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केंद्रीय बजट 2018 ने भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास के प्रमुख माध्यम के रूप में बुनियादी ढांचा क्षेत्र की पहचान की है। बजट में आधारभूत संरचना प्रावधान जीडीपी में वृद्धि, कनेक्टिविटी को मजबूत करने, विशेष रूप से सीमावर्ती क्षेत्रों को मुख्य भूमि से जोड़ने के लिए महत्वपूर्ण हैं।

केंद्रीय बजट 2018 बुनियादी ढांचा क्षेत्र के लिए एक बहुत बड़ा मील का पत्थर है, खास तौर पर सामाजिक क्षेत्र के बुनियादी ढांचे के मामले में, जो कि अब चर्चा के केंद्र में आ चुका है। भारत बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में कई पहल कर रहा है। इस क्षेत्र के रणनीतिक महत्व के कारण, केंद्रीय बजट 2018 में उठाए गए नए प्रयासों के, भारत में बुनियादी ढांचे के विकास के अवसरों और विकास चालकों के मूल्यांकन के लिए, गहन विश्लेषण की आवश्यकता है।

पिछले केंद्रीय बजट 2017-18 में, सरकार ने इस क्षेत्र के लिए 61.92 अरब अमेरिकी डॉलर की भारी राशि आवंटित की थी। इसके अलावा, भारत में वित्त वर्ष 2016-17 में 3.49 बिलियन अमेरिकी डॉलर के 33 सौदे हुए जबकि वित्त वर्ष 2015-16 में 31 सौदों में 2.98 बिलियन अमेरिकी डॉलर के सौदे हुए, जिसमें अधिकांश सौदे बिजली, सड़कों और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में हैं।

यह कहना उचित होगा कि निजी क्षेत्र विभिन्न बुनियादी ढांचे के मामले में, विशेषकर सड़कों और संचार से लेकर, बिजली और हवाई अड्डे आदि तक के प्रमुख घटक के रूप में उभर रहा है। अप्रैल 2000 से सितंबर 2017 तक टाउनशिप, आवास, बुनियादी ढांचे और निर्माण विकास परियोजनाओं में प्राप्त एफडीआई 24.66 बिलियन अमेरिकी डॉलर था; और निर्माण गतिविधियों में 10.70 बिलियन अमेरिकी डॉलर था।

भारत में बुनियादी ढांचे के विकास की भारी मांग है क्योंकि देश में टिकाऊ विकास के लिए 2022 तक बुनियादी ढांचे में रुपये 50 ट्रिलियन (लगभग यूएस  777.73 बिलियन) के निवेश की आवश्यकता है। आनेवाले वर्षों में बिजली ट्रांसमिशन, सड़कों और राजमार्गों और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भरपूर निवेश की संभावना है। भारत में कई आकर्षक अवसर उपलब्ध हैं जैसे अनुकूल मूल्य और आय, क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना। इसके साथ ही सुधार का एक बहुत बड़ा अवसर राजमार्गों के मामले में उपलब्ध है क्योंकि केवल 24% राजमार्ग ही 4 लेन के हैं। चाइना हार्बर इंजीनियरिंग और मिज़ुहो फाइनेंशियल ग्रुप जैसे वैश्विक संगठनों को आकर्षित करने में सफलता तो प्राप्त हुई ही, साथ ही इस क्षेत्र में 2017 में भरपूर एफडीआई प्राप्त किया गया ।

भरपूर नीतिगत सहायता जैसे सबके लिए घर और स्मार्ट सिटी मिशन के द्वारा भारत सरकार बुनियादी ढांचे के विकास के क्षेत्र से बाधाओं को कम करने के प्रयास कर रही है। उदय योजना के द्वारा भी, जो कि विद्युत् वितरण कंपनियों को पुनर्जीवित करने और वित्तीय कायापलट करने के लिए तैयार की गई है, बिजली क्षेत्र में भी तेज़ी से सुधार हो रहे हैं। साथ ही, बुनियादी ढांचा क्षेत्र में 100% एफडीआई को मंजूरी दे दी गई है।

निर्माण विकास क्षेत्र में कुल संचित एफडीआई प्रवाह, जिसमें टाउनशिप, बिल्ट-अप इंफ्रास्ट्रक्चर और निर्माण विकास परियोजनाएं शामिल हैं, अप्रैल 2000 से सितंबर 2017 के बीच 24.66 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। संयुक्त अरब अमीरात स्थित कंपनी, डीपी वर्ल्ड ने पहले भारत में 1 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश किया था। अब वह माल यातायात और कंटेनर टर्मिनलों के साथ भारत के बुनियादी ढांचे क्षेत्र में 1 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश करने की योजना बना रहा है।

स्क्वेयर कैपिटल, एक वैश्विक आधारभूत निवेश निवेश कंपनी, अपने दूसरे बुनियादी ढांचा कोष के माध्यम से 4 अरब अमेरिकी डॉलर तक बढ़ाने की योजना बना रही है जिसे भारत और दुनिया भर में आधारभूत संरचना संपत्तियों में निवेश किया जाएगा। विद्युत् निर्माण के क्षेत्र में स्थापित क्षमताएं पिछले कुछ वर्षों में समान रूप से बढ़ी हैं, जिनमें 10.57% के सीएजीआर की दर से विव 17 के अंत तक क्षमता बढ़कर 326.84 गीगावाट तक पहुंच गई। विद्युत निर्माण क्षमता एक स्वस्थ गति से आगे बढ़ी है । भारतीय ऊर्जा क्षेत्र अगले 10 वर्षों के दौरान लगभग 300 बिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश के अवसर प्रदान कर रहा है ।  आठ मौलिक आधारभूत संरचना उद्योग में कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, खाद, लौह, सीमेंट और बिजली आते हैं। 2016-17 में कुल इंडेक्स 4.8% की दर से बढ़ा। बिजली (10%), लौह (9%), रिफाइनरी उत्पाद (8.9%), सीमेंट (5.8%) और खाद (3.3%) ने इंडेक्स को बढ़ाया। अप्रैल-अक्टूबर 2017 के बीच कुल बढ़त 3.5% रहा।

भारत में बुनियादी ढांचे के लिए विकास में सरकारी पहलों, बुनियादी ढांचे की आवश्यकता, आवास विकास, अंतरराष्ट्रीय निवेश, और सार्वजनिक निजी भागीदारी ने प्रमुख भूमिका निभाई है। 2017-18 के बजट में बुनियादी ढांचे के लिए कुल आवंटन 61.48 बिलियन अमेरिकी डॉलर है और इसमें रेलवे और मेट्रो रेल, निर्माण, दूरसंचार और ऊर्जा, सड़क और हवाई अड्डों का विकास आदि प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं।

भारत के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाता है क्योंकि उत्तर पूर्व भारत अन्य क्षेत्रों की तुलना में बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। दिसंबर 2017 में, भारत सरकार ने इस क्षेत्र में आधारभूत संरचना परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार से 100 प्रतिशत वित्त पोषण के साथ उत्तर पूर्व विशेष बुनियादी ढांचा विकास योजना (एनईएसआईडीएस) को मंजूरी दी। अक्टूबर 2017 में, भारत सरकार ने घोषणा की कि आने वाले दो से तीन वर्षों में देश के पूर्वोत्तर क्षेत्र में 1.45 ट्रिलियन (22.6 अरब अमेरिकी डॉलर) की राजमार्ग परियोजनाएं की जाएंगी।

सरकार ने पूर्वोत्तर राज्यों में 6.98 बिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश योजना की घोषणा की। उत्तर पूर्व-आगरा ट्रांसमिशन लाइन, जो क्षमता के मामले में देश में बनाई जाने वाली सबसे बड़ी विद्युत संचरण लाइन है, की भी घोषणा की गई है। इसका मतलब है कि जल से समृद्ध पूर्वोत्तर से सस्ती बिजली अब उत्तर भारत के मध्य भाग तक पहुंच सकती है। पूरे क्षेत्र को पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विकसित किया जाना है। अरुणाचल प्रदेश को भारत के सबसे लंबे रेल-सड़क पुल के माध्यम से भारत के रेलवे मानचित्र पर लाया गया था – ब्रह्मपुत्र पर 4.94 किलोमीटर लंबी बोगिबेल पुल बनाया गया। सरकार ने पूर्वोत्तर राज्यों में सभी गेज ट्रैक को ब्रॉड गेज ट्रैक में बदलने की योजना की भी घोषणा की है। मई 2017 में, भारत के प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भारत के सबसे लंबे नदी पुल का उद्घाटन किया- 9.15 किलोमीटर लंबी ढोला- असम में ब्रह्मपुत्र नदी पर साडिया पुल। यह पुल असम और अरुणाचल प्रदेश के लोगों तक आसान यातायात की सुविधा प्रदान करेगा और चीन-भारत सीमा के साथ अपनी रक्षा आवश्यकताओं की आपूर्ति में भी मदद करेगा।

इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण में भारत को वैश्विक केंद्र बनाने के लिए एक ईको-सिस्टम बनाने के लिए एम-एसआईपीएस और ईडीएफ जैसी प्रोत्साहन योजनाओं में 2017-18 में 115.62 मिलियन अमेरिकी डॉलर का प्रावधान है। 2017-18 के बजट में बुनियादी ढांचे के लिए कुल आवंटन 61.48 अरब अमेरिकी डॉलर है। जापानी निवेश ने भारत की विकास गाथा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जापान ने भारत के विनिर्माण और आधारभूत संरचना क्षेत्रों को बढ़ावा देने के लिए 2014-19 की अवधि के लिए लगभग 35 बिलियन अमेरिकी डॉलर का निवेश किया है। जापानी सरकार लगातार भारत में निवेश के अवसर तलाश रही है। मध्य प्रदेश में 3 लाख परिवारों को कवर करने वाले छोटे शहरों में तेज़ी से शहरीकरण के लिए एशियाई विकास बैंक एक पाइपवाली जल आपूर्ति परियोजना के लिए 275 मिलियन अमेरिकी डॉलर का ऋण प्रदान करेगा।

भारत के लिए गृह निर्माण के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए 2022 तक भारत को हर दिन 43,000 घरों का निर्माण करने की आवश्यकता होगी। स्मार्ट शहर कार्यक्रम के तहत अगले दशक में सैकड़ों नए शहरों को विकसित करने की जरूरत है। इसमें वैश्विक स्तर पर भारत को तीसरे सबसे बड़े निर्माण बाजार के रूप में लाने की क्षमता है।

इस क्षेत्र से 2030 तक भारतीय अर्थव्यवस्था में 15 प्रतिशत योगदान की उम्मीद है। हालिया नीतिगत सुधार जैसे रियल एस्टेट एक्ट, जीएसटी, आरईआईटी, अनुमोदन देरी को कम करने के कदम आदि अचल संपत्ति और निर्माण क्षेत्र को मजबूत करने में प्रमुख भूमिका निभाएंगे।

यह स्वतंत्र भारत का पहला बजट है जो सामाजिक क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को केंद्र में लाया है। उत्पादक कार्यबल सुनिश्चित करने के लिए सामाजिक क्षेत्र महत्वपूर्ण है। कृषि और उद्योग के अलावा शिक्षा और स्वास्थ्य में भी रोजगार पैदा होगा। एक बड़ी नई पहल में, सरकार ने कहा कि वह राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण योजना के तहत 500 मिलियन भारतीयों के लिए स्वास्थ्य बीमा पेश करेगी। इस योजना के तहत, 100 मिलियन कमजोर परिवारों को सालाना 500,000 रुपये तक स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान किया जाएगा। जेटली ने कहा कि यह दुनिया का सबसे बड़ा स्वास्थ्य देखभाल कार्यक्रम होगा और यह सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है, यह 2014 में भाजपा के चुनावी अभियान का वादा भी था।

बजट ने बुनियादी ढांचे और शिक्षा में सिस्टम पुनरुज्जीवन (आरआईएसई) योजना के तहत उच्च स्तर के शिक्षा बुनियादी ढांचे के लिए 1 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।

जेटली ने कहा कि, 2018-19 में, किसानों को बाजारों से जोड़ने के लिए ग्रामीण बुनियादी ढांचे पर 14,340 बिलियन रुपये खर्च किए जाएंगे। खाद्य प्रसंस्करण के लिए आवंटन दोगुना होकर रु.14 बिलियन कर दिया गया है। ऑपरेशन फ्लड की तर्ज पर बागवानी के लिए ऑपरेशन ग्रीन की घोषणा की गई और वित्त मंत्री ने नीति के बारे में कहा कि वर्तमान की तुलना में और अधिक किसानों को उनके उत्पादों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) अत्यंत सुलभता से उपलब्ध होगा।

5.1 मिलियन मकान जो कि प्रधानमंत्री आवास योजना (PM-Y) के तहत बनने जा रहे हैं, के अलावा सरकार ने ग्रामीण गृह निर्माण के लिए वित्त वर्ष 19 में रु.21,000 करोड़ अलग से रखे हैं। सरकार के किफायती गृह निर्माण अभियान के निर्णय से सीमेंट, स्टील, पेंट, सेनेटरी वेयर और बिजली उपकरण आदि समेत कई क्षेत्र लाभान्वित हो सकेंगे। सरकार राष्ट्रीय गृह निर्माण बैंक में विशेष किफायती गृह निर्माण फंड निर्मित करेगी। इसके द्वारा उन ग्रामीण घरों को ब्याज में सब्सिडी दी जाएगी जो कि पीएमएवाय में सम्मिलित नहीं हैं।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि अगले वित्तीय वर्ष में बुनियादी ढांचे के निर्माण और उन्नयन में भारत लगभग 5.95 लाख करोड़ रुपये का निवेश करेगा। हमारे देश को सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि के लिए बुनियादी ढांचे में भारी निवेश की जरूरत है जो अनुमानित रूप से 50 लाख करोड़ रुपये से भी अधिक है  जिसमें सड़कों, हवाई अड्डों, रेलवे, बंदरगाहों और अंतर्देशीय जलमार्गों के नेटवर्क के साथ देश को जोड़ना और एकीकृत कर लोगों को अच्छी गुणवत्ता सुविधाएं प्रदान करना शामिल है।

एनडीए सरकार के नए एकीकृत आधारभूत संरचना योजना मॉडल के एक हिस्से के रूप में 2018-19 में रेल और सड़क हेतु क्रमशः 1.48 लाख करोड़ और 1.21 लाख करोड़ रुपये का अब तक का सबसे बड़ा बजट आवंटित किया है। भारत को बाजार से इक्विटी के माध्यम से अपने परिवहन संबंधी बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए सागरमाला (बंदरगाहों के लिए) और भारतमाला जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं के लिए धन की खड़ा करना है। अपनी परिपक्व सड़क परिसंपत्तियों के लिए बाजार से इक्विटी प्राप्त करने के लिए, एनएचएआई अपनी सड़क संपत्तियों को विशेष प्रयोजन वाहन (एसपीवी) में समाहित करने और टोल ऑपरेट एंड ट्रांसफर (TOT) और Invit जैसी नई मुद्रीकरण संरचना को क्रियान्वित करने पर विचार करेगी। भारतमाला के लिए अनुमानित कुल निवेश रुपये 10 लाख करोड़ है जो कि सरकार के लिए सबसे बड़ा परिव्यय है। इसके अतिरिक्त 2035 तक सागरमाला के लिए 8 लाख करोड़ रुपये की जरूरत होगी। जेटली ने कहा कि 2017-18 के दौरान 9000 किलोमीटर से अधिक लंबाई के राष्ट्रीय राजमार्गों को पूरा करने का हमें भरोसा है। देश में 3.3 मिलियन किमी का सड़क नेटवर्क है, जो विश्व का दूसरा सबसे बड़ा नेटवर्क है।

अगले वित्त वर्ष में भारतीय रेलवे के लिए योजना परिव्यय 1.48 लाख करोड़ रुपये के लगभग अनुमानित है, जो इस राष्ट्रीय ट्रांसपोर्टर के लिए अब तक का सबसे बड़ा व्यय है। 3,999 किमी का ट्रैक नवीनीकरण, 12,000 वैगन की खरीद, 20,000 करोड़ रुपये की सुरक्षा निधि, और 6,000 किमी की विद्युतीकरण की योजना बनाई गई है। यह राष्ट्रीय ट्रांसपोर्टर अतिरिक्त बजटीय संसाधनों जैसे आईआरएफसी बॉन्ड के माध्यम से 28,500 करोड़ रुपये जुटाएगा और अन्य ऋणों से 26,440 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आर्थिक सहायता प्राप्त करेगा।

इस प्रकार, केंद्रीय बजट 2018 ने भारतीय अर्थव्यवस्था के विकास के प्रमुख चालक के रूप में बुनियादी ढांचा क्षेत्र की पहचान की है जो कि भविष्य के आर्थिक विकास के लिए आवश्यक है। बजट में आधारभूत संरचना प्रावधान जीडीपी में वृद्धि, कनेक्टिविटी को मजबूत करने, विशेष रूप से सीमावर्ती क्षेत्रों को मुख्य भूमि से जोड़ने के लिए महत्वपूर्ण हैं।

 

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