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एक्सप्रेस-वे बनने से देश का आर्थिक विकास गतिशील होगा। क्योंकि इन एक्सप्रेस-वे के कारण दूर का सफर जल्द तय होगा, इससे ईंधन और समय की बचत होगी।

केन्द्रीय सड़क परिवहन, राजमार्ग एवं जहाजरानी मंत्री नितिन गडकरी ने तीन साल में सड़क को एक नई दिशा दी है। २०१४ में राष्ट्रीय राजमार्ग की लम्बाई ९७ हजार किमी थी, जो १ लाख ७५ हजार किमी पहुंच गई है। तीन किमी प्रतिदिन के हिसाब से सड़क बनाने की रफ्तार २३ किमी हो गई है। रो-पोर्ट-रेल सम्पर्क को बढ़ाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठा चुके नितिन गडकरी ने अब सड़क हादसों में कमी लाने की मुहिम तेज कर दी है। उनकी यह पहल सड़क पर चलते हुए मंडराते खतरे को कम करेगा।

देश में सड़क निर्माण कार्य में गति आई है। राष्ट्रीय राजमार्गों को उन इलाकों से जोड़ा जा रहा है, जहां सम्पर्क की कमी है। एक्सप्रेस-वे बनाए जा रहे हैं, जो देश में आवागमन की रफ्तार को बढ़ाएंगे। देश में १२ एक्सप्रेस-वे बनाने की योजना है। नितिन गडकरी का मानना है कि एक्सप्रेस-वे बनने से देश का आर्थिक विकास गतिशील होगा। क्योंकि इन एक्सप्रेस-वे के कारण दूर का सफर जल्द तय होगा, इससे ईंधन और समय की बचत होगी। दिल्ली-मेरठ के बीच एक्सप्रेस-वे का काम तेजी से हो रहा है। इसके बनने के बाद दिल्ली से मेरठ पहुंचने में अभी दो घंटे का लगने वाला समय ४० मिनट का हो जाएगा। इसे लखनऊ से जोड़ने की योजना है। इसके लिए नितिन गडकरी द्वारा खाका बना लिया गया है। दिल्ली से कटरा तक एक्सप्रेस-वे बनाने को लेकर भी पंजाब, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर सरकार के साथ लगातार बैठकें हो रही हैं। इस एक्सप्रेस-वे के बन जाने से सड़क मार्ग से दिल्ली से कटरा जाने में अभी जो १२ घंटे का समय लगता है, वह घटकर ६ घंटे हो जाएगा।

नितिन गडकरी ने जरुरत के हिसाब से बिना किसी तरह का भेदभाव किए राज्यों में राष्ट्रीय राजमार्ग की घोषणा की है। भारतमाला, सागरमाला और सेतु भारतम् परियोजना के जरिए नितिन गडकरी देश के सड़क परिवहन को नई दिशा में ले जा रहे हैं। भारत माला योजना में धर्मिक, पर्यटन और पिछड़े इलाकों की सड़कों को बनाया जाएगा। नितिन गडकरी का मानना है कि देश में अच्छी सड़क होने से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के साधन पैदा होंगे और पर्यटन क्षेत्र वाले इलाके का विकास होगा। सागरमाला परियोजना के अंतर्गत देश में नए पोर्ट निर्माण के साथ पुराने पोर्ट को आधुनिक किया जा रहा है। नितिन गडकरी सड़क के साथ जल परिवहन पर भी फोकस करके चल रहे हैं। उनकी योजना सड़क के ट्रैफिक को जल परिवहन में ले जाने की भी है, इसीलिए वाराणसी-हल्दिया के तत्काल बाद साहेबगंज-हल्दिया जल परिवहन को शुरु कराया। अब उनकी योजना जल परिवहन को इस तरह संचालित करने की है, जिसमें जलमार्ग से लोगों की आवाजाही बढ़ सके। सेतुभारतम्योजना से नितिन गडकरी हाइवे पर वाहनों के रुकने का झझंट खत्म कर रहे हैं। इस परियोजना से रेल ओवर ब्रिज और रेल अंडरपास बनाने का काम तेज गति से किया जा रहा है, जिससे हाइवे पर रेल फाटक के कारण वाहनों के रुकने की विवशता खत्म हो जाए और उनके गन्तव्य तक पहुंचने के समय में कमी आए।

नितिन गडकरी पूर्वोत्तर के राज्यों के सड़क विकास पर भी खास ध्यान दे रहे हैं। असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मिजोरम, मेघालय, त्रिपुरा, नागालैंड के बीच आपसी सड़क सम्पर्क को बेहतर करने का काम द्रुत गति से हो रहा है। जम्मू-कश्मीर में हर साल सर्दी और बरसात में जाम लगने की समस्या पैदा हो जाती है। नितिन गडकरी ने इसके निदान के लिए ठोस प्रयास किया है। जम्मू-श्रीनगर के बीच दूरी कम करने के साथ ही जाम की समस्या खत्म हो गई है, साढ़े ९ किमी. लम्बी चेनाना-नाशरी सुरंग के कारण जहां दोनों इलाकों के बीच पहुंचने का साढ़े तीन घंटे का समय कम हुआ है, वहीं इसी मार्ग पर निर्माणाधीन तीन और सुरंग मार्ग के बन जाने से श्रीनगर पहुंचना बहुत आसान हो जाएगा। असम-अरुणाचल के बीच लोहिद नदी की बाधा भी खत्म हो गई है। सवा ९ किमी. का देश का सबसे बड़ा ढोला-सदिया ब्रिज बनाकर नितिन गडकरी ने अरुणाचल प्रदेश पहुंचने का रास्ता सुगम कर दिया है। तिनसुकिया जिले से सदिया कस्बे को जोड़ने वाले ब्रिज से साढ़े ६ घंटे का सफर ३० मिनट में पूरा होने लगा है। लेह-लद्दाख में जोजिला सुरंग मार्ग बन रहा है। इसके बनने के बाद कश्मीर और उससे आगे तक पर्यटकों का पहुंचना आसान हो जाएगा।

नितिन गडकरी सिर्फ सड़क ही नहीं बना रहे, बल्कि उन सड़कों पर चलने वाले लोगों की सुरक्षा की भी चिंता लेकर चल रहे हैं। देश में ७२६ ऐसी जगह चिन्हित कर उन्हें सुधारने का काम किया जा रहा है, जहां अक्सर दुर्घटना होने के कारण मौत हो रही है। इसके अलावा भविष्य में सड़क यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए कई नियमों में बदलाव किया है, जिसमें सबसे महत्वपूर्ण है ड्रायविंग लायसेंस की प्रक्रिया में परिवर्तन। नए मोटर वेहिकल एक्ट पारित होने के बाद अब ड्रायविंग लायसेंस बनवाना आसान नहीं होगा। लायसेंस तभी बनेगा जब कम्प्यूटर पास करेगा। चालक के लायसेंस की परीक्षा कम्प्यूटर द्वारा ली जाएगी और उसके पास करने के बाद ही वाहन चलाने का लायसेंस मिल पाएगा। इस प्रक्रिया से लायसेंस बनाने में वर्षों से चल रहे भ्रष्टाचार पर भी रोक लगेगी। सड़क सुरक्षा को लेकर जन जागरुकता के लिए व्यापक स्तर पर काम हो रहा है। यह कहना गलत नहीं होगा कि पिछले तीन साल में नितिन गडकरी ने नए विजन के साथ सड़क विकास का काम शुरु किया है, जिसके परिणाम सामने आने लगे हैं। इस क्षेत्र में जिस गति से काम चल रहा है, उससे स्पष्ट है कि पांच साल में राष्ट्रीय राजमार्ग को दो लाख किमी करने का लक्ष्य असंभव नहीं है।

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