कोरोना की तीसरी लहर से पाई जा सकती है निजात

अस्पतालों में चिकित्सक और स्वास्थ्य कर्मियों की कमी साफ देखी जा रही थी फिर भी प्रशासन इससे सबक लेने को तैयार नहीं है। तीसरी लहर के आने की संभावना जताई जा रही है मगर इसके बावजूद डीएम के आदेशों की अवहेलना की जा रही है। बार-बार आदेश देने के बावजूद ऑक्सीजन प्लांट नहीं बैठाया जा रहा है। इसपर पहल करते हुए समय से पहले ही व्यवस्था करने की जरूरत है, तभी कोरोना महामारी की तीसरी लहर से निजात पाई जा सकती है।

वर्ष 2020 के मार्च में जब देश में कोविड संक्रमण की शुरुआत हुई थी, तब बिहार में बहुत कम मामले सामने आए थे लेकिन देखते ही देखते राज्य में संक्रमण के बढ़ते मामलों के मद्देनज़र राज्य में कई बार लॉकडाउन लगाना पड़ा। मुख्यमंत्री के परिजनों से लेकर कई ज़िलों के प्रशासनिक अधिकारी तक कोरोना की चपेट में आ चुके थे। 22 मार्च को बिहार में जब कोविड-19 का पहला मामला सामने आया था, तब तक देश के 19 राज्यों में कोरोना वायरस फैला हुआ था। ये सभी राज्य कोरोना वायरस से संक्रमण के मामले में बिहार से आगे थे।

अब लगभग दो वर्ष बाद भी कोविड-19 से संक्रमण के मामले में बिहार देश में काफी आगे आ चुका था और उन गिने-चुने राज्यों में शामिल था, जहां संक्रमण तेज़ी से फैल रहा था। दो वर्षों में भले सरकारी आंकड़े कुछ भी हो, लेकिन ये सच है कि लाखों लोग कोरोना से संक्रमित हुए और हजारों लोगों ने कोरोना से अपनी जान गंवाई है। कोविड-19 का संक्रमण यहां इस कदर फैल चुका था कि सीएम नीतीश कुमार के परिजन, प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष संजय जायसवाल, बिहार सरकार में मंत्री, विधायक, गृह विभाग के अपर सचिव, कई डीएम, एडीएम और एसपी तक इसकी चपेट में आ चुके थे। एक हजार से ज्यादा चिकित्सक और मेडिकल स्टाफ भी संक्रमित हो चुके थे। कोविड-19 के बढ़ते संक्रमण के चलते सूबे में कई बार लॉकडाउन लगा दिया गया।

बिहार में हाथ से निकले हालात

कोविड-19 के बढ़ते मामले और बार-बार लॉकडाउन लगने से पता चलता है कि बिहार में कोरोना महामारी बेकाबू हो रही थी, लेकिन सवाल ये है कि कई बार लॉकडाउन लगाने के बावजूद बिहार में हालात हाथ से कैसे निकल गए? जानकार इसकी कई वजह मानते हैं। कई आदेशों के बावजूद कम टेस्टिंग होना। आंकड़ों के अनुसार बिहार में प्रति 10 लाख लोगों में से जो लोगों की जांच हो रही थी। वह दिल्ली, तमिलनाडु, असम, राजस्थान, पंजाब व अन्य राज्यों के मुकाबले काफी कम था। इस अवधि में संक्रमित मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा था, लेकिन टेस्टिंग कम होती थी।

डॉ. राजीव रंजन ने आगे कहा कि पूर्व में इस महामारी पर काबू करने के लिए जिन उपायों पर ज्यादा जोर दिया गया था, उनमें टेस्टिंग सबसे प्रमुख था। हम पिछले आंकड़ों से समझ पा रहे हैं कि अगर शुरुआत से ही टेस्ट बढ़ाए जाते, तो बिहार में काफी हद तक नियंत्रित हो सकता था। उस वक्त कुछ जनप्रतिनिधियों ने आशंका जताई थी कि इससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ सकता है। ये आशंका इसलिए व्यक्ति की गई थी क्योंकि उस वक्त प्रवासियों में कोरोना संक्रमण के सबसे ज्यादा मामले सामने आ रहे थे।

लोग नहीं हो रहे जागरूक

संक्रमण फैलने में तमाम वजहों के साथ-साथ लचर चिकित्सा व्यवस्था की भी इसमें बड़ी भूमिका थी। पिछले कुछ माह में ऐसी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हुए, जो बताते हैं कि सरकार की तैयारी कितनी खराब है? बिहार में कथित तौर पर ऑक्सीजन सिलेंडर न होने से कई कोरोना संक्रमित मरीजों की मौत हो गई थी। बिहार में ही कुछ लोगों को बिना सैंपल लिए ही बता दिया गया कि उनका रिजल्ट नेगेटिव आया है। कई अध्ययनों से पता चला है कि प्रदूषण से कोविड-19 से होने वाली मौतों और संक्रमण की दर बढ़ जाती है। देश में लोगों को इस तरह की बड़ी भीड़ दिखाई देगी तो उन्हें लग सकता है कि वायरस अब नहीं फैल रहा है। ये अपने आप में काफी खतरनाक साबित हो सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कोरोना के तीसरे लहर की आशंका व्यक्त किया है लेकिन लॉकडाउन खत्म होते ही लोगों की लापरवाही सामने आ रही है। लोग बिना मास्क के बाजारों में बेखौफ घूम रहे हैं। दुकानों में भीड़भाड़ देखकर समाजसेवियों और बुद्धिजीवियों के मन में भय है कि कहीं फिर कोरोना दस्तक न दे दे। दो लहरों के बावजूद सरकारी व्यवस्था संतोषजनक नजर नहीं आ रही है। अस्पतालों में ऑक्सीजन की कोई खास व्यवस्था नहीं है। एक से एक महत्वपूर्ण लोगों ने कोरोना से संक्रमित होकर अपनी जान पिछले दिनों गंवा बैठे फिर भी लोग न तो मास्क और न ही शारीरिक दूरी का ख्याल रख रहे हैं।

हो रही आदेश की अवहेलना

दुनिया भर में तीसरी लहर ने दस्तक दे दी है लेकिन, बिहार में कोरोना महामारी से निपटने के लिए सरकार ठोस कदम नहीं उठा रही है। अगर सरकार पहल कर भी रही है, तो सिस्टम सही से कम नहीं कर रहा है। तीसरी लहर से बचने के लिए सरकार ने बिहार के ज्यादातर जिलों में ऑक्सीजन प्लांट लगाने की घोषणा की है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की लापरवाही के कारण अब तक ज्यादातर जिलों में ऑक्सीजन प्लांट नहीं लगा पाया है। साथ ही स्वास्थ्य विभाग में चिकित्सक, नर्स और स्वास्थ्य कर्मियों की बहाली भी नहीं कर पाई है। कोरोना के दूसरे लहर में भी ऑक्सीजन के अभाव में कई लोगों की जान चली गई थी। अस्पतालों में चिकित्सक और स्वास्थ्य कर्मियों की कमी साफ देखी जा रही थी फिर भी प्रशासन इससे सबक लेने को तैयार नहीं है। तीसरी लहर के आने की संभावना जताई जा रही है मगर इसके बावजूद डीएम के आदेशों की अवहेलना की जा रही है। बार-बार आदेश देने के बावजूद ऑक्सीजन प्लांट नहीं बैठाया जा रहा है। इसपर पहल करते हुए समय से पहले ही व्यवस्था करने की जरूरत है, तभी कोरोना महामारी की तीसरी लहर से निजात पाई जा सकती है।

 

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