स्त्री शक्ति की मिसाल

सनातन संस्कृति में नारी का स्थान सर्वोच्च होता है इसीलिए यहां ज्यादातर शक्तियां देवियों के पास निहित हैं। नारी को अपनी क्षमता का भान होना चाहिए और वह अपने अधिकारों के प्रति सजग रहे, तथा राष्ट्र के विकास में उसका योगदान भी बढ़े। यही देश के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का भी विचार है, जिसे उन्होंने स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव पर लाल किले की प्राचीर से व्यक्त किया।

भारत में स्त्री को देवी का रूप माना जाता है। नवरात्र पर कन्या पूजन होता है। लेकिन हम स्त्रियों को दुनिया के सामने साबित करना होगा कि स्त्री देवी की तरह सौम्य और ममतामयी तो है, साथ ही कानून और बुलंद हौसलों के हथियार भी उसके पास हैं। वह निहत्थी नहीं है। वह अपने अधिकार और अपनी जिम्मेदारी साथ लेकर दमदार तरीके से चलने में पूरी तरह सक्षम है। हर वो महिला जो भेदभाव, अत्याचार और शोषण के खिलाफ आवाज उठा रही है, रूढ़ियों को तोड़ने की कोशिश कर रही है, वह स्त्री-शक्ति की मिसाल है। दूसरी स्त्रियों के लिए प्रेरणा है। इसी तरह हर स्त्री को अपनी शक्ति पहचाननी होगी। नवरात्र के नौ दिन स्त्री-शक्ति की महिमा गाई जाती है, लेकिन सिर्फ नौ दिन के लिए नहीं, बल्कि मातृ-शक्ति की महिमा को हमें एक सदाबहार गीत बनाना होगा। हर दिन, हर कदम पर इस स्त्री-शक्ति का एहसास रखना होगा। स्त्रियों को इसलिए कि वे अपनी स्थिति को बेहतर करती रहें। अपने अधिकारों के लिए तब तक लड़ती रहें, जब तक कि समाज में उनके प्रति भेदभाव जड़ से गायब न हो जाए। पुरुषों को इसलिए हमेशा स्त्री-शक्ति का एहसास रखना होगा, ताकि वे कभी न भूलें कि स्त्री वक्त पड़ने पर कभी भी दुर्गा और काली का रूप धर सकती है।

जरूरत पड़े, तो आवाज उठाएं

कोई आप पर अत्याचार कर रहा है, आपके साथ भेदभाव कर रहा है, किसी तरह का शोषण किया जा रहा है या आप पर बिना कारण  दबाव बनाया जा रहा है, सिर्फ इसलिए कि आप एक महिला हैं? तो चुप मत बैठिए। बदनामी महिला की ही होती है, यह सोचकर कुछ भी सहन मत करिए। आप सही हैं, तो कोई आपको गलत नहीं ठहरा सकता। गलत का विरोध करिए। अपने अधिकारों को पहचानिए और आगे बढ़कर उन्हें लीजिए। आपकी मर्जी के खिलाफ कोई आपको कमतर महसूस नहीं करा सकता। कोई आपको जबरन स्पर्श नहीं कर सकता। अपने लिए आवाज उठाइए। आपकी चुप्पी सामने वाले का हौसला बढ़ाती है। आप बता दीजिए, जता दीजिए कि अब आप चुप नहीं रहेंगी।

साथ है कानून

अगर विरोध से बात नहीं बनती, तो शोषण के खिलाफ कानून का सहारा लेने से न झिझकें। तमाम कानून महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों के लिए मौजूद हैं। अपने अधिकारों के लिए सजग रहें। हो सके, तो किसी वकील से परामर्श लेने से भी पीछे न हटें। वहां आपको सही राह मिलेगी। जानकारी रखें कि भारतीय दंड संहिता के तहत ऐसे कौन-कौन से कानून हैं, जो महिलाओं की मदद कर सकते हैं। अपने आपको हमेशा अपडेट रखें। अपने मतलब की हर बात को जानने-समझने की कोशिश करती रहें। जागरूकता ही आपका बड़ा हथियार है। गलत करने वाले को धारा सहित कानून का डर दिखाएं। जब आप निडर होकर उसे धमकी देंगी, तो वह खुद अपने कदम पीछे खींच लेगा। अगर वह ऐसा नहीं करता, तो मजबूत इरादा करें और कानून की मदद लें।

मदद मिलेगी हेल्पलाइन नम्बर पर

अगर कभी किसी मुसीबत से बचने का कोई हल नजर न आ रहा हो या अपनी परेशानी किसी से बताने में हिचक हो रही हो, तो दूसरा रास्ता भी है। वुमन हेल्पलाइन नंबर 1091 मिलाएं, जो देश भर की महिलाओं के लिए है। हर राज्य की महिलाओं की मुसीबत में मदद के लिए भी एक खास नम्बर होता है, जिसके बारे में आपको पता होना चाहिए। सभी जरूरी नम्बर को नोट करके रखें और जरूरत पड़ने पर फोन करें। हेल्पलाइन नम्बर पर फोन करके अपनी समस्या बताएं। अगर कोई आपसे छेड़छाड़ करता है या कोई फोन करके बार-बार परेशान कर रहा है, तो उसकी शिकायत भी यहां कर सकती हैं। इस नम्बर पर आपको महिला पुलिस की सेवा मिलेगी। आपका नाम समेत आपकी हर तरह की बात को यहां गोपनीय रखा जाएगा। बेफिक्र रहें, इस पर फोन करने से पुलिस आपके घर नहीं आएगी। वह गोपनीय तरीके से आपकी समस्या से निपटेगी। कभी जरूरत हो, तो आप 100 या 112 नम्बर मिलाकर पुलिस या आपातकालीन सेवा भी ले सकती हैं।

दूसरी स्त्रियों का भी देना होगा साथ

स्त्रियां उस दिन सबसे ज्यादा सशक्त हो जाएंगी, जब वे दूसरी स्त्रियों की सहायता के लिए खड़ी होना शुरू कर देंगी। घर हो या बाहर, स्त्री ही स्त्री की दुश्मन कही जाती है। इस कहावत को बदलें। आप स्त्री हैं, तो स्त्री का दर्द समझिए। किसी को परेशान देखकर सोचिए कि आप उसकी जगह होतीं, तो? जैसा व्यवहार आप अपने लिए चाहती हैं, वैसा ही दूसरी स्त्रियों के साथ भी करिए। आपस में स्वस्थ प्रतियोगिता चलती है, लेकिन ईर्ष्या-द्वेष के लिए मन में कोई जगह नहीं होनी चाहिए। दूसरी महिलाओं को भी मुसीबत में देखकर आवाज उठानी होगी, न सिर्फ अपने लिए। एक-दूसरे के सशक्तीकरण में भागीदारी करिए, फिर देखिए कि कैसे पूरे समाज में महिलाएं सशक्त होती हैं।

स्त्री-शक्ति में वृद्धि, प्रधान मंत्री का सपना

स्वतंत्रता दिवस पर प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में अपना यह स्वप्न प्रमुखता से साझा किया कि वे स्त्री-शक्ति को बेहद मज़बूत होते हुए देखना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस कर्म हो या खेलकूद का मैदान या युद्ध की भूमि……हर क्षेत्र में भारत की नारी शक्ति एक नए जोश के साथ आगे आ रही है। उनका मानना है कि आने वाले 25 सालों में नारी शक्ति पूरे देश को आगे बढ़ने में मौका देगी। इस अमृतकाल में देश सपने पूरे करने में जो मेहनत कर रहा है, उसमें उन्होंने स्त्री शक्ति को जोड़ने की बात कही, ताकि पूरे देश की मेहनत कम हो सके। प्रधान मंत्री के इस स्वप्न को पूरा करने में सभी पुरुषों समेत हम सभी स्त्रियों को भी अपना पूरा योगदान देना होगा। भारत को एक विकसित देश बनाने के लक्ष्य में हम स्त्रियों को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। हम खूब पढ़ें-लिखें, अपने और दूसरों के अधिकारों को लेकर जागरूक रहें, कुछ कर दिखाएं, कुछ बन दिखाएं! हमेशा याद रखें- हम स्त्री-शक्ति हैं…कुछ भी कर सकती हैं!

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