सैनिक निर्माण करनेवाली संस्था-डॉ. दिलीप बेलगावकर

स्वतंत्रता के 10 वर्ष पूर्व से ही एक संस्था भारत के उज्ज्वल भविष्य के लिये, एक सशक्त सेना के निर्माण के लिए सैनिक तैयार कर रही है, उस संस्था का नाम है, भोंसला मिलिट्री स्कूल। प्रस्तुत है देश की सुरक्षा व्यवस्था तथा भोंसला मिलिट्री स्कूल की भविष्यकालीन योजनाओं के संदर्भ में डॉ. दिलीप बेलगावकर, सरकार्यवाह, सेंट्रल हिंदू मिलिटरी एज्युकेशन सोसायटी, से हुई बातचीत के कुछ प्रमुख अंश-

भोंसला मिलिट्री स्कूल की स्थापना का प्रमुख उद्देश्य क्या था? यह कब, क्यों और किस परिस्थिति में शुरु किया गया? 

भोंसला मिलिट्री स्कूल 1937 में शुरु किया गया जबकि इसके ट्रस्ट सेंट्रल हिन्दू मिलिट्री एजुकेशन सोसाइटी की स्थापना दो साल पहले 1935 में ही हो गई थी। शिवराज्याभिषेक के पवित्र दिन पर भोंसला मिलिट्री स्कूल की नींव रखी गई। इस स्कूल की नींव डॉक्टर बालकृष्ण शिवराम मुंजे ने रखी थी और आश्चर्य की बात यह है कि उस समय उनकी उम्र करीब 64 वर्ष थी। उनके मन में मिलिट्री स्कूल खोलने का विचार करीब 25 साल पहले से था। मिलिट्री स्कूल के लिए उन्होंने विदेशों का दौरा भी किया और यह सीखा कि मिलिट्री स्कूल कैसे चलाया जाता है। डॉक्टर बालकृष्ण शिवराम मुंजे का मिलिट्री स्कूल खोलने के पीछे का उद्देश्य सैनिक शिक्षा का भारतीयकरण करना था। हम जिस आत्मनिर्भर भारत का सपना आज देख रहे हैं, वह डॉ. मुंजे ने दशकों पहले ही देख लिया था। आज सरकार भी इस पर तेजी से काम कर रही है।

स्थापना से लेकर 2022 तक विद्यालय ने कौन-कौन सी उपलब्धियां प्राप्त की हैं?

भोंसला मिलिट्री स्कूल जब खोला गया तब सरकार की मदद से लगभग 1000 एकड़ जमीन खरीदी गई, क्योंकि उस समय भी ऐसी दूरदृष्टि थी कि आने वाले समय में विद्यालय का और भी विकास होगा और जमीन की जरूरत पडेगी। 1986 में भोंसला मिलिट्री कॉलेज की नींव रखी गई। इसके बाद प्राथमिक स्कूल की भी स्थापना की गई, जिसमें हिन्दी, अंग्रेजी और मराठी माध्यम शामिल था। वर्ष 2001 में डॉ. मुंजे मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट की शुरुआत हुई। 2013 में भोंसला मिलिट्री स्कूल फॉर गर्ल्स भी शुरु किया गया। यह डॉ. मुंजे का सपना था कि लड़कियों को भी मिलिट्री की शिक्षा मिले। यहां अब एडवेंचर स्पोर्ट्स और अलग-अलग तरह के खेलकूद की भी शिक्षा दी जाती है। देश के लिए गोल्ड जीतने वाले कई खिलाड़ी भोंसला स्कूल के ग्राउंड से निकले हुए हैं।

भोसला मिलिट्री स्कूल के विद्यार्थी आज समाज में किस उंचाई पर है?

हमारा यह उद्देश्य रहा है कि हम देश की सेना में महाराष्ट्र सहित बाकी राज्यों से बच्चों को देश सेवा के लिए तैयार करें और मुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि आज भी भारतीय सेना में लगभग 500 ऐसे अफसर हैं, जो भोंसला मिलिट्री स्कूल से निकले हैं। सिर्फ सेना ही नहीं बल्कि बाकी क्षेत्रों में भी हमारे छात्र काम कर रहे हैं और उनका समाज में एक विशेष स्थान हैं। उदाहरण के लिए आपको बता दें कि रामदंडी जनरल छिब्बर, एयरफोर्स से रिटायर्ड रामदंडी अजीत भोसले भी हमारे स्कूल के ही हैं। भोंसला स्कूल में जो भी लोग शिक्षा लेते हैं उन्हें रामदंडी कहा जाता है।

आपने छात्रों के लिए रामदंडी शब्द का इस्तेमाल क्यों किया है?

रामदंडी का मतलब है- राम के आदर्शों का निर्वहन करने वाला। भोंसला स्कूल में राम मंदिर बनाया गया है जिसमें ‘गन मेटल’ (गोली चलने के बाद बचे हुए खोल) से बनाई हुई भगवान राम की मूर्ति है। यह मूर्ति कोदंडधारी राम की मूर्ति है जो छात्रों में एक तेज पैदा करती है।

राष्ट्रीय सुरक्षा देश की प्राथमिकताओं में प्रथम क्रमांक पर है। भोंसला मिलिट्री स्कूल इसमें किस प्रकार से अपना योगदान दे रहा है?

राष्ट्रीय सुरक्षा में हम लंबे समय से शिक्षा के माध्यम से अपना योगदान दे रहे हैं, लेकिन इसके साथ ही हम हर साल 12 से 14 दिसंबर को नासिक में एक व्याख्यान माला भी चलाते हैं, जिसमें आम जनता को देश के बाहरी और आंतरिक खतरे के बारे में जानकारी दी जाती है कि किस प्रकार से देश को आंतरिक स्तर पर भी खतरा हो सकता है। देश को खतरा हमेशा आंतरिक और बाहरी दोनों तरफ से होता है और इसके लिए देश की जनता को जागरूक करना बहुत ही जरूरी है। हमें मेरीटाइम सिक्योरिटी, बार्डर सेक्योरिटी, स्पेस सिक्योरिटी, साइबर सिक्योरिटी सहित कई आयामों से जुड़ने की आवश्यकता है। 6 साल पूर्व हमने कान्होजी आंग्रे मेरीटाइम रिसर्च इंस्टीट्यूट की नींव रखी। 6 सालों से हम नेशनल कॉन्क्लेव का आयोजन भी कर रहे हैं। शिप बिल्डिंग को लेकर भारत हमेशा से प्रमुख रहा है, हम इसे आगे बढ़ाने पर काम कर रहे हैं और शिप बिल्डिंग को लेकर समय-समय पर वेबिनार होते रहते हैं जिसके माध्यम से लोगों को शिक्षित एवं जागरुक किया जाता है।

सुरक्षा की दृष्टि से हमें बहुत सारे परिवर्तन दिखाई दे रहे हैं। इनको देखते हुए भोंसला स्कूल में क्या परिवर्तन हो रहे हैं?

ड्रोन का बाकी क्षेत्रों के साथ-साथ देश की सुरक्षा में बहुत बड़ा रोल बन रहा है। इसको ध्यान में रखते हुए हम भोंसला कॉलेज के बच्चों को ड्रोन की शिक्षा दे रहे हैं। हम रॉकेट टेक्नोलॉजी पर शिक्षा दे रहे हैं। मेरीटाइम के लिए जो रिसर्च करना है उसके लिए कोंकण में एक और इंस्टीट्यूट खोलने जा रहे हैं।

भारतीय युवाओं को सैनिक शिक्षा प्राप्त हो और उनकी रुचि इसमें बढ़े इसके लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?  

स्कूल के अवकाश काल में हम ‘मिलिट्री कैंप’ चलाते है यह दो प्रकार का होता है- पहला पर्सनालिटी डेवलपमेंट जिसमें 10वीं कक्षा तक के छात्रों को बुलाया जाता है। इस कैंप की तारीख हर साल 14 अप्रैल से 30 अप्रैल तक होती है, जबकि दूसरा समर मिलिट्री ट्रेनिंग कैंप हर साल 1 मई से 30 मई तक चलता है। छात्राओं के लिए होने वाली ट्रेनिंग की तारीख अलग होती है। कैंप में आने वाले बच्चों को सेना के लिए तैयार किया जाता है और उन्हें प्रोत्साहित किया जाता है।

मोदी सरकार के शासनकाल में सुरक्षा नीति में परिवर्तन दिखाई दे रहा है,  आपकी सुरक्षा नीति को लेकर क्या राय है?

सरकार द्वारा सुरक्षा नीति पर लिए गए फैसले बहुत ही सही हैं और खासकर भारतीय सेना के लिए यह अधिक लाभकारी है। मोदी सरकार के यह सभी निर्णय क्रांतिकारी हैं, जो इससे पहले किसी सरकार ने लेने की हिम्मत नहीं दिखाई। ‘वन रैंक वन पेंशन’ और ‘चीफ ऑफ डिफेंस’ सहित कई ऐसे फैसले हैं, जो सेना के जवानों का मनोबल बढ़ा रहे हैं और सेना को यह बात भी समझ आ रही है कि कोई ऐसा नेता है जो उनके बारे में गहराई से सोच रहा है। मोदी सरकार ने तकनीक पर भी बहुत काम किया है और सेना को आधुनिक तकनीक वाले हथियार उपलब्ध करवाए। क्योंकि सरकार को इस बात की जानकारी और चिंता दोनों थी कि दुश्मन को मुहतोड़ जवाब देने के लिए टेक्नोलॉजी से समझौता नहीं किया जा सकता है। सरकार ने 100 और मिलिट्री स्कूलों को खोलने का निर्णय लिया है और उसके लिए बजट की भी घोषणा कर दी है। यह सभी राज्यों में खोले जाएंगे। कुछ मिलिट्री स्कूल पीपीपी फार्मूले के आधार पर भी खोले जाएंगे। हम भी सरकार के साथ मिलकर कुछ और मिलिट्री स्कूल खोलने का प्रयास कर रहे हैं। देश की सुरक्षा व्यवस्था अभी तक की सबसे उत्तम व्यवस्था है।

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