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२०१६ में अच्छे मानसून और सरकार की नीतिगत पहल के कारण देश में खाद्यान्न का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है। वर्ष २०१६-१७ के लिए दूसरे अग्रिम आकलन के अनुसार देश में कुल २७१.९८ मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन का अनुमान लगाया गया है।

केंद्र की भाजपानीत राजग सरकार पांच सालों में किसानों की आमदनी दोगुनी करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसीलिए इस बार के बजट में कृषि के समग्र विकास पर फोकस किया गया है जिसमें किसानों को वहन करने योग्य कर्ज उपलब्ध कराने, बीजों और उर्वरकों की सुनिश्चित आपूर्ति, सिंचाई सुविधाएं बढ़ाने, मृदा स्वास्थ्य कार्ड के माध्यम से उत्पादकता में सुधार लाने, ई-नैम के माध्यम से एक सुनिश्चित बाजार और लाभकारी मूल्य दिलाने पर जोर दिया गया है। यह बात भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद सोसायटी की ८८वीं वार्षिक आम बैठक में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधामोहन सिंह ने कही।

राधामोहन सिंह ने कहा कि कृषि की बेहतरी और किसानों की खुशहाली के लिए सरकार ने बजट में कई पहल की है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बजट में वर्ष २०१७-१८ के लिए ग्रामीण, कृषि और सम्बद्ध सेक्टर के लिए २४ प्रतिशत की बढ़ोतरी करते हुए इसे रूपये १,८७,२२३ करोड़ किया गया है। आगामी वित्तीय वर्ष में कृषि क्षेत्र की प्रगति दर ४.१ प्रतिशत रहने का अनुमान है।

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि वर्ष २०१६ में अच्छे मानसून और सरकार की नीतिगत पहल के कारण देश में खाद्यान्न का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है। वर्ष २०१६-१७ के लिए दूसरे अग्रिम आकलन के अनुसार देश में कुल २७१.९८ मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन का अनुमान लगाया गया है जो वर्ष २०१३-१४ में हासिल २६५.०४ मिलियन टन खाद्यान्न के पिछले रिकॉर्ड उत्पादन की तुलना में ६.९४ मिलियन टन ज्यादा है एवं पिछले वर्ष २०१५-१६ के मुकाबले वर्तमान वर्ष २०१६-१७ का उत्पादन उल्लेखनीय रूप से २०.४१ मिलियन टन ज्यादा है।

राधामोहन सिंह ने कहा कि इस बार रबी में पिछले साल २०१५-१६ की तुलना में गेहूं में ७.७१ प्रतिशत, दलहन में १२.९६ प्रतिशत और तिलहन में १०.६५ प्रतिशत ज्यादा बुआई हुई है जो कि सभी फसलों को मिलाकर पिछले वर्ष की तुलना में ६.८६ प्रतिशत ज्यादा बुआई है।

राधामोहन सिंह ने कहा कि भारतीय कृषि वैज्ञानिकों ने अनुसंधान एवं प्रौद्योगिकी विकास करके हरित क्रांति लाने और उत्तरोत्तर कृषि विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वर्ष १९५१ से लेकर अब तक देश के खाद्यान्न उत्पादन में लगभग ५ गुना, बागवानी उत्पादन में ९.५ गुना, मत्स्य उत्पादन में १२.५ गुना, दूध उत्पादन में ७.८ गुना और अंडा उत्पादन में ३९ गुना की वृद्धि हुई है। इसका राष्ट्रीय खाद्य व पोषण सुरक्षा पर उल्लेखनीय प्रभाव पड़ा है। हमारे वैज्ञानिकों ने उच्चतर कृषि शिक्षा की उत्कृष्टता बढ़ाने में भी उल्लेखनीय भूमिका निभाई है।

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय दलहन वर्ष २०१६ में देशभर में दलहन के १५० बीज हब स्थापित किए गए हैं। सबसे पहले परिपक्व होने वाली मूंग की किस्म ‘आईपीएम २०५-७ (विराट)’ को खेती के लिए जारी किया गया। कृषि क्षेत्र में अनुसंधान को प्रोत्साहन देने के प्रयासों में पिछले ढाई वर्ष में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। वर्ष २०१२ से मई २०१४ तक जहां विभिन्न फसलों की कुल २६१ नई किस्में जारी की गई थीं, वहीं लगभग इतनी ही अवधि, जून, २०१४ से दिसम्बर, २०१६ में कुल ४३७ नई किस्में जारी की गई हैं।

कृषि के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने की दिशा में अक्टूबर २०१६ में नई दिल्ली में समन्वय इकाई के साथ कृषि में ब्रिक्स अनुसंधान प्लेटफार्म की स्थापना करने के लिए एक समझौता किया गया। इस इकाई का प्रबंधन डेयर, भारत सरकार द्वारा किया जाएगा। इसके अलावा, वर्ष २०१६ में १७ अंतर्राष्ट्रीय सहयोगात्मक परियोजनाओं को मंजूरी दी गई।

राधामोहन सिंह ने कहा कि कृषि चूंकि राज्य का विषय है इसलिए इसकी प्रगति में राज्यों के माननीय कृषि मंत्रियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। केंद्रीय कृषि मंत्री ने इस मौके पर प्रतिनिधियों से अपील की कि वे वैज्ञानिक-राज्य-किसान सम्पर्क विकसित करें और कृषि की प्रगति और किसानों की आमदनी व खुशहाली बढ़ाने की दिशा में केन्द्र के साथ मिलकर काम करें। साथ ही राधामोहन सिंह ने यह भी कहा कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने मुश्किल चुनौतियों के बावजूद ८७ साल के अपने अब तक के कार्यकाल में अनेक सफलताएं हासिल की हैं, जिन्हें कृषि की प्रगति में मील का पत्थर कहा जा सकता है। खेती बाड़ी में उत्पादकता और आय में वृद्धि, संस्थान निर्माण, मानव संसाधन, नई तकनीकों का विकास, कृषि विविधीकरण जैसे क्षेत्रों में आईसीएआर ने सफलता के नये प्रतिमान स्थापित किए हैं।

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