हिंदी विवेक : WE WORK FOR A BETTER WORLD...
एक तोता था मीठूराम। पिंजरा ही का घर था और वही उसकी दुनिया। मीठूराम की आवाज बड़ी अच्छी थी पर वह सिर्फ रात को ही गाता था।
एक रात जब मीठूराम गाना गा रहा था तो उधर से एक चमगादड़ निकला। चमगादड़ ने देखा कि मीठूराम की आवाज बहुत ही मीठी है तो उसने पूछा कि क्यों भई तुम्हारी आवाज इतनी मीठी है तो तुम सिर्फ रात को ही क्यों गाते हो?
मीठूराम ने इसकी वजह बताते हुए कहा कि एक बार जब मैं जंगल में दिन के समय गाना गा रहा था तो एक शिकारी उधर से निकला। उसने मेरी आवाज सुनी और उसी कारण उसने मुझे पकड़ लिया। तबसे अभी तक मैं इस पिंजरे में कैद हूं।
यह बताकर मीठूराम बोला कि इसके बाद से मैंने यह सीख लिया कि दिन में गाना मुसीबत का कारण बन सकता है और इसलिए अब मैं रात को ही गाता हूं। यह सुनकर चमगादड़ बोला कि मित्र यह तो तुम्हें पकड़े जाने से पहले सोचना चाहिए था।
सच भी है कि कई बार हम गलतियां करने के बाद ही उससे कुछ न कुछ सीखते हैं। पर जरूरी नहीं है कि हर बार सीखने के लिए गलती ही की जाए।
कई मर्तबा किसी काम को करने से पहले कुछ सावधानियां बरत कर हम गलतियों से बच सकते हैं और नुकसान से भी। तो याद रखिए बुद्धिमान वही होता है जो सोच-विचारकर काम करता है।  >

आपकी प्रतिक्रिया...

Close Menu
%d bloggers like this: