हिंदी विवेक : WE WORK FOR A BETTER WORLD...

मनोज जब रोजाना बस स्टैण्ड से गुजरता तो एक भिखारी को रोज देखता। वो भिखारी आते जाते लोगों के आगे हाथ जोड़ता और कुछ मांगने की कोशिश करता। मनोज उसे देखकर बड़ा दुःखी होता था।

वो भिखारी एक वृद्ध था। देखने में ऐसा लगता जैसे ना जाने कितने दिनों से भरपेट भोजन तक नहीं मिला लो। शरीर में सिर्फ हड्डियों का ढांचा रह गया था। जब भी कोई व्यक्ति उसके पास से गुजरता तो वो बड़ी आस से उसकी तरफ देखता।

एक दिन मनोज से उस वृद्ध की दशा देखी नहीं गयी उसने मन में सोचा कि हे ईश्वर इस भिखारी को अपने पास क्यों नहीं बुला लेता, कितनी दयनीय दशा हो गयी है इसकी। ऐसे ही सोचते हुए मनोज भिखारी के पास गया और बोला – बाबा मैं काफी समय से रोज आपको यहाँ बैठे हुए देखता हूँ , आपकी दशा इतनी खराब हो चुकी है फिर भी आप जीना क्यों चाहते हैं ?

क्यों रोजाना यहाँ भीख मांगते हैं? आप ईश्वर से प्रार्थना क्यों नहीं करते कि वह आपको अपने पास बुला ले।

भिखारी ने मुस्कुरा के मनोज की तरफ देखा और बोला – बेटा चाहता तो मैं भी यही हूँ कि जल्दी ही ईश्वर अपने पास बुला ले लेकिन शायद उसकी मर्जी कुछ और है वह मुझे यहीं तुम लोगों के बीच ही रखना चाहता है।

ताकि तुम लोग मुझे देख सको, मुझसे सीख सको कि एक दिन तुम लोगों का भी यही हश्र होगा। एक दिन तुम भी असहाय होंगे, आज मेरी दशा देख के लोगों का मन घृणा से भर जाता है लेकिन एक दिन तुम भी ऐसे ही हो जाओगे।

ये पैसा, सुंदरता, दुनिया के आडम्बर क्षण भर के हैं, सही ही तो कहा उस भिखारी ने एक दिन तुम भी ऐसे ही हो जाओगे। कड़वा सच है – बचपन, जवानी, बुढ़ापा इनको आप रोक नहीं सकते।

आप चाहे बच्चे हैं या जवान या बूढ़े, अपने कर्म अच्छे रखिये उस ईश्वर में विश्वास रखिये। जीवन यूँ तो दुखों से भरा पड़ा है लेकिन वो ऊपर वाला पालनहार है वो सबकी नैया पार लगाने वाला है। आनंदित होकर जियें , भरपूर जियें

 

आपकी प्रतिक्रिया...

Close Menu

विगत 6 वर्षों से देश में हो रहे आमूलाग्र और सशक्त परिवर्तनों के साक्षी होने का भाग्य हमें प्राप्त हुआ है। भ्रष्ट प्रशासन, दुर्लक्षित जनता और असुरक्षित राष्ट्र के रूप में निर्मित देश की प्रतिमा को सिर्फ 6 सालों में एक सामर्थ्यशाली राष्ट्र के रूप में प्रस्तुत करने में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की अभूतपूर्ण भूमिका रही है।

स्वंय के लिए और अपने परिजनों के लिए ग्रंथ का पंजियन करें!
ग्रंथ का मूल्य 500/-
प्रकाशन पूर्व मूल्य 400/- (30 नवम्बर 2019 तक)

पंजियन के लिए कृपया फोटो पर क्लिक करें

%d bloggers like this: