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       वर्तमान गतिमान विश्व में जहां रोज एकसाथ मिलना संभव नहीं होता है, वहां क्लाउड तकनीक के कारण प्रत्येक क्षण उत्तम जानकारी मिलना सहज संभव हो गया है। स्पर्धात्मक विश्व में आगे बढ़ने हेतु इसका उपयोग महत्वपूर्ण एवं आवश्यक है।

‘पेपरलेस ऑफिस’ की कल्पना साकार करने हेतु ’क्लाउड कम्प्यूटिंग’ तकनीक का उपयोग अपरिहार्य है। वर्षा का पानी क्या केवल एक घर पर बरसता है? वह तो पूरे गांव को भिगोता है। वैसे ही क्लाउड कम्प्यूटिंग आधारित तकनीक का उपयोग एक ही समय में कई लोग कर सकते हैं। कम्प्यूटर सॉफ्टवेअर, एप्स, अन्य जानकारियों जैसे स्रोत इंटरनेट के माध्यम से पूरे विश्व की जनता को उपयोग हेतु उपलब्ध कराए जाते हैं। हम सब केई-मेल आईडी एवं ई-मेल सर्विसेज जिन जी मेल या याहू के माध्यम से उपयोग किए जाते हैं, वे  क्लाउड कम्प्यूटिंग के उत्तम उदाहरण हैं। इंटरनेट सेवा के माध्यम से हम विश्व में कभी किसी भी कम्प्यूटर, लैपटॅाप, टैब या मोबाइल के द्वारा इस ई-मेल सेवा का सहज उपयोग कर सकते हैं। क्लाउड कम्प्यूटिंग तकनीक के माध्यम से उपलब्ध स्रोत निःशुल्क या अत्यंत कम दरों पर उपलब्ध हैं और इसलिए इस तकनीक का बड़े पैमाने पर उपयोग हो रहा है।

वर्चुअल सर्वर- किसी कार्यालय के कम्प्यूटर लोकल नेटवर्क में सर्वर के साथ नेटवर्क केबल या राउटर द्वारा ज़ुडे होते हैं। इस सर्वर के सॉफ्टवेयर/जानकारी/स्रोत उससे जुड़े सभी कम्प्यूटर उपयोग करते हैं। ऐसा ही एक सर्वर इंटरनेट के माध्यम से आपको उपलब्ध कराया जाता है। उसे वर्चुअल सर्वर कहा जाता है। संपूर्ण सर्वर इंटरनेट के माध्यम से केवल किसी एक व्यक्ति (VDS – Virtual Dedicated Server) या अन्य के साथ टुकड़े में (VPS – Virtual  Private Server) शेयर किया जा सकता है। इसके लिए केवल मासिक किराया देना पड़ता है। आपके लिए आवश्यक सॉफ्टवेयर्स जैसे  माइक्रोसॉफ्ट वर्ड, एक्सेल, विजुअल स्टूडियो, एम. एस. एसक्यूरल, फोटोशॉप इत्यादि आपको सर्वर सेवा प्रदाता कंपनी मासिक किराए पर भी उपलब्ध करा सकती है।

लोकल सर्वर के मेंटेनेन्स, लोकल लाइसेंस, वातानुकूलित व्यवस्था, 24*7*365 चालू रखने हेतु इंजीनियर रखने पड़ते हैं, जिनका खर्च बहुत आता है। इसकी तुलना में वर्चुअल सर्वर सेवा प्रदाता कंपनी का मासिक किराया कम होता है। इस सर्विस का कम से कम किराया रु. 8000/- प्रति माह होता है। मदरबोर्ड की स्पीड, प्रोसेसर, रैम, हार्डडिस्क की क्षमता का चुनाव हम स्वयं कर सकते हैं। इसके अनुसार मासिक किराया कम अधिक हो सकता है। जिन संस्थाओं के कार्यालय एक से अधिक स्थानों पर हैं। वे इसका उपयोग तुरंत प्रारंभ कर सकते हैं। गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, एमेजान सरीखी बड़ी संस्थाओं के साथ ही अन्य अनेक संस्थाएं यह सेवा प्रदान कर रही हैं। आज माइक्र्रोसॉफ्ट के पास एक मिलियन से ज्यादा सर्वर कार्यरत हैं जो गूगल से कम एवं एमेजान से अधिक हैं। इस या इस जैसी सेवा को Infrastructure-as-a-service (Iaas) कहा जाता है। डिजिटलाइजेशन का महत्व एवं उपयोगिता बढ़ने के कारण इस क्षेत्र में पैसा लगाने/ रोजगार हेतु एक बड़ा अवसर उपलब्ध है। बैंक, बड़े कारपोरेट्स के यहां कागजी दस्तावेज इकट्ठा करने हेतु डिजिटलाइजेशन का उपयोग बड़े पैमाने पर किया जाता है। डाक्यूमेंट स्केनिंग कर, वर्चुअल सर्वर पर उसका सूत्रबद्ध एकत्रीकरण संभव होने के कारण उसे जब  चाहें, जहां चाहें देखना सहज संभव है।

वर्चुअल ड्राइव:- मध्यम, छोटी संस्था एवं व्यक्तिगत उपयोग हेतु गूगल, माइक्रोसाफ्ट, याहू जैसी अनेक संस्थाओं ने यह विकल्प उपलब्ध कराया है। इनमें ’गूगल ड्राइव’ सबसे लोकप्रिय है। यहां साधारणत: 15 जी.बी. तक की जानकारी नि:शुल्क एकत्रित की जा सकती है। आवश्यकता होने पर सस्ते दर पर जगह बढ़ाने की गुंजाइश है। आपके वेब ब्राउजर में www.google.com/drive टाइप कर आपके जी मेल (ई मेल) आईडी से लॉगऑन करें। बाईं ओर ‘माय ड्राइव’ मेन्यू दिखाई पड़ेगा। इस पर क्लिक करने पर दाहिनी ओर आपके द्वारा तैयार  फोल्डर्स दिखाई देंगे। बाईं तरफ उपलब्ध ’न्यू’ बटन पर क्लिक करने  पर आप नया फोल्डर तैयार कर सकते हैं, फाइल्स अपलोड या डाउनलोड कर सकते हैं। संपूर्ण तंत्र मेन्यू के द्वारा संचालित होने के कारण तथा प्रत्येक स्थान पर उस बटन लिंक का स्पष्टीकरण दिया जाने के कारण उपयोग सरल हो जाता है। अलग अलग फोल्डर्स तैयार कर उसमें एम.एस.वर्ड, एक्सेल, पॉवरप्वाइंट, पीडीएफ इत्यादि फाइल्स सुनियोजित पद्धति से अपलोड या डाउनलोड की जा सकती हैं। लोकल कम्प्यूटर/मोबाइल पर किसी फाइल का गूगल ड्राइव के साथ सिंक्रोनाइजेशन सहज संभव है। इस विकल्प के कारण गूगल सेवा लोकल डिवाइस पर एवं गूगल ड्राइव पर एक सरीखी प्रति रखने का काम करती है।

डॉक्यूमेंट शेयरिंग:- समूह में काम करते समय एक ही फाइल समूह के सदस्यों के साथ एक ही समय उपयोग करने की संभावना होती है। वैसे ही इस फाइल में एकत्रित जानकारी समूह के एक या अधिक व्यक्तियों द्वारा अद्यतन करने की आवश्यकता होती है। गूगल डॉक्स इस विषय में उपयुक्त है। गूगल ग्रुप के माध्यम से आप केवल अपने समूह के व्यक्तियों का एक गुट तैयार कर सकते हैं। इस ग्रुप में या ग्रुप के बाहर किसी व्यक्ति के साथ आप कोई एक्सल या वर्ड की फाइल शेयर कर सकते हैं। शेयर करते समय उस व्यक्ति को केवल पढ़ने या उसमें बदल करने के अधिकार आप निश्चित कर सकते हैं। उदाहरणार्थ छह व्यक्तियों की सेल्स टीम, उनके सेल्स टीम के सेल्स का स्कोर एक ही शेयर की हुई एक्सेल की फाइल में अपलोड करती है तो उस समूह के प्रधान को सेल्स का स्कोर त्वरित उपलब्ध होता है और उसके आधार पर वह आगे की कार्यवाही कर सकता है।

सॉफ्टवेयर एज सर्विस (SAS) :- कोई एक साफ्टवेयर खरीदने के उपरांत उसे अपने लोकल कम्प्यूटर या सर्वर में प्रस्थापित कर अपने कार्यालय की सीमाओं के अंदर उपयोग करने का तत्व अब कालबाह्य हो गया है। कम्प्यूटर आदि फारमेट करना पड़ा तो साफ्टवेयर को पुनः प्रस्थापित करना पड़ता है। डेटा बैकअप लिया है या नहीं जैसे कई प्रश्न खड़े होते हैं। क्लाउड बेस्ट सॉफ्टवेअर की तकनीक के कारण अपनी सीमाओं के कम्प्यूटर में उसे प्रस्थापित कर केवल इंटरनेट के माध्यम से कम्प्यूटर, लैपटॉप या मोबाइल द्वारा उपयोग  किया जा सकता है। जैसे कि संस्था का हिसाब रखना, जीएसटी से संबधित, इनवेंटरी, सिलिंग, पॉइंट आफ सेल्स, ग्राहकों के संबध में जानकारी, वेतन, बिल इत्यादि के सॉफ्टवेयर खरीदने की बजाय सॉफ्टवेयर का मासिक किराया भरना फायदेमंद व सरल है। इसमें हमें संपूर्ण सॉफ्टवेयर का किराया भरने की बजाय आवश्यक मॉड्यूल का उपयोग करने की छूट भी होती है।

क्लाउड तकनीक का उपयोग विद्यार्थी से लेकर उच्च पदस्य व्यक्ति, संस्थाओं द्वारा किया जा सकता है। अपने लोकल कम्प्यूटर की हार्ड डिस्क करप्ट होना, वायरस आना, अचानक मोबाइल बंद पड़ना, एक्स्टर्नल हार्ड डिस्क पर रखी बैकअप की दूसरी प्रति डिस्क खराब होने के कारण नष्ट होना जैसे कारणों के लिए क्लाउड सर्वर एक उत्तम पर्याय है। डाक्यूमेंट शेयरिंग तकनीक के कारण अनेक संस्थाओं की कार्य पद्धति में बढ़ी तत्परता, कार्यक्षमता के अनेक उदाहरण हैं।  वर्तमान गतिमान विश्व में जहां रोज एकसाथ मिलना संभव नहीं होता है, वहां क्लाउड तकनीक के कारण प्रत्येक क्षण उत्तम जानकारी मिलना सहज संभव हो गया है। स्पर्धात्मक विश्व में आगे बढ़ने हेतु इसका उपयोग महत्वपूर्ण एवं आवश्यक है।

इंटरनेेट पर एकत्रित जानकारी पासवर्ड के बिना नहीं देखी जा सकती। यदि कोई फाइल किसी व्यक्ति के साथ शेयर की गई है तो उसमें बदल करने देने या मना करने का हक फाइल मालिक के पास सुरक्षित रहता है। परंतु यह जानकारी जहां एकत्रित की जाती है उस कंपनी द्वारा उस जानकारी का प्रसिद्धि हेतु उपयोग करने के लिए कोई बंधन नहीं होता, यह ध्यान में रखना आवश्यक है। जिस जानकारी के कारण बड़ी आर्थिक गतिविधि की संभावना हो उसे इस महाजाल से दूर रखना ही अच्छा है। परंतु स्वत: की संस्था की प्रगति हेतु इस सेवा का उपयोग अत्यावश्यक है, यह भी सच है।

 

 

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