स्वावलंबन से होगा आत्मनिर्भर उत्तराखंड – पुष्कर सिंह धामी (मुख्यमंत्री)

उत्तराखंड के युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी राज्य की समस्या, चुनौती और अवसर से भालिभांति परिचित हैं। वे उत्तराखंड को देश की सांस्कृतिक व आध्यात्मिक राजधानी बनाना चाहते हैं। इसके साथ ही उन्होंने विकास के मामले में राज्य को भारत का प्रथम क्रमांक का राज्य बनाने का भी संकल्प लिया हैं। इन विषयों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने अपने साक्षात्कार में पलायन, रोजगार, स्वरोजगार, उद्योग-व्यवसाय, पर्यटन, धर्म संस्कृति, पर्यावरण, महिला सशक्तिकरण, ग्राम, कृषि, किसान, युवा, सरकारी योजनाओं सहित राज्य के विकास कार्यों पर अपने विचार प्रकट किये हैं। प्रस्तुत हैं साक्षात्कार का सम्पादित अंश-

देवभूमि के नाम से उत्तराखंड सुविख्यात हैं। उत्तराखंड राज्य के संबंध में आपकी क्या मनोभावना हैं?

हमारा उत्तराखंड राज्य अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों वाला प्रदेश हैं। यह हमारा राज्य देवभूमि इसलिए भी कहलाता हैं क्योंकि यहीं पर चारों धाम हैं। इसे देवताओं की भूमि कहा जाता हैं। यहां नदियां हैं, पहाड़ हैं, ऋषिकेश जैसी संतों-महात्माओं की नगरी है। निश्चित रूप से यहां पर अध्यात्म एवं संस्कृति का संगम है, मिलन है। हमारा प्रयास है कि आनेवाले समय में उत्तराखंड राज्य विश्व की आध्यात्मिक राजधानी बनें। इसके लिए संत, समाज और सरकार के बीच समन्वय स्थापित कर आर्थिक विकास के साथ-साथ देवभूमि की पवित्रता को बरक़रार रखते हुए इसे विकसित करना आवश्यक है।

जब आप मुख्यमंत्री बने, उस समय आपके सामने कौन सी प्रमुख चुनौतियां थीं?

हमारे प्रदेश में रोजगार और पलायन प्रमुख समस्या है। भौगोलिक परिस्थियों के चलते अलग-अलग जिलों की भी अपनी-अपनी समस्याएं हैं। पहाड़ी और मैदानी क्षेत्र की अपनी समस्याएं और जरूरतें हैं। पलायन की समस्या को ख़त्म करने के लिए हम युवाओं को बड़ी संख्या में रोजगार प्रदान कर रहे हैं। उत्तराखंड राज्य के विकास और उसे आगे बढ़ाने में मातृशक्ति का बहुत बड़ा योगदान है। उन सभी को स्वरोजगार की जो योजनाएं चल रही हैं, उन योजनाओं को आगे बढ़ाना हैं। मुख्य सेवक के रूप में जब हमने अपनी पहली केबिनेट बैठक की थी, 4 जुलाई 2021 को तब मैंने मुख्य मंत्री के तौर पर काम करना शुरू किया। उसी दिन हमने संकल्प लिया कि हमारे प्रदेश में जितनी भी सरकारी नौकरियों में पद रिक्त हैं, उन सभी पर पदोन्नति की जाएगी और उसकी प्रक्रिया 15 अगस्त से ही हमने शुरू कर दी है। इस संदर्भ में हम विज्ञापन भी दे रहे हैं। इसके साथ-साथ स्वरोजगार से युवाओं को जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना चलाई जा रही है। रोजगार के लिए मेले लगाये जा रहे हैं। स्वयं का व्यवसाय उद्योग स्थापित करने के लिए लोन की सुविधा प्रदान की जा रही है। लोन लेने के लिए लोगों को भटकना न पड़े इसलिए राज्य सरकार प्रयासरत है। राज्य सरकार द्वारा शिविर लगाकर आसानी से लोन दिया जा रहा है। उद्योग-व्यवसाय के अनुकूल माहौल बनाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।

पलायन यहां की मुख्य समस्या है, इसके लिए क्या उपाय योजना अपनाई जा रही हैं ?

यह सच है कि पलायान यहां की मुख्य समस्या है और पलायन को रोकना समय की मांग है। पलायन तभी होता है जब उसे स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध नहीं होता इसलिए अन्य जगहों पर उन्हें पलायन करने के लिए मजबूर होना पड़ता हैं। इससे निपटने के लिए रोजगार के साथ ही हम स्वरोजगार पर भी अधिक बल दे रहे हैं। हमारी जो भी सरकारी नीति बने या विकास कार्य आगे बढें, तो उसमें स्थानीय लोगों को रोजगार की दृष्टि से जोड़ने पर भी हम काम कर रहे हैं। उद्योग धंधे से जुड़े जो विवाद न्यायलय में विचाराधीन हैं, उस संदर्भ में भी हमने यह तैयारी कि है कि अगले तीन माह में उन विवादों का समाधान निकाल कर मामलों का निराकरण किया जाएगा। एक कमिटी के माध्यम से इस मामले की सुनवाई होगी और मामले को सुलझाया जायेगा। इससे हमारे लोगों को बड़ी संख्या में रोजगार मिलेगा।

आपकी सरकार द्वारा महिला सशक्तिकरण की दिशा में उठाए गए कदमों का क्या प्रभाव दिखाई दे रहा है?

राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत लाखों की संख्या में माहिलाओं को रोजगार प्रदान किया गया है, क्योंकि हमारा मानना है कि आर्थिक सशक्तिकरण के आधार पर ही महिला सशक्तिकरण और स्वावलंबन की परिकल्पना को साकार किया जा सकता है। ग्राम संगठन, संघ छाता समूह और क्लस्टर के माध्यम से उनकी एक अपनी रचना है। सिलाई, बुनाई, बकरी पालन, भेड़ एवं अन्य पशु पालन, प्रसाद, अचार एवं अनेक प्रकार के खाद्य उत्पाद बनाने के कार्य से महिलाओं को जोड़ा गया है। अपने साथ ही अन्य लाखों लोगों को वह रोजगार भी देती हैं। हालांकि कोरोना काल में उन सभी को काफी कठिनाइयों का सामना कारण पड़ा। उन्हें विपरीत हालात से गुजरना पडा। सामान की विक्री नहीं हो पाई और कुछ उत्पाद बाजार तक नहीं पहुंच पाए। कच्चा माल खराब हो गया। ऐसे लोगों को राहत प्रदान करने के लिए हमने उन्हें कुल 120 करोड़ रूपये का एक पैकेज दिया है। उन संगठनों और समूहों को बिना ब्याज के 5 लाख रूपये तक का कर्ज उपलब्ध कराया गया है। आगामी 6 माह के लिए उनका ऋण माफ कर दिया गया है। इसका बहुत सकारात्मक असर हुआ। सरकार ने हमारी माताओं-बहनों को फिर से अपने पैरों पर खड़ा होने का अवसर दिया है।

कोरोना से निपटने के लिए उत्तराखंड सरकार ने कौन से उल्लेखनीय कार्य किये?

कोरोना की पहली और दूसरी लहर के दौरान सरकार ने स्वास्थ्य से जुड़ी प्राथमिक जरूरतों के अनुरूप अत्यावश्यक सेवाएं प्रदान की हैं। सीएसई, पीएसई के माध्यम से स्वास्थ्य सुविधाएं दूर-दराज के क्षेत्रों में भी हमने तत्काल उपलब्ध कराईं। ऑक्सीजन, वेंटिलेटर, अन्य मेडिकल उपकरण, सहित बच्चों, महिलाओं से लेकर बुजुर्गों के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए हमने व्यवस्था की है। राज्य में लगभग 96 प्रतिशत वैक्शिनेशन पूर्ण हो गया है और बहुत जल्द ही 100 प्रतिशत वैक्सीनेशन का लक्ष्य हम प्राप्त कर लेंगे। मैं प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद देता हूं और उनका आभारी हूं क्योंकि उन्होंने हमारी मांग के अनुसार प्रचुर मात्रा में वैक्सीन उपलब्ध करवाई।

पर्यावरण और विकास में संतुलन बनाये रखने के लिए सरकार द्वारा कौन से प्रयास किये जा रहे हैं?

पर्यावरण पर हमारा विशेष ध्यान है क्योंकि हम प्रकृति की गोद में रहने वाले लोग हैं और यह हमारी मूल संपदा है। हमारे प्रधान मंत्री का भी पर्यावरण को लेकर विशेष आग्रह है कि पर्यावरण के साथ सामंजस्य बिठाकर विकास को गति दी जानी चाहिए। स्वछता के साथ ही नदी, नाले, तालाब, झरनों को संरक्षित करने के लिए हम हरेला पर्व भी मनाते हैं। यह हमारी परम्परा का हिस्सा है। हरेला पर्व के दौरान पूरे प्रदेश में करोड़ों की संख्या में हम वृक्षारोपण करते हैं ताकि पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन होता रहे। हिमालय प्रकृति का मूल केंद्र है। इसलिए हम पर्यावरण को लेकर बहुत ही संवेदनशील हैं। पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना विकास कार्यों को नई बुलंदियों पर पहुंचाने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं।

जनता को भ्रमित करने के लिए किसान आन्दोलन का सहारा लिया जा रहा है, आपके राज्य में किसानों की स्थिति कैसी है?

हमारे राज्य में किसानों की स्थिति बहुत अच्छी हैं। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का भी संकल्प है कि किसानों की आय दोगुनी होनी चाहिए। अभी हाल ही में हमने कृषि महोत्सव भी किया था। जिसमें बहुत ही अच्छे किस्म के विविध उत्पादों का प्रदर्शन किसानों ने किया था। किसान सम्मान योजना का लाभ भी प्रदेश के सारे किसानों को मिल रहा है। कृषि क्षेत्र में सुधार एवं विकास के लिए अनवरत अनुसंधान पन्त नगर विश्वविद्यालय सहित अन्य विश्वविद्यालयों में चल रहा हैं। मुझे लगता है कि जितना किसानों की भावनाओं को प्रधान मंत्री मोदी समझ सकते हैं, उतना उनकी भावनाओं को कोई और नहीं समझता। ये जो लोग किसान आन्दोलन के नाम पर उपद्रव मचा रहे हैं, वे असली किसान नहीं हो सकते।

उत्तराखंड में हो रहे विकास कार्य से आप कितने संतुष्ट हैं?

अलग राज्य बनने के बाद उसका चहुंमुखी एवं सर्वांगीण विकास करना इतना आसान नहीं होता उसके लिए समय लगता है। बावजूद इसके विभिन्न प्रकार की चुनौतियों से लड़ते हुए उत्तराखंड ने केवल राज्य के विकास ही नहीं अपितु देश के विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया हैं। नए-नए विकास कार्य हुए हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन, पर्यावरण, धर्म, संस्कृति, अध्यात्म, उद्योग-व्यवसाय, ग्रामीण विकास, कृषि, आयुर्वेद, खेल आदि अनेक क्षेत्रों में उत्तराखंड अग्रणी भूमिका निभा रहा है। पहले उत्तर प्रदेश बहुत बड़ा राज्य था, प्रशासनिक दृष्टि से विकास कार्य करना काफी चुनौतीपूर्ण था। लेकिन अलग राज्य बनने के बाद उत्तराखंड में बदलाव की बयार बह रही है और अब उत्तराखंड आत्मनिर्भर राज्य बनने की दिशा में मार्गक्रमण कर रहा है। शासन-प्रशासन की सुविधाएं आम लोगों को सुलभ हुई है। जन सुनवाई में तेजी आई है, अब कोई भी व्यक्ति सरकार के पास अपनी आवाज पहुंचा सकता है। जनता और सरकार के बीच की दूरियां घटी हैं और नजदीकियां बढ़ी हैं। विकास कार्य तो अनवरत रूप से चलने वाली प्रक्रिया हैं। जितना किया जाए उतना कम हैं। उसमें संतुष्ट होने वाली कोई बात नहीं हैं। लेकिन इतना तो कह सकते हैं कि पहले की तुलना में अभी बहुत तेजी से विकास हुआ है।

शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर सरकार कितना ध्यान केंद्रित कर रही हैं?

हमारी सरकार इन तीनों ही विषयों पर लगातार काम कर रही हैं। इसके अलावा जितने भी हमारे विभाग हैं उनके कार्यों की समीक्षा भी की जा रही है ताकि विकास कार्यों को तेज गति दी जा सके। हम चाहते हैं कि हमारे सारे विभाग अच्छे से अच्छा काम करें, जिससे राज्य की प्रगति और विकास में सहायता मिले। त्वरित रूप से निर्णय हो और साथ ही जो पुरानी योजनाएं सुचारू रूप से चल रही हैं, उसे गति देने और उसमें कुछ कमियां हैं तो उसे सुधार कर आगे बढ़ने पर हमारा जोर रहेगा, उस दिशा में हम काम कर रहे हैं।

उत्तराखंड सीमावर्ती राज्य हैं और सुरक्षा की दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण है। सीमा की रक्षा में उत्तराखंड के हजारों सैनिकों ने अपना बलिदान दिया है। सैनिकों के कल्याण के लिए आपने क्या प्रयास किये हैं?

सीमावर्ती राज्य होने के कारण हमारा प्रदेश सैनिक बाहुल्य हैं। देवभूमि के साथ ही यह वीरों की भूमि भी है। बड़ी संख्या में यहां के सैनिक भारतीय सेना, अर्द्धसैनिक बल सहित सेना के अलग-अलग विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी का मैं आभार मानता हूं क्योंकि उन्होंने उत्तराखंड को सैन्य धाम कह कर प्रदेश का गौरवगान किया था। पहले सेवानिवृत्त सैनिकों को 4 हजार रुपए पेंशन मिलती थी, हमारी सरकार ने उसे बढ़ाकर 8 हजार कर दिया था। अभी हमने निर्णय लिया हैं कि उसे 10 हजार कर दिया जाए। प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘वन रेंक वन पेंशन’ योजना को लागू करके सैनिकों की अरसे से लंबित मांग को पूर्ण किया हैं। देश की सीमा पर शहीद होने वाले सैनिकों के प्रत्येक परिवार को 15 लाख रूपये की धनराशि और रोजगार देने का हमने निर्णय लिया है। साथ ही एनडीए और सीडीएस की परीक्षा को जो छात्र पास कर लेंगे, उनको आगे की तैयारी के लिए 50 हजार रूपये की धनराशि देने का भी हमने प्रावधान किया है। सैनिक कल्याण की दिशा में उत्तराखंड सरकार बेहतर कार्य कर रही है। सैनिक छात्रावास बनाने के साथ ही उसमें निशुल्क पढाई की सुविधा प्रदान करेंगे। सेना में अधिक से अधिक लोग हमारे राज्य से जाएं इसलिए प्रत्येक ग्राम पंचायत में ‘ओपन जिम’ शुरू करेंगे। जिनसे युवाओं को प्रोत्साहान मिले, वह प्रशिक्षण लेकर आगे बढें। मैं स्वयं एक सैनिक का पुत्र हूं इसलिए इस विषय को मैं भलीभांति जानता हूं। एक सैनिक के परिवार की क्या परिस्थिति होती है और उसकी जरूरतें क्या होती हैं इनसे मैं परिचित हूं।

उत्तराखंड के युवा साहसी व प्रतिभा सम्पन्न हैं उनकी योग्यता का लाभ राज्य के विकास में आप कैंसे उठाना चाहते हैं?

इस बारे में लम्बे समय से यह चर्चा चल रही है और प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी कहा हैं कि ‘उत्तराखंड का पानी और उत्तराखंड की जवानी उत्तराखंड के लिए काम आनी चाहिए।’ इसलिए शासन-प्रशासन स्तर से भी युवाओं को रोजगार दिलाने और उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने पर बल दिया जा रहा हैं। स्वदेशी और ग्राम आधारित अर्थ व्यवस्था को विकसित करने पर हम ध्यान दे रहे हैं। हमारा मानना है कि यदि ग्राम आधारित अर्थ व्यवस्था का आदर्श हमने यहां पर स्थापित कर दिया तो यह पूरे देश के लिए प्रेरणा का एक स्रोत बन जाएगा। क्योंकि केवल शहरों के विकसित होने से इस समस्या का अंत नहीं होगा इसलिए गांव-गांव को उद्योग व्यवसाय एवं स्वरोजगार से जोड़ना होगा। तभी हम युवाओं की पूरी क्षमता का उपयोग राज्य के विकास में कर पाएंगे।

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए आत्मनिर्भर भारत का मंत्र दिया हैं, उसमें उत्तराखंड का योगदान किस तरह से रहेगा?

हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर होने के लिए प्रधान मंत्री मोदी ने कहा हैं। अपने पैरों पर खड़ा होने के लिए, आत्मनिर्भर बनने के लिए भारत लालायित है। आत्मनिर्भर भारत याने स्वाभिमानी भारत, शक्तिशाली भारत, वैभवशाली भारत, गौरवशाली भारत जिसका हम सपना देखते थे। उस दिशा में प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और नेतृत्व में हम आगे बढ़ रहे हैं। शिक्षा, चिकित्सा, उद्योग-व्यवसाय, पर्यटन, उर्जा अदि अनेक क्षेत्रों में हम सुनियोजित तरीके से काम कर रहे हैं। निश्चित रूप से प्रत्येक क्षेत्र में उत्तराखंड राज्य को आत्मनिर्भर भारत बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा। मेरा पूर्ण विश्वास है कि प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत केवल आत्मनिर्भर ही नहीं होगा बल्कि वैभव संपन्न महाशक्तिशाली राष्ट्र भी बनेगा और दुनिया का नेतृत्व भी करेगा।

उत्तराखंड राज्य का विधानसभा का चुनाव नजदीक आ रहा है। क्या आपके नेतृत्व में फिर से राज्य में भाजपा की सरकार बनेगी?

उत्तराखंड की जनता बहुत जागरूक हैं और वह यह बहुत अच्छे से जानती हैं कि उत्तराखंड राज्य के लिए कौन सी पार्टी अच्छी हैं और कौन सी नहीं। मेरे 3 माह के कार्यकाल में मैं राज्य के दूर दराज के क्षेत्रों में गया हूं। जिस प्रकार से माताओं का, बहनों का और बड़े बुजुर्गों का, हमारे नौजवान साथियों का, हमारे छात्र-छात्राओं का हमें स्नेह प्यार और समर्थन मिला है, उससे प्रेरित होकर हमारे मन में उत्तराखंड को आगे बढ़ाने की भावना बलवती हुई है। उत्तराखंड को हम भारत का नंबर वन राज्य बनाना चाहते हैं। उसके लिए पूरी ताकत से हम काम कर रहे हैं। प्रधान मंत्री मोदी के नेतृत्व में उत्तराखंड सहित पूरे देश भर में इतना काम हुआ है जितना पहले कभी नहीं हुआ और उत्तराखंड की जनता ये सब देख रही हैं। ‘न भूतो न भविष्यति’ कुछ इस तरह का काम भाजपा सरकार के नेतृत्व में उत्तराखंड के विकास के लिए हुआ हैं। जनता यह जानती हैं कि डबल इंजन के साथ उत्तराखंड विकास की राह पर अग्रसर हैं।

भारत के अलग-अलग राज्यों में रहनेवाले उत्तराखंड के प्रवासी नागरिकों को आप इस दीपावली विशेषांक के माध्यम से क्या संदेश देना चाहेंगे?

आप सभी अपने मूल स्थानों से दूर गये हुए हैं और वहां जाकर आपने बहुत अच्छा काम किया है। बहुत अच्छी प्रगति की है। आप सभी अपने मूल प्रदेश उत्तराखंड में भी आये, हम आपका अपने राज्य के विकास में भी योगदान चाहते हैं। आप सभी हमें अपना बहुमूल्य सुझाव दें और उत्तराखंड के विकास में जो भी आप यथासंभव योगदान देना चाहते हैं जरूर दें। हम आपका और आपके सुझाव का स्वागत करेंगे और आपने जो भी कुछ उत्तराखंड के विकास के बारे में कल्पना की होगी, उसे साकार करने का निश्चित ही हम प्रयास करेंगे। हिंदी विवेक के पाठकों सहित उत्तराखंड और देशवासियों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं।

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