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नन्हें शुभम ने रूआंसे होकर पूछा-“मम्मी सबके पापा साथ रहते हैं फिर मेरे क्यों नहीं ?”

उसका प्रश्न सुनकर संगीता की आँखें भर आई थी पर आँसू गिराकर वह बच्चे के सामने स्वयं को कमजोर नहीं दिखाना चाहती थी,यदि वही हिम्मत हार गई तो बच्चे की परवरिश किस तरह कर पाएगी, अभी तो वह बच्चा है उसे पाल-पोस कर सुदर्शन युवक बनाना है | उसे बहलाते हुए संगीता ने उत्तर दिया ” बेटा,इस दुनिया में कई तरह के बच्चे होते हैं, कुछ के मम्मी-पापा दोनों साथ रहते हैं, कुछ के सिर्फ मम्मी या पापा कोई एक साथ रहते हैं, और तुम तो बहुत लकी हो कि तुम्हारी मम्मी साथ है,इस दुनिया में कई बच्चे तो ऐसे हैं जिनके मम्मी-पापा दोनों नहीं होते |

शुभम को यह बात सुनकर धैर्य हुआ कि उसकी मम्मी तो उसके साथ है और उसका इतना ख्याल भी रखती है |

संगीता ने किसी तरह उसके प्रश्न का जवाब तो दे दिया पर सिंगल पेरेंटिंग करते-करते वह कई बार अवसाद से घिर जाती है,वह सब ठीक तो कर रही है ना? ऐसा न हो शुभम के बचपन में किसी बात की कमी रह जाए जो उसे उम्र भर सालती रहे | यदि वह अकेली भी है फिर भी शुभम के बचपन को सम्पन्न करना चाहती थी | न जाने कितने सिंगल माता या पिता इसी दुविधा से गुजरते हैं, उन्हें सिंगल पेरेंटिंग की राह में आने वाली मुसीबतों से दो-दो हाथ करना पड़ता है, पर किसी भी परेशानी का कोई तो समाधान है-

बच्चों को रचनात्मक कार्यों में व्यस्त रखें –

आपके बच्चे की जो भी हॉबी हो उसे पहचाने और उसके अनुसार सामग्री लाकर उसे कुछ बनाने के लिए उत्साहित करें| क्रियेटिव रहने से बच्चों में किसी प्रकार की हीन भावना नहीं आ पाएगी |

बहुत अधिक लाड़-प्यार भी उचित नहीं

बच्चों को इस बात का हमेशा अहसास रहना चाहिए की आप उनको निस्वार्थ प्रेम करते हैं,पर अति लाड़-प्यार से उनको बिगाड़िए मत, बच्चों को स्वयं के कार्य करने के लिए प्रेरित कीजिए, उन्हें अनुशासन में रखिए|

स्कूल की पैरेंटस मीटिंग में उपस्थित रहें

आप सिंगल पेरेंट हैं तो कई काम होते हैं पर आपका बच्चा ही आपके लिए प्रमुख होने चाहिए,हो सके तो सभी पैरेंटस मीटिंग मेॆ जाईए और बच्चे की प्रगति के विषय में टीचर्स से चर्चा कीजिए, बच्चे के स्वभाव के बारे में उन्हें बताईए ,इस तरह आप बच्चे के विकास में टीचर्स का भी सहयोग लेंगे |

बच्चे को किसी ऐसे परिवार से मिलवाईए जिसमें सिंगल पेरेंट है-

ऐसे परिवार से मिलकर बच्चे को लगेगा मुझ जैसे और भी बच्चे हैं | वह समाज में इस तरह के पेरेंट से मिलकर खुशी का अनुभव करेगा|

सामाजिक सवालों के जवाब के लिए तैयार होना-

यदि आप सिंगल पेरेंट हैं तो कई बार आपसे सामाजिक कार्यक्रमों में कुछ अजीब से सवाल पूछे जा सकते हैं जो आपके पार्टनर या बच्चे के सम्बंध में होते हैं,सच पूछो तो इस तरह के प्रश्न पूछना बहुत गलत है,पर यदि कोई पूछता है तो उतना करारा जवाब भी देना आना चाहिए |

सिंगल पेरेंटिंग की राहें कठिन है पर थोड़ी सी कोशिश से आप आसान बना सकते हैं | माता और पिता दोनों बनकर बच्चे का मार्गदर्शन कर सकते हैं |

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