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मेंहदी केवल श्रृंगार की ही वस्तु नहीं है, बल्कि औषधीय गुणों से भी भरपूर है। मेंहदी शादी-ब्याह में रस्म का हिस्सा है। मेंहदी से मनपसंद टैटू भी आजकल बनाए जाते हैं। भारत समेत पूर्वी देशों में मेंहदी जीवन का अभिन्न अंग है।

भारतीय संस्कृति विभिन्नता से भरी है। यहां सभी त्यौहार धूमधाम से मनाए जाते हैं। सभी परम्पराओं का पालन भी किया जाता है। इन परम्पराओं के पीछे कुछ सुसंगत कारण व इतिहास भी अवश्य है। पूरे वर्ष में अनेक दिन व त्यौहार ऐसे आते हैं जब मेंहदी का प्रयोग किया जाता है। शादी-ब्याह तो खैर मेंहदी के बिना सोचे ही नहीं जा सकते। दुल्हन के सोलह श्रृंगारों में मेंहदी का प्रमुख एवं महत्वपूर्ण स्थान है। शादी से पहले हल्दी लगाने की रस्म निभाई जाती है, ठीक वैसे ही मेंहदी की रस्म भी जरूरी है।

मेंहदी को बहुत भाग्यशाली माना जाता है। ससुराल पक्ष से मेंहदी का आना शगुन का प्रतीक है। आजकल मेंहदी लगाने के लिए ब्राइडल मेंहदी विषेशज्ञों को बुलाया जाता है। मेंहदी की रात का आयोजन मेहमानों को बुलाकर विशेष तौर पर मनाया जाता है; क्योंकि दुल्हन के साथ उसकी सहेलियां व रिश्तेदार भी मेंहदी लगवाने को उत्सुक रहते हैं। यह एक प्रकार का उत्सव ही होता है। मेंहदी से संबंधित लोकगीत व फिल्मी गीतों जैसे मेंहदी लगाके रखना, मेंहदी है रचने वाली, मेरे अंगना मेंहदी का बूटा जैसे खूबसूरत गीतों पर थिरकते हैं। मेंहदी एक रस्म ही नहीं फैशन का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है। मेंहदी के डिजाइन में वर-वधू के नाम के पहले अक्षर का होना बेहद अहम है।

कुछ लोक कथाओं के अनुरूप मेंहदी का सीधा संबंध मां दुर्गा के महाकाली रूप से माना जाता है। मेंहदी को मां दुर्गा का वरदान प्राप्त है कि वह स्त्रियों के सौंदर्य को बढ़ाने के साथ औषधि के रूप में पूजनीय होगी। कहा तो यहां तक जाता है कि मेंहदी लगाने से हाथों की रेखाएं भी बदल सकती हैं जिससे जीवन धन-सम्पत्ति तथा सुख-समृद्धि से भर जाता है। मेंहदी का सुर्ख लाल रंग जीवन में प्रसन्नता लाता है। वैवाहिक जीवन में बनी कटुता को दूर करने में मेंहदी सहायक है।

मेंहदी अर्थात हिना का वैज्ञानिक नाम लॉसोनिमाइनमिर्स है, जो एक पुष्पीय पौधा होता है। यह अरब देश, भारत व पूर्वी द्वीप समूह में प्रमुख रूप से पाया जाता है। घरों और बाग-बगीचों में इसकी बाड़ लगाई जाती है। हल्के पीले तथा सफेद रंग के छोटे-छोटे फूल गुच्छों के रूप में निकलते हैं। इन फूलों से रात्रि के समय बड़ी अच्छी महक निकलती है। इससे सुंगधित तेल भी तैयार किया जाता है। इसकी चिकनी पत्तियों को पीस कर हाथ, पैरों, नाखूनों पर रचाया जाता है। इतना ही नहीं, इस पौधे की छाल और पत्तियां दवा के रूप में प्रयुक्त होती हैं।

अनेक आयुर्वेद औषधियों में इसका उपयोग किया जाता है। मेंहदी केवल श्रृंगार की वस्तु ही नहीं, अपितु औषधीय गुणों से भी भरपूर है। मेंहदी शीतलता का प्रतीक है। इसे मानसिक तनाव, बुखार, सिरदर्द में लगाना अच्छा माना जाता है। मेंहदी से शरीर की जलन दूर होती है या पैरों के तलवे में लगाने से शीतलता मिलती है। गुणकारी औषधि के साथ-साथ इसे समस्त मांगलिक अवसरों पर लगाया जाता है। इसे शुभ प्रतीक भी माना जाता है।

मेंहदी का तेल भी औषधीय गुणों से भरपूर है। खून साफ करने के लिए मेंहदी को रात में पानी में भिगोकर रखें। फिर इसे छानकर पी ले। घुटनों या जोड़ों के दर्द की समस्या होने पर मेंहदी में अरंडी के पत्तों को भी बराबर मात्रा में पीस कर इसी मिश्रण को हल्का सा गर्म करके घुटनों पर लेप करें। सिर दर्द और माइग्रेन जैसी तकलीफ में भी मेंहदी सुकून देने वाली है। जले स्थान पर इसके पत्ते या छाल पीसकर लगाने से घाव जल्दी ठीक हो जाते हैं। बालों के लिए यह अद्भुत श्रृंगार का काम करती है। मेंहदी में आंवला, दही, मेथी पाउडर लगाने से बाल काले, लम्बे और घने हो जाते हैं।

मेंहदी के पत्तों में खाद्य पदार्थों को दूषित करने वाले कीटाणुओं को नष्ट करने वाले तत्व पाए जाते हैं। छाल का प्रयोग पीलिया, तिल्ली, पथरी, जलन, कुष्ठ तथा अन्य चर्म रोगों में किया जाता है। मेंहदी के चूर्ण में जरा सा नीबू का रस मिलाकर हाथ एवं पैरों के नाखूनों पर इसका लेप करने से नाखूनों का खुरदरापन तो समाप्त होता ही है बल्कि उनमें चमक भी आ जाती है। मेंहदी के ताजे पत्तों को अच्छे से पीस कर पैरों, तलवों और हाथों में लगाने से उच्च रक्तचाप में फायदा मिलता है। सावन के महीने में मेंहदी की बिक्री बढ़ जाती है।

जितना तेजी से मेंहदी लगाने का प्रचलन बढ़ा है उतनी तेजी से मेंहदी में अन्य घातक वस्तुओं के मिलावट के मामले भी सामने आते रहते हैं। बाजार में मिलने वाली मेंहदी में कई खतरनाक रसायन रंग गाढ़ा करने के लिए मिलाए जाते हैं। इसमें मौजूद पीएच एसिड बहुत खतरनाक माना गया है। काली मेंहदी, प्राकृतिक मेंहदी या हर्बल मेंहदी में भी पीपीडी तत्व होता है; क्योंकि इसके बिना मेंहदी बनाना संभव ही नहीं। बाजार में मिलने वाली अधिकतर मेंहदी सिंथेटिक ही होती है। जिसके लगाने से त्वचा में जलन, सूजन, खुजली आदि संक्रमण के लक्षण दिखाई देते हैं।

भारतीय शैली के मेंहदी नमूनों में फूल-पत्ते, घुमावदार पैटर्न, मोर आदि खूबसूरती से बनाए जाते हैं। अरेबिक मेंहदी में अधिकतर सजावटी आउट लाइन को उपयोग में लाया जाता है। अरेबिक के डिजाइन मोटे होते हैं और लोगों में पसंद किए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त पाकिस्तानी मेंहदी के ज्यामितीय आकार तथा फूलों के आकार भी दिखाई देते हैं। मध्यपूर्व देशों में मोरक्कन के डिजाइन में मेंहदी के नमूने प्रचलित हैं। इस डिजाइन में त्रिकोन, चौकोर और गोलाकार आकारों का प्रयोग किया जाता है। दोनों हाथ में एक समान नमूने बनाना मोरक्कन मेंहदी की विशेषता है। मुगलाई नमूने कलाई तक ही बनाए जाते हैं। आधुनिक युग में मेंहदी में गिल्टर, मल्टी कलर जैसे मेंहदी के अनेक प्रकार देखने को मिलते हैं। राजस्थानी मेंहदी में राजकुमार व राजकुमारी बनाने का प्रचलन है। आधुनिक युग में ज्वैलरी तथा बटरफ्लाई बेहद लोकप्रिय हैं।

आजकल लड़कियों और महिलाओं में टैटू जैसी रचना भी खूब प्रचलन में है। कंधों, आगे की गर्दन, पीठ के पिछले भाग तथा बाजू पर भी अपनी पसंद के खूबसूरत टैंटू बनवा सकते हैं। पैरों, टखनों तथा पिंडली में भी टैटू बनवाने का प्रचलन है। टैटू चित्रकारी देखने में काफी रोमांटिक लगती है। टैंटू हमेशा पेशेवर कलाकार से ही बनवाना चाहिए। टैटू की लोकप्रियता का कारण यह भी है कि इसे गोदना नहीं पड़ता। मेंहदी से बनने वाले टैटू में दर्द नहीं होता। अपने प्यार व उसकी पसंद का टैटू भी बनवाया जा सकता है।

मेंहदी के चलन व क्रेज से बालीवुड भी अछूता नहीं है। बालीवुड में मेंहदी लगाने में सबसे बड़ा और प्रसिद्ध नाम वीना नागदा का है। सबसे तेज मेंहदी लगाने का खिताब भी वे अपने नाम कर चुकी हैं। मुंबई में मेंहदी का व्यावसायिक पाठ्यक्रम सिखाने के लिए इनका अपना संस्थान है। केवल भारत में नहीं बल्कि विदेशों में इनकी काफी मांग है। इनकी पहली सेलिब्रेटी पूनम ढिल्लों थीं, लेकिन उनको पहचान मिली थी ॠतिक रोशन की शादी से। आज तो बालीवुड में यह एक जाना पहचाना नाम है, और हर सेलिबेटी की पहली पसंद है।

आजकल बड़े पैमाने पर मेंहदी प्रतियोगिताओं का आयोजन कॉलेज स्तर पर भी होने लगा है। समय-समय पर राज्य स्तरों पर भी मेंहदी प्रतियोगिताओं के अनेक आयोजन संचालित किए जाते हैं।

 

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