कोरोना वाइरस ने हमे क्या सिखाया

भगवान महावीर के अनुयायी आचार्य महाप्रज्ञजी ने आज से कुछ वर्षो पहले हि यह भविष्यवाणी की थी कि आनेवाले समय में तीसरा महायुध्द शस्त्रो से नही बाल्कि जीवानुओं से खेला जायेगा। सचमुच विश्व की आज की परिस्थिती देखते हुए इस महामारी को तीसरा विश्वयुद्ध कहना अतिशयोक्ती नहीं है।

21वी सदी,जहां विश्व आधुनिकता के आसमान के नीचे प्रगती की ओर बढ रहा था, वहां कोरोना फे आंधी और तूफान में दुखो के बादल विश्व पर मंडराने लगे। इस एक वायरस ने सारी दुनिया में कोहराम मचा दिया। जो बाते ना कभी सुनी, ना कभी देखी वो सब 2020 में हमें कोरोना ने दिखाई भी और सिखाई भी…….।

“कभी हसाया, कभी रूलाया, 2020 तुने क्या क्या सिखाया” हर बार नए वर्ष की शुरुवात कुछ वादों के साथ, जो हम खुद से करते है। वादा ऐसा की बुरी आदत छोडेंगे अच्छी आदत अपनाएंगे,वादा ऐसा कि अपनो के साथ रहेंगे,सपनो को सच करेंगे। लेकीन क्या 2020 मे ऐसा हो पाया……….।

कोरोना ने हमे सहनशीलता, संयम, प्रेम, त्याग सिखाया। आज, भौतिकता की ओर बढ़ते हुए हमारे कपम कहि न कही हमारी आनेवाली पिढ़ी के लिए घातक होते जा रहे थे, अपराध भी बहुत बढ रहे थे, सभी में आगे बढ़ने की स्पर्धा लगी थी। इसमें सभी एक दुसरे को पीछे खींच रहे थे। हवा,पानी प्रदूषित हो रहा था। पानी समस्या तो शायद भविष्य मे हमें प्यासा हि रख देती। पेड़,पौधे पक्षी सभी हमसे मानो बहूत शिकायत लिए हुए थे, क्योकी हमारी आधुनिकता कही न कही इन सभी चीजों पर असर कर रही थी।

घर के लोगों के साथ समय बिताना आजकल बहुत कठीण हो गया था। इतनी बीझी लाईफ कि किसिके पास किसिके लिए समय नहीं। यही बात यदी आज से 50-60 साल पहले की अगर कि जाए तो बिलकुल विपरित। मोबाईल नहीं, परिवार बडे, एकसाथ रहना,एकदुसरे के सुख-दुख में शामिल होना, यह सब आज सिर्फ कहानियों में रह गया था लेकीन शुक्रगुजार है हम कोरोना के जिसने हमें 1970-1980 का जीवन जीना सिखाया। “किसीने ठिक हि कहां है, जो होता है वो अच्छे के लिए होता है,” यह तो हुई प्रेम की बात।

कोरोना के समय में व्यर्थ ईधर- उधर आना जाना बंद था। जो कुछ मिला उसी में संतुष्ट रहना पड़ रहा था। इसी कारण प्रदुषण कम हुआ जिससे हमारे व्दारा पर्यावरण को दूषित होने से बहुत राहत मिली, इसी का नतीजा हम शुध्द वातावरण में सांस ले सके हमारे घर परिवार को हमारा अमुल्य समय दे सके, शुध्द वातावरण दे सके यह सब संभव हुआ सिर्फ कोरोना के कारण।

संक्षिप्त में इतना भी कहा जा सकता है की कोरोना ने हमें जीना सिखाया, रिश्तो की एहमीयत,समय की किमत, भविष्य की चिंता ना कर वर्तमान में जीना सिखाया। यह जीवन अनमोल है शायद फिर मिले या ना मिले।

आज की शिक्षा प्रणाली बच्चों का बचपन छीन रही थी। बच्चे इतने बीझी की उनका खेलना तो दूर माँ-बाप से दिनदिन भर मिलना दुर्लभ हो गया था। कोरोना ने बच्चों का बचपन लौटाया यह कहना अतिशयोक्ती नही होगी। हमने हमारा बचपन जिस तरह से जीया आज कोरोना के कारण हमारे बच्चे जी रहे है, घर-परिवार के साथ, खेल – कुद पढ़ाई के साथ।

आज की आधुनिकता का भलेही हम दूरउपयोग कर रहे थे, लेकीन कोरोना के समय में इसी आधुनिकता ने हमें एक दुसरे से जोड़े रखा। कोरीना ने हमारी आधुनिकता की सही उपयोगीता हमें समझाई, बहुत से काम घर बैठे भी होने लगे जिससे यह भौतिकता हमारे देश की प्रगति में सहायक हुई।

कोरोना ने हमें संयम मर्यादा में रहना सिखाया,जो मिला उसी में संतुष्ट रहना सिखाया। इसके लिए ना कोई गारिब ना कोई अमीर सभी के लिए माफ समान।

कोरोना ने भगवान महावीर के सिध्दात को साबीत कर दिया,  दल बल देवी देवता, माता-पिता परिवार,

मरती बिरियाँ जीव को, कोई न राखणहार।”

ऐसा महारोग जिस समय अपना सगा भी अपने व्यक्ती को देख नही सके, सेवा न कर सके, भगवान ने सच हि कहा है –

आप अकेला अवतरे, मरे अकेला हाय,

यो कबहूं या जीव को, साथी सगो न कोया।“

एक एक बात भगवान ने अपने ज्ञान में पहले हि देखली।

भगवान ने हमें प्रमाद से दूर रहने के लिए कहां,धर्म करें, धर्म करने की कोई उम्र नही, जब जागे तब सवेरा। कोरोना ने हमें सिखाया समय रहते समय फा सदुपयोग करले मौत की कोई उम्र नहीं। सोचा जाए तो बिना कोरोना के भी यह बात हम पर लागू होती है। लेकीन हम इस भ्रम में जी रहे थे की,यह भी कोई मृत्यू का समय हैं।

हमारी भारत भूमि संतो की भूमि है, अगर किसीने इस कोरोना काल में अपने जीवन को सार्थक किया होगा वह है हमारे साधू-संत, जो सदैव नियम मर्यादा में अपना जीवन व्यतीत करते है। उन्हें क्या फरक पडे हे कोरोना है या नही ,यही संयम हमें जीवन में लाना होगा।

कोरोना ने हमे इन्सानीयत का पाठ भी सिखाया ध्यान धर्म -कर किसीके काम आना सिखाया, सच में हर कठीण परिस्थती

हमारी परिक्षा लेने आती है, कोरोना के समय हम सब घर बैठे सारे विश्व कि स्वस्थता के लिए प्रार्थना कर रहे थे कि सारा विश्व इस महामारी से मुफ्त हो जांए। सारे विश्व से मैत्री भाव इसी कोरोना के कारण हुआ। इसीलिए कहते है हर अंधेरा प्रकाश लेकर आता है।

जैसे एक सिक्के के दो पहलू होते है वैसे हि कोरोना ने कुछ अच्छा सिखाया तो कुछ बुरा भी बहत दिखाया। कोराना ने हर पारिवार में मौत कि कहानी लिख दाली कितने ही लोगों को बेघर कर दिया, अनाथ कर दिया बहुत से लोगो के सहारे छिन लिए आजीविका चलाने के लिए गुन्हा के रास्तों पर चलना सिखा दिया।

जहां अपना कहने वाला व्यक्ति अपनो को हि देखने लिए तैयार नहीं, छोड दिया अनजान के भरोसे, किसपर विश्वास रखे। दवा, इंजेक्शन की काला बजारी, कर्मों की कोई चिंता नही सब जुटे थे मौके का फायदा उठाने।

कोरोना तो हमें कर्मों का हिसाब बताने आया था लेकीन हमने तो राजकारण करके इन्सान के जीवन की किमत लगा दी। सच में घोर कालयुग! कहां तो वह समय (सतयुग) जब एक राजा प्रजा को अपनी संतान मानकर अपना सर्वस्व न्योछावर कर देता था, कहा तो यह समय (कलयुग) जहां इन्सान-इन्सान का नही पैसो का पुजारी बन बैठा। “आतिथि देवो भव“ वाली हमारी संस्कृती इस करोनाने ग्रंथो में रख ली।

किसी भी कठीण परिस्थती को सकारत्मकता की दृष्टी से देखा जाए तो वह हमारा वर्तमान और भाविष्य पोनो हि उज्वल करेगी। ऐसा ही विचार कोराना के लिए हमें करना है।

कोरोना भी आज है,कल नही रहेगा लेकीन हमने जो भी उससे अच्छा सिखा वही हमें हमेशा हमारे जीवन को उन्नत, प्रगत खुशहाल, सुखी बनाने में मदत करेगा।

 

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