राष्ट्रऋषि नानाजी देशमुख

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सम्पूर्ण जीवन में अपनी देह को कष्ट दे देकर समाजजागरण करने वाले राष्ट्रऋषि नानाजी ने मृत्युपूर्व इच्छापत्र लिखकर अपनी मृत देह चिकित्सकीय अनुसंधान हेतु दधिची संस्थान हेतु दान कर दी थी। नानजी को पद्म विभूषण व भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया था। ये सभी सम्मान निश्चित ही हमारे राष्ट्र का उनके कृतित्व व व्यक्तित्व को कृतज्ञता ज्ञापन ही है, तथापि यह भी सत्य ही है कि उनके व्यक्तित्व को इन सम्मानों से नहीं मापा जा सकता है।

एकात्म मानववाद: तंत्र में मानवीय मंत्र स्थापना का सिद्धांत

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भारत को देश से बहुत अधिक आगे बढ़कर एक राष्ट्र के रूप में और इसके अंश के रूप में यहां के निवासियों को नागरिक नहीं अपितु परिवार सदस्य के रूप में मानने के विस्तृत दृष्टिकोण का अर्थ स्थापन यदि किसी राजनैतिक भाव या सिद्धांत में हो पाया है,

माई एहों पूत जण जेंहो दुर्गादास 

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भारतीय इतिहास में वीर शिरोमणि दुर्गादास के नाम को कभी परिचय की आवश्यकता नहीं रही. मारवाड़ के इस वीरपुत्र और मातृभूमि पर अपने सम्पूर्ण जीवन को न्यौछावर कर देने वाले जुझारू यौद्धा को केवल मारवाड़ की धरती और सम्पूर्ण देश में फैले राठौर बंधू ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण हिंदू समाज…

तुष्टिकरण की राजधानी में अब भाजपा सशक्त विपक्ष 

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बंगाल के राजनैतिक वातावरण के संदर्भ में ममता बनर्जी का पिछ्ला दस वर्षीय शासन का स्मरण आवश्यक हो जाता है. मुख्यमंत्री रहते हुए ममता बनर्जी ने बंगाल में हिंदुओं को अपमानित करने का कोई अवसर नहीं छोड़ा. वहां मुहर्रम के त्यौहार पर पश्चिम बंगाल के सबसे बड़े पर्व दुर्गा पूजा या नवरात्रि की बलि चढ़ा दी थी. मुहर्रम के लिए दुर्गा प्रतिमा विसर्जन की तिथियां बदल दी जाती थी।

भीम-मीम की राजनीति

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पाकिस्तान जाने का दुख उन्हें सालता रहा। पाकिस्तान के बहुसंख्यक मुस्लिमों के हाथों लाखों दलितों के नरसंहार का पश्चाताप उन्हें कचोटता रहा। पश्चाताप इसलिए, क्योंकि इनमें से बहुत से दलित परिवार उन्हीं की अपील पर पाकिस्तान का हिस्सा बनने को तैयार हुए थे।

संत रैदास- धर्मांतरण के आदि विरोधी, घर वापसी के सूत्रधार

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संत रैदास के नेतृत्व में उस समय समाज में ऐसा जागरण हुआ कि उन्होंने धर्मांतरण को न केवल रोक दिया बल्कि उस कठिनतम और चरम संघर्ष के दौर में मुस्लिम शासकों को खुली चुनौती देते हुए देश के अनेकों क्षेत्रों में धर्मांतरित हिन्दुओं की घर वापसी का कार्यक्रम भी जोरशोर से चलाया। धर्मांतरण के खतरों से आगाह कराने वाले वे पहले संत थे।

स्वामी विवेकानंद-एक अथक राष्ट्र पथिक

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जिस भारत को विश्व सोने की चिड़िया के रूप में पहचानता है, उसकी समृद्धि और ऐश्वर्य का आधार हिन्दू आध्यामिकता में निहित है।

धर्म तथा युगधर्म

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हम भारतीय उपभोक्ता जब इस दीपावली की खरीदी के लिए बाजार जाएंगे तो इस चिंतन के साथ स्थिति की गंभीरता पर गौर करें कि आपकी दीवाली की ठेठ पुराने समय से चली आ रही और आज के दौर में नई जन्मी दीपावली की आवश्यकताओं को चीनी औद्योगिक तंत्र ने किस प्रकार से समझ बूझकर आपकी हर जरुरत पर कब्जा जमा लिया है।  दिये, झालर, पटाखे, खिलौने, मोमबत्तियां, लाइटिंग, लक्ष्मी जी की मूर्तियां आदि से लेकर त्यौहारी कपड़ों तक सभी कुछ चीन हमारे बाजारों में उतार चुका है और हम इन्हें खरीद-खरीद कर शनैः शनैः एक नई आर्थिक गुलामी की ओर बढ़ रहे हैं।

प्रगतिशीलता ही हिंदुत्व का परमतत्व

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गणेशोत्सव का धार्मिक ही नहीं अपितु सामाजिक व राष्ट्रीय योगदान भी रहा है। अब हमारा वर्तमान दायित्व है कि हम इस उत्सव को कोरोना महामारी के विरुद्ध एक शस्त्र की तरह उपयोग करें व हिंदुत्व के परम प्रयोगवादी, प्रगतिवादी व परम प्रासंगिक रहने के सारस्वत भाव की और अधिक प्राणप्रतिष्ठा करें।

आपातकाल की बड़ी भारी हथकड़ी और कोमल कलाई  

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आपातकाल के ढ़ाई वर्ष समाप्त होने के बाद पढ़ाई पूरी की जाये ऐसा पुनः ध्यान मे आया तो 11 वीं कक्षा की प्राइवेट परीक्षा देनी पड़ी और अपना प्रिय विषय गणित छोड़कर आर्ट का विषय चुनने को मजबूर होना पड़ा।

हिंदू-बौद्ध आज भी विश्वगुरु

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कालातीत या हर समय में संवेदनशील, सटीक और समर्थ जीवन शैली को जन्म देने वाले हमारे हिन्दू-बौद्ध सिद्धांत और संस्कार हमें विश्व नेतृत्व की अद्भुत क्षमता प्रदान करते हैं। यही हमारे लिए विश्वगुरु की पुनर्स्थापना है।

युगांतरकारी केंद्रबिंदु बाबासाहेब – जोगेंद्रनाथ मंडल

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जोगेंद्रनाथ मंडल की दलित-मुस्लिम राजनीतिक एकता के असफल प्रयोग व उनके द्वारा खुद को कसूरवार समझे जाने और स्वयं को गहरे संताप व गुमनामी के आलम में झोंक देने के परिदृश्य को बाबासाहेब ने संपूर्णतः जान लिया था और यही अध्याय उनके जीवन भर की राजनैतिक यात्रा में झलकता रहा।

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