊ साहब की पत्नी आशालता कुलकर्णी को भी जाता है क्योंकि उन्होने सभी महिलाओं के साथ में दोस्ती और बराबरी का रिश्ता रखा, कभी भी मालकिन बन कर हक नहीं जताया। कंपनी में महिलाओं को उनकी पढ़ाई के अनुसार काम नहीं दिया गया बल्कि सभी को सब काम सिखाया गया और बाद में सभी हर काम में माहिर हो गये। जिसने कला से स्नातक किया था वह अकाउंट का भी काम देख लेती है और जिसने दूसरी पढ़ाई की थी वह भी वेल्डिंग से लेकर अकाउंट्स तक का काम देख लेती है। कंपनी शुरुआती दिनों में कम बजट पर काम कर रही थी इसलिए सभी को सब कुछ सिखाया गया था जिससे कम लोगों की संख्या में भी कंपनी को आसानी से चलाया जा सके।

भाऊ साहब एक इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियर थे और कंपनी शुरु करने से पहले वह कई नामचीन कंपनियों में काम कर चुके थे जिसका अनुभव उन्हें आशिदा इलेक्ट्रॉनिक को चलाने में काम आया। भाऊ साहब हमेशा से अपना व्यापार शुरु करना चाहते थे जिसके लिए वह हमेशा तत्पर रहते थे और आखिरकार एक सही समय देखकर उन्होंने अपना काम भी शुरु कर दिया। आशिदा इलेक्ट्रॉनिक्स में आशालता कुलकर्णी ने भी अहम भूमिका निभाई और वेल्डिंग से लेकर बिल बनाने तक का काम सीखा। वहीं नाईक साहब की पत्नी वृषाली ने भी इस कंपनी को खड़ा करने में अहम योगदान दिया और आज भी वे नई पीढियों का मार्गदर्शन कर रही हैं। कुलकर्णी परिवार और नाईक परिवार ने शुरुआती दौर में कड़ी मेहनत की और उसका असर यह हुआ कि आज दोनों ही परिवार के बाकी लोग भी इस कंपनी में उतनी ही मेहनत से काम कर रहे हैं।

कोरोना मदद व पूरा वेतन

आशिदा इलेक्ट्रॉनिक्स ने व्यापार के क्षेत्र में जितनी ऊंचाई हासिल की है उतना ही समाज सेवा में भी योगदान दिया है। कंपनी ने कोरोना महामारी के दौरान मदद के लिए अपना हाथ खोल दिया था। पीएम केयर फंड में कंपनी की तरफ से योगदान दिया गया तथा मजदूरों के लिए बिस्किट, पानी और दवा का प्रबंध भी किया गया था। कंपनी ने अपने सीएसआर फंड के अलावा भी लोगों की मदद की और इसमें कंपनी के कर्मचारियों ने भी मदद किया। कंपनी में काम रहे लोगों ने अपना वेतन दान किया जिससे तमाम जरुरमंद लोगों की मदद हो सकी। कंपनी की संस्थापक सदस्यों में से एक श्रीमती आशालता कुलकर्णी ने बताया कि उन्होंने कोरोना काल में मदद के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, जनकल्याण समिति और वनवासी कल्याण आश्रम जैसी संस्थाओं से सहयोग लिया था और उनके माध्यम से ज्यादा लोगों तक मदद पहुंच सकी थी। कंपनी की तरफ से ठाणे के कुछ हास्पिटल में फल और बिस्किट का भी वितरण किया जाता था जिस पर हास्पिटल के अधिकारियों ने सुझाव दिया कि संक्रमण के खतरे को देखते हुए वह खुद कंपनी से फल और बिस्किट इकट्ठा कर लेंगे, किसी को भी हॉस्पिटल आने की जरूरत नहीं पडेगी।

कोरोना काल में बेरोजगारी भी बड़े पैमाने पर देखने को मिली थी क्योंकि लॉकडाउन के बाद कंपनियों ने कर्मचारियों को निकालना शुरु कर दिया था। इसके लिए सरकार को आगे आना पड़ा और सभी से यह निवेदन करना पड़ा कि किसी का भी वेतन बंद ना करें, यह मुश्किल घड़ी है और हम सभी को एक साथ सबको लेकर चलना है। लेकिन प्रधानमंत्री के इस आग्रह के बाद भी बेरोजगारी का सिलसिला लगातार जारी था। इस मुश्किल घड़ी में आशिदा इलेक्ट्रॉनिक्स ने अपने कर्मचारियों का साथ नहीं छोड़ा और करीब दो महीने तक लॉकडाउन में भी कंपनी ने अपने कर्मचारियों को पूरा वेतन दिया।

युवा डायरेक्टर

आशिदा स्मार्ट सॉल्यूशन फॉर पॉवर प्रोटेक्शन एंड कंट्रोल कंपनी बिजली के अलग-अलग उपकरण बनाती है जो वर्तमान में कंपनियों और घरों में इस्तेमाल किये जाते हैं। आशिदा भारत की एकमात्र प्रमुख कंपनी है जिसने स्वदेशी रुप से स्टैटिक और न्यूमेरिकल रीले की एक श्रृंखला विकसित की है और कंपनी लगातार युवा डायरेक्टर सुयश कुलकर्णी और सुजय कुलकर्णी के नेतृत्व में विकसित होती जा रही है। भाऊ साहब के बड़े बेटे सुयश कुलकर्णी हार्डवेयर कम्प्यूटर इंजीनियर हैं उन्होंने आशिदा का रिले डेवलप किया है।

सुजय कुलकर्णी इस समय आशिदा में सबसे कम उम्र के डायरेक्टर हैं, शिक्षा पूरी होने के बाद सुजय कुलकर्णी ने एचसीएल-एचपी में नौकरी शुरु कर दी और खुद को साबित किया। भाऊ साहब हमेशा कहा करते थे, ”बाहर कार्य करते हुए हमें जो मिलता है, वही हमारी वास्तविक कीमत होती है”। कम्प्यूटर उद्योग में राम-लक्ष्मण की जोड़ी की तरह सुयश कुलकर्णी और सुजय कुलकर्णी आशिदा प्रा. लि. के हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर टीम में ख्याति प्राप्त हैं। इनकी मेहनत, योजना और दूरदृष्टि की बदौलत ही आज आशिदा प्रा.लि. अंतरराष्ट्रीय कंपनी के रूप में पहचान पाने की ओर अग्रसर है। एक छोटी सी शुरूआत से इम्पोर्ट सबसिट्यूशन में आशिदा की उड़ान निर्यात में एक ऊंचाई प्राप्त कर रही है।

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