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जूतें-चप्पल केवल हमारे पैरों की सुरक्षा ही नहीं करते, वे फैशन में भी शुमार हो गए हैं। दिन और परिधानों के अनुसार अलग-अलग रंगों, डिजाइनों में ये उपलब्ध हैं। लेकिन यह ध्यान रहें, ये आरामदायी हों, अनावश्यक ऐंठन पैदा करने वाले न हो। फैशन का माने सेहत से खिलवाड़ नहीं है।

फुटवेयर पैरों में पहनने की एक ऐसी वस्तु है, जिसका उद्देश्य भागने, दौड़ने और चलने जैसी विभिन्न गतिविधियां करते समय धूल, मिट्ठी, ठंड, गर्मी से मानव के पैरों की रक्षा करना और उन्हें आराम पहुंचाना है। परंतु समय के साथ इसके स्वरूप में काफी बदलाव हुआ है। अब इसका उपयोग न केवल पैरों की सुरक्षा करना बल्कि आपकी खूबसूरती में चार-चांद लगाने, आपको फैशनेबल बनाने के लिए किया जाने लगा। एक वाक्य में कहें तो फुटवेयर आज फैशन स्टेटमेंट, एक ट्रेंड बन चुका है।

मनुष्य की बुनियादी जरूरतें रोटी, कपड़ा और मकान में फुटवेयर भी शामिल कर लिया जाए तो गलत नहीं होगा। फुटवेयर हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसके बिना हम अपना जीवन सोच ही नहीं सकते। समय-समय पर तथा एक संस्कृति से दूसरी संस्कृति तक फुटवेयर के कलर, डिजाइन एवं रंग-रूप में अत्यधिक बदलाव हआ है। फैशन ने अक्सर कई डिजाइनों को निर्धारित किया है, जैसे एडी बहुत ही ऊंची या समतल। मूल सैंडल में केवल एक पतला तला और सामान्य पट्टा शामिल था। पारंपरिक रूप से जूतें चमड़ा, लकड़ी या कैनवास से बनाए जाते थे; लेकिन बाद में रबड़, प्लास्टिक और अन्य पेट्रो-रसायनों से निर्मित सामग्री से बनाए जाने लगे हैं।

सदी के अंत से रबड़, प्लास्टिक, सिंथेटिक कपड़ा और औद्योगिक उत्पादों के क्षेत्र में प्रगति ने निर्माताओं को फुटवेयर निर्माण में कई अवसर प्रदान किए। पहले चमड़ा मूल सामग्री हुआ करता था; अब महंगे से महंगे जूतों में मानक रह गया है। खेलकूद वाले जूतों में या तो असली चमड़ा होता ही नहीं और हुआ भी तो बहुत कम होता है। तले जो पहले काफी परिश्रम के साथ हाथ से सिले जाते थे अब बहुधा मशीन से सिले जाते हैं या सिर्फ चिपकाए जाते हैं। जूते के आकार की इकाइयां दुनियाभर में व्यापक रूप से भिन्न हैं यूरोपीय आकार पेरिस पाइंट में मापे जाते हैं, जो दो-तिहाई सेंटीमीटर के बराबर है। ब्रिटेन और अमेरिका की इकाइयां लगभग एक चौथाई इंच है। पुरुषों एवं महिलाओं के जूतों के आकारों के अक्सर अलग-अलग पैमाने हैं।

आज के दौर में फुटवेयर फैशन स्टेटमेंट है, जो हर त्यौहार, भारतीय परिधान, विदेशी परिधान, मौसम और पेशे के हिसाब से बदलता रहता है। हर किसी के पास कई रंगों, पैटर्न और डिजाइन के जूतें-चप्पलें होती हैं। ऑफिस जाने के लिए अलग, जॉगिग के लिए अलग, जिम के लिए अलग फुटवेयर। जरूरत के हिसाब से फुटवेयर में बदलाव करते रहते हैं। पुरूषों के जूतों को उनके बंद किए जाने के प्रकार द्वारा वर्गीकृत किया जा सकता है-

• *ऑक्सफोर्ड्स (जिन्हें बैल्मोरल्स भी कहा जाता है): ऊपरी भाग में वी-आकार की दरार होती है, जिसमें फीतें लगे होते हैं। इसलिए इन्हें फीतेवाले बंद जूते भी कहते हैं।

*• ब्लूचर (अमेरिकी) डर्बीज (ब्रिटिश): ऊपरी भाग स्वतंत्र रूप से जुड़े दो चमडे के टुकड़ों में फीतें बांधे जाते हैं, जिन्हें खुले फीते भी कहा जाता है।

*• साधु पट्टियां : फीतों के स्थान पर एक बकसुआ और पट्टी होती है।

•* बिना फीते के जूतें: इनमें किसी प्रकार के फीतें या बंधन नहीं होते। लोकप्रिय लोफर्स तथा बगल में इलास्टिक वाले जूतें इस वर्ग में आते हैं।

• *सामान्य जूतें: आकर्षक रूप, रंग तथा ऊपरी भाग पर कोई अतिरिक्त सजावट नहीं होती।

• *आवृत्त जूतें: जूते को आवृत्त करती चमड़े की एक अतिरिक्त परत यह सर्वाधिक लोकप्रिय सजावट है।

•* ब्रेग्स (अमेरिकी विंग-टिप्स): जूतें पर एक छिद्रयुक्त पट्टी विंग-टिप से आवृत्त होता है, जो जूते के दोनों ओर नीचे तक जाती है। यह बे्रग्स बैल्मोरल और ब्लूचर दोनों प्रकार में पाया जाता है।

यह बात हुई फॉर्मल श्ाूज की। इसके अलावा स्पोर्ट्स श्ाूज भी काफी लोकप्रिय हैं। हर वर्ग के लिए नाइकी, एडीडास, प्यूमा, रीबॉक, ली कूपर, रेड टेप, फीला, एक्शन, बाटा, स्पार्क, पैरागॉन जैसे कई स्पोर्ट्स ब्रांड हैं, जो पुरूषों के साथ-साथ महिलाओं के बदलते फैशन का ख्याल रखते हैं। महिलाओं के लिए जूतों की एक विशाल विविधता उपलब्ध है। कुछ प्रसिद्ध और स्टाइलिश फुटवेयर इस प्रकार हैं-

*• ऊंची एडी की जूतियां (हाई हिल्स): वे जूतियां जिनको पहनने से एडी ऊंची उठ जाती है। आम तौर पर पंजों से 2 इंच (5 सेमी) या अधिक ऊंची होती हैं। ये जूतियां महिलाओं द्वारा औपचारिक समारोहों में या सामाजिक आयोजनों में पहनी जाती हैं। इनके भिन्न रूपों में किटन हील्स (आम तौर पर डेढ़-दो इंच ऊंची) तथा स्टिलेटो हील्स (बहुत संकरी एड़ी) और वेज हील्स (एड़ी स्तंभ के स्थान पर खूंटे के आकार का तल) शामिल हैं। ये ज्यादातर फॉर्मल मौकों पर पहनी जाती हैं।

*• स्नीकर बूट या स्नीकर पंप: एक जूता जो स्पोर्ट्स शूज जैसा दिखाई देता है लेकिन उसमें एड़ी लगी होती है जो उसे एक नया फॉर्मल शूज बना देता है।

*• म्यूल्स: वे जूतें या चप्पल जिनमें एड़ी के चारों ओर कोई सामान नहीं लगा होता। अक्सर स्कर्ट्स के साथ पहने जाते हैं। इस जूतों को बैकलेज श्ाूज भी कहा जाता है।

*• स्लिंगबैक: वे जूते हैं जिनको पैर के ऊपर बांधने की बजाय एड़ी के पीछे एक पट्टे द्वारा बांधा जाता है। इन्हें स्कर्ट, जींस और फॉर्मल पैंट्स के साथ पहना जा सकता है।

•* बैले फ्लैट्स: ब्रिटेन में बैलेरिनाज, बैले पंप या स्किमर्स के नाम से जाना जाता है। वे जूतें हैं जिनमें एड़ी बहुत नीची तथा ऊपरी भाग अपेक्षाकृत छोटा होता है, जिसमें पैर के ऊपर का अधिकांश हिस्सा दिखाई देता है ये गर्म मौसम में पहनने के लिए लोकप्रिय है और ऊंची एड़ी के जूतों की तुलना में अधिक आरामदायक माने जाते है। इन्हें कैजुअल और फॉर्मल दोनों ही मौकों पर पहना जा सकता है।

*• कोर्ट जूतें: अमेरिका में पंप्स के नाम से जाने जाते हैं और ये आम तौर से ऊंची एड़ी के बिना फीते के जूते हैं। इनका लुक बेली जैसा होता है मगर इनकी हील्स इन्हें अलग बनाती है। ज्यादातर फॉर्मल कपड़ों के साथ पहना जाता है।

ऐसे करें फुटवेयर का चुनाव

इन दिनों फ्लैट फुटवेयर फैशन में हैं। कॉलेज गर्ल और वर्किंग वुमेन कम्फर्ट के लिहाज से फ्लैट फुटवेयर पहनना पसंद करती हैं। अभी तक यह माना जाता रहा है कि हाई हील सैंडिल पहनने से पैरों में दर्द हो सकता है पर बिल्कुल फ्लैट चप्पलें पहनने से भी पैरों में दर्द हो सकता है। इनको चुनने में अगर आप जरा सा भी चूकते हैं तो यह आपको नुकसान पहुंचा सकती है। अगर आपने गलत साइज की चप्पल खरीद ली जो आपके पैरों में बहुत कसी हुई रहती है तो वह आपके नाखूनों में दर्द पैदा करती है और यही दर्द बाद में इन्फेक्शन भी बन सकती है। नाखूनों से ये इन्फेक्शन हड्डियों तक चला जाता है। कुछ चप्पलों के सोल काफी मोटे और कठोर होते हैं। कुछ चप्पलें काफी फ्लैट और उनका मटेरियल काफी कड़ा होता है। दिखने में तो आकर्षक होती हैं पर आपके पैरों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसलिए फुटवेयर खरीदते समय हर लिहाज से सोचना चाहिए। इनको चुनने में आप चूकते हैं तो यह परेशानी का सबब बन सकता है।

अगर आप स्लीपर लंबे समय तक पहनते हैं तो इसका असर आपके पैर के अंगूठे पर पड़ता है। इससे पैर के अंगूठे और उंगलियों के बीच गैप बढ़ता है। जिससे पैरों की मसल्स को नुकसान हो सकता है। इसके अलावा चप्पल की ग्रिप बनाने के लिए अंगूठे पर दबाव पड़ता है। उससे इंफेक्शन की समस्या हो सकती है जिससे पैर मुड़ने या दर्द होने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए ध्यान रखें कि जो चप्पल आप खरीद रहे हैं उसका सोल मोटा, नरम और आरामदायक हो या फिर सोल के बीच का भाग उठा हुआ हो। स्ट्रैपवाली चप्पलें न पहनें। इससे एडियों पर दबाव पड़ता है।

अच्छी ब्रांड की चप्पलें ही खरीदें। हालांकि वे काफी महंगी होती हैं पर अब कई सारे ब्रांड अपने प्रोडक्ट पर काफी ऑफर्स या सेल रखते हैं जिससे आपके बजट में अच्छे फुटवेयर्स मिल सकते हैं। कई सारे सस्ते फुटवेयर्स लेने से अच्छा है एक या दो ब्रांडेड फुटवेयर्स लें। ऐसा करने से आप अपने पैरों को आराम देंगी और जीवनभर के दर्द, इंनफेक्शन और दवाइयों लेने से निजात पा सकती हैं. बाद में पछताने से अच्छा पहले से ध्यान दिया जाए।

दर्द के बिना हाई हील्स पहनें

ऊंची एडी के जूतों के कारण घुटने, टखने, हिप्स और पीठ में तकलीफ होती है। हाई हील्स पहनना आसान नहीं होता फिर भी महिलाएं उन्हें पहनना बंद नहीं करतीं। लेकिन, इस बात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि हाई हील्स आपके पैरों को नुकसान पहुंचा सकती है। हाई हील्स पहनने पर आपका वजन शरीर के आगे की ओर बढ़ जाता है जिससे आपके घुटनों, टखनों, एंकल्स, हिप्स और पीठ को नुकसान होता है। हालांकि अगर आप कुछ बातों का ध्यान रखें तो सुरक्षित रूप से हाई हील्स पहन सकती हैं। फुटवेयर खरीदते समय तीन बातों का ध्यान दें झटका, फिटिंग और पैरों के बीच वाले हिस्से में सपोर्ट देनेवाले जूते हो। अच्छी तरह से आरामदायक जूतें होने चाहिए। हमेशा ऐसे जूतें खरीदें जिनकी हील 2 इंच या उससे कम हो। प्लेटफॉर्म हील्स या वेजेस खरीदे।

अगर आपको पूरे दिन चलना है तो स्टिलेट्स ना पहनें। हफ्ते के अलग-अलग दिनों में अलग-अलग तरह के जूते पहनें। इससे आपकी मांसपशियों में तनाव महसूस नहीं होगा। शरीर के अन्य किसी अकेले अंग की तुलना में पैर में अधिक हड्डियां होती हैं। इसलिए हमारी छोटी सी गलती के कारण बड़े खतरे का सामना करना पड़ सकता है। यदि आप हर दिन ऊंची एडी के जूतें पहन रही हैं तो आपके पैरों को स्थायी रूप से नुकसान हो सकता है। आपके शरीर पर पड़ने वाले तनाव को दूर करने के लिए आपको स्ट्रेचिंग करना चाहिए।

कैसे रखें सेहत का ख्याल

जिन लोगों को फुटवेयर्स खरीदने को शौक होता है, उनके कलेक्शन में हर वैरायटी के जूते, चप्पल, सैंडल आदि शामिल होते हैं। फुटवेयर सिर्फ हमें लुक ही नहीं देते हैं बल्कि हमारे स्वास्थ्य की भी रक्षा करते हैं। कई शोधों में यह स्पष्ट हो चुका है कि स्वास्थ्य के लिए लाभदायक फुटवेयर्स को हमेशा अधिक प्राथमिकता दी जानी चाहिए। शरीर और दिमाग को दुरूस्त रखने की श्ाुरूआत पैरों से की जा सकती है। स्वस्थ रहने के लिए जरूरी है कि सुविधाजनक फुटवेयर्स पहने जाए। ऊर्जा का स्तर बढ़ाने के लिए फुटवेयर में तकनीक एवं एडवांस्ड फुट बायोमैकेनिक्स का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। फुटवेयर तनाव को दूर भगाते हैं। मेमोरी फोम तकनीक वाले फुटवेयर्स पैरों को थकने से बचाते हैं। कई रंगों व डिजाइन में आनेवाले इन फुटवेयर्स का फैशन बहुत जल्दी बदलता है।

आजकल बिना मोजे के जूते पहनने का फैशन काफी ट्रेंड में है। कुछ लोगों को मोजों के साथ जूतें पहनना नहीं पसंद आता। भले ही ये आजकल एक ट्रेंड के रूप में है; लेकिन सच यह है कि ऐसा फैशन आपकी सेहत के लिए बिल्कुल अच्छा नहीं है। बिना मोजे के जूते पहनना आपके त्वचा के साथ ही सेहत को भी नुकसान पहुंचाते हैं। मोजे के बगैर सिर्फ जूता पहनने से पैरों से निकलने वाला पसीना जूते के चमडे में पहुंचता है। इससे चमड़े में बैक्टीरिया पनपने लगते हैं। इस स्थिति में यदि उच्च नमी भी मिल जाए तो पैरों में न सिर्फ दुर्गंध पैदा होती है, बल्कि फफूंद का संक्रमण भी हो जाता है। इस संक्रमण से पैरों में खुजली और बिवाई फटने जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इस कारण पैरों की दाद जैसी बीमारी की समस्या बढ़ सकती हैं।

इंफेक्शन से बचने के लिए कुछ टिप्स अपना सकते हैं। इसमें रातभर जूतों में टी-बैग्स रखें। ये जूतें में मौजूद पसीने को सोख लेते हैं। अपने पैरों में एंटीपर्सपिरेंट का स्प्रेे करें ताकि पसीने को नियंत्रित कर सकें। विशेषज्ञों के मुताबिक एक ही श्ाूज का उपयोग रोज ना करें। अपने जूतों और मौजों को साफ रखें। हर रोज मोजे को धोएं और हमेशा ऐसे मोजे का उपयोग करें जो पैरों में होने वाले पसीने को सोख लें। कपड़े के जूतों को समय-समय पर धोना जरूरी है। चमड़े के जूतों को थोड़ी देर धूप में रखें। जूतों के अंदर थोड़ा सा बेकिंग सोडा डालें जिससे जूतों से दुर्गंध ना आए। अपने पैरों को रोज नहाने के बाद आधे घंटे तक हल्के गर्म पानी में नमक डालकर रखें, फिर नर्म व साफ तौलिए से पोंछ कर मोजे पहनें। नमक का पानी त्वचा को श्ाुष्क बनाता है और पसीना आने से रोकता है जिससे पैरों में बदबू नहीं आती। कभी-कभी नए जूते, चप्पल पहनने पर पैरों में छाले हो सकते हैं। उस दर्द से राहत पाने के लिए उस जगह पर बर्फ के टुकडे रगडें। छालों से बचने के लिए नए जूतों या चप्पल पहनने से पहने रात में फुटवेयर के अंदर कोनों में नारियल का तेल डालकर रख दें। सुबह इन्हें पहनें। छाले होने का खतरा कम होगा।

ऐसे करें फुटवेयर का रखरखाव

जब पहने लेदर शूज लेदर के जूतों का रखरखाव थोड़ा कठिन होता है पर ध्यान दिया जाए तो इन्हें सहेज कर रखा जा सकता है।

चुनें सही पॉलिश: इन जूतों पर कभी भी लिक्विड बेस पॉलिश का इस्तेमाल ना करें। इन्हें साफ करने के लिए वैक्स बेस पॉलिश का इस्तेमाल करें।

शू रैक में रखें: इनको हमेशा बंदशूज रैक में रखें। इससे उनकी चमक लंबे समय तक बरकरार रहती है।

इनसे बचाएं: इनको बारिश के दिनों में पहनने से बचें। अगर पहनना ही पड़ें तो अलसी के तेल से कोटिंग कर सकते हैं। इन्हें हमेशा पानी, धूल और नमी से बचाकर रखें।

ना बदले इनकी साइज: इन्हें पहनने के बाद हमेशा बॉक्स में रखें। इनके लिए शू -ट्री का उपयोग भी कर सकते हैं, जो पैर के पंजे की तरह होते हैं और इनसे जूते का साइज बना रहता है।

 

 

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