तीसरी लहर से रहें सावधान

कोविड से जुड़े आंकड़ों के विश्लेषण और वैज्ञानिक सर्वेक्षण के मुताबिक कोरोना वायरस की तीसरी लहर का प्रकोप अक्टूबर-नवंबर के दौरान तेजी पकड़ सकता है लेकिन दूसरी तरफ गणितीय अनुमान एवं वैज्ञानिक मॉडलिंग के निष्कर्षों का यह अनुमान भी दिया जा रहा है कि अगर लोग कोरोना गाइडलाइंस का गंभीरता के साथ और सही तरीके से पालन करेंगे तो तीसरी लहर से ज्यादा नुकसान नहीं होगा।

पूरी दुनिया के लोगों ने सार्स-कोव-2 वायरस से होने वाली कोविड-19 महामारी के दुष्प्रभाव को महसूस किया है। कोरोना वायरस के संक्रमण की पहली लहर से ज्यादा दूसरी लहर जानलेवा साबित हुई है। पहली लहर के समय होम आइसोलेशन में बुखार, जुखाम और खांसी की समस्या आमतौर पर ठीक हो जाती थी। हालांकि इसमें वृद्धजनों के जीवन को ज्यादा खतरा हुआ है मगर दूसरी लहर ने पहली लहर के दौरान वायरस संक्रमण से अलग लक्षण प्रकट किए। इसके नतीजे के रूप में सांस की समस्या, फेफड़ों में संक्रमण, तेज बुखार और ब्लैक फंगस जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का लोगों ने सामना किया। ऑक्सीजन सिलिंडर की कमी और अस्पतालों में बेड न मिलने की वजह से न जाने कितने ऐसे मरीजों की मौत हुई, जिनके जीवन को बचाया जा सकता था।

यही मुख्य वजह है कि देश-दुनिया के सभी आधिकारिक स्वास्थ्य विज्ञान व अनुसंधान संगठन और वैज्ञानिक समुदाय लगातार लोगों से यही अपील कर रहे हैं कि सभी लोग कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते रहे। इसमें किसी प्रकार की लापरवाही ना करें। सभी लोगों में वे लोग भी आते हैं, जिन्हें कोविड हुआ है और वे लोग भी जिन्होंने कोविड का टीका लगवा लिया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि कोरोना वायरस अपने रूप बदल रहा है और म्यूटेशन के बाद इसके नए स्ट्रेन का खतरा लगातार बना हुआ है। इसके अलावा हम सभी इस तथ्य से परिचित हैं कि नए स्ट्रेन की प्रसार दर अपेक्षाकृत अधिक होती है और वायरस भी अपने अस्तित्व को कायम रखने के लिए आवश्यक प्राकृतिक युक्ति का उपयोग करते हैं। इस बात को आप इस तरह समझें कि हम मनुष्य प्रयोगशालाओं में अनुसंधान और प्रयोग के बाद दवाओं और टीके का विकास करते हैं। अब आप सोचिए, हो सकता है कि वायरस की भी कोई प्रयोगशाला या उसके जैसी कोई विधि होगी जिसके द्वारा वे अपने स्वरूप में बदलाव लाते हैं। वायरसों में म्यूटेशन और नए स्ट्रेन का विकास इसी प्रकार की युक्तियां हैं।

तीसरी लहर का खतरा

दिल्ली, मुम्बई, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे भारतीय राज्य जब दूसरी लहर के प्रकोप से जूझ रहे थे, तब उस समय दक्षिण भारत के राज्य कोविड-19 महामारी की समस्या से लगभग मुक्त थे लेकिन थोड़े समय के बाद केरल, हैदराबाद आदि जैसे दक्षिण भारतीय शहरों में कोविड महामारी की दूसरी लहर का प्रकोप शुरू हुआ लेकिन वो लहर अभी तक खत्म नहीं हुई है। केवल दैनिक कोविड संक्रमण के मामले कुछ कम हो रहे हैं। एम्स नई दिल्ली के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने भी देशवासियों को सजग किया है कि कोविड की तीसरी लहर लोगों के व्यवहार पर निर्भर करेगा।

अगर अधिकांश आबादी द्वारा कोविड प्रोटोकॉल के तीन आसान उपायों (मुंह और नाक को ढंकने वाला मास्क पहनना, घर से बाहर निकलने पर दो गज की भौतिक दूरी बनाए रखना और हाथों को साबुन से धोते रहना) का पालन किया जाता रहे, तो तीसरी लहर को आने से रोका जा सकता है। यह बात तर्कसंगत भी है। कोविड से जुड़े आंकड़ों के विश्लेषण और वैज्ञानिक सर्वेक्षण के मुताबिक कोरोना वायरस की तीसरी लहर का प्रकोप अक्टूबर-नवंबर के दौरान तेजी पकड़ सकता है लेकिन दूसरी तरफ गणितीय अनुमान एवं वैज्ञानिक मॉडलिंग के निष्कर्षों का यह अनुमान भी दिया जा रहा है कि अगर लोग कोरोना गाइडलाइंस का गंभीरता के साथ और सही तरीके से पालन करेंगे तो तीसरी लहर से ज्यादा नुकसान नहीं होगा। मुम्बई ने तीसरे लहर की संभावना से सतर्क होकर राज्य में अपेक्षित एहतियात के नियमों को लागू करने का उचित फैसला किया है। देश के बाकी हिस्सों में इस तरह के कदम कोविड को मात देने में कारगर हथियार साबित होंगे।

टीकाकरण में तेजी जरुरी

देश के अनेक राज्यों (पंजाब, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, आंध्रप्रदेश आदि) ने बड़ी उम्र के बच्चों के लिए स्कूल के दरवाजे खोलने का निर्णय लिया है। कोविड मामलों में गिरावट और व्यापक टीकाकरण को ध्यान में रखते हुए स्कूल प्रशासन ने ये फैसला लिया है लेकिन चिंता का विषय ये है कि बच्चों को टीके नहीं लगे हैं और कोविड की तीसरी लहर में बच्चे सर्वाधिक सुभेद्य बताए जा रहे हैं। हालांकि ऑफलाइन उपस्थिति को वैकल्पिक व्यवस्था के अंतर्गत स्कूल ने लागू किया है और आनलाइन क्लासेज पहले के समान जारी रहेंगे। डब्ल्यूएचओ ने इस संबंध में अपना सुझाव दिया है कि स्कूल प्रशासन को विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों के स्वास्थ्य को पहली प्राथमिकता पर रखते हुए कोविड व्यवहारों का कड़ाई से पालन कराना सुनिश्चित करना होगा।

भारत में टीकाकरण के व्यापक को दृष्टिगत रखते हुए एक संभावना यह जताई जा रही है कि देश की एक बड़ी आबादी हार्ड इम्यूनिटी के चरण में लगभग पहुंच गई है। आईसीएमआर, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के आंकड़े के अनुसार 15 सितम्बर 2021 तक 75 करोड़ 89 लाख लोगों को कोविड का टीका लगाया जा चुका है। दी लांसेट में 13 सितम्बर 2021 को एक आलेख के अनुसार तेज गति से टीकाकरण को अंजाम देने के साथ-साथ अधिकांश आबादी को टीके के दोनों डोज लगाया जाना आवश्यक है। इस रणनीति द्वारा देश की समूची आबादी को सुरक्षित किया जा सकता है।

 

आपकी प्रतिक्रिया...