भीषण गर्मी और हीट वेव की चपेट में यूरोप

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इतिहास में पहली बार यूरोप में भीषण गर्मी , हीट वेव का होना और धरती के दोनों सिरों (अंटार्कटिक और आर्कटिक) पर एकसाथ तापमान में असंतुलन सामान्य घटना नहीं है । ये सब धरती के तापमान में असंतुलन और जलवायु परिवर्तन की वजह से हो रहा है ,जिसका दायरा अब वैश्विक हो गया है . भले ही कोई इस विनाशकारी स्तिथि को तात्कालिक घटना कहकर ख़ारिज कर दे लेकिन जमीनी सच्चाई यह है की बड़े पैमाने पर ग्लेशियर्स का पिघलना और यूरोप में हीट वेव बहुत बड़े वैश्विक खतरें की आहट है , जिसको अनदेखा नहीं किया जा सकता है। कथित विकास की बेहोशी से दुनियां को जागना पड़ेगा।

मंकीपॉक्स चिंता का विषय

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कोरोना के बाद मंकीपॉक्स एक बड़ी महामारी के तौर पर दुनिया भर में अपने पैर पसार रहा है। यद्यपि भारत में उसका कोई सक्रिय मामला नहीं मिला है लेकिन व्यापक स्तर पर तैयारी किए जाने की आवश्यकता है क्योंकि इस समय यह बीमारी जिन देशों में तेजी से फैल रही है उन देशों के साथ भारत के मजबूत सम्बंध हैं और लोगों की आवाजाही भी लगातार होती रहती है।

बड़े जल संकट की तरफ बढ़ रही है दुनिया

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भारत मे सदियों से जल संरक्षण की महत्ता रही है। हमारे देश में तो नदी ,तालाब और कुँआ पूज्यनीय रहें हैं लेकिन पिछले 100 सालों में कथित विकास के नाम पर हमनें भूजल और जल के स्रोतों को इतना दोहन किया कि पूरी दुनियाँ पीने के पानी की किल्लत से…

नियमन के दायरे में होना चाहिए मोबाइल टैरिफ

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प्रमुख टेलीकॉम कंपनियां अपना मजबूत कार्टेल बनाकर उपभोक्ताओं को तिल-तिल करके मार रहीं हैं क्योंकि कोरोना के बाद वैसे भी देश में आम आदमी मंहगाई की मार से त्रस्त है, ऐसे समय में टैरिफ में बढ़ोतरी को वापस लिया जाना चाहिए। कुल मिलाकर मोबाइल टैरिफ सरकारी नियमन के दायरे में होना चाहिए अन्यथा ये टेलीकॉम कंपनियां कभी भी मनमानी कर सकतीं हैं जो आम आदमी के जेब पर भारी पड़ेगी।

युवाओं को सिर्फ‘ डिग्री ‘ नहीं, रोजगार चाहिए

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नेशनल एसोशिएसन ऑफ सॉफ्टवेयर एंड सर्विसेज कंपनीज यानी नैसकाम के एक सर्वे के अनुसार  75 फीसदी टेक्निकल स्नातक नौकरी के लायक नहीं हैं। आईटी इंडस्ट्री इन इंजीनियरों को भर्ती करने के बाद ट्रेनिंग पर करीब एक अरब डॉलर खर्च करते हैं। इंडस्ट्री को उसकी जरुरत के हिसाब से इंजीनियरिंग ग्रेजुएट…

कोरोना संकट और आत्मनिर्भरता 

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इस कोरोना महामारी से भारत के लिए दो बड़े सबक हैं। पहला सभी मामलों में हम आत्मनिर्भर बने। दूसरा, जीवन रक्षक दवाओं के शोध व विकास पर ज्यादा ध्यान देना। कोरोना संकट न केवल हमारी स्वास्थ्य व्यवस्था को नया आकार देगा बल्कि हमारी अर्थव्यवस्था, राजनीति और संस्कृति को भी नए तरह से गढ़ेगा।

कोरोना: तीसरी लहर की दस्तक

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कोरोना की तीसरी लहर की आशंकाओं के बीच हमें डबल मास्क पहनना, टीकाकरण औऱ कोविड से जुड़ा उचित व्यवहार जारी रखना ही अभी सबसे ज़रूरी है। हमे इसे किसी भी तरह से हल्के में नहीं लेना चाहिए। फिलहाल शारीरिक दूरी और हाथ की सफाई को छोड़ना बिल्कुल नहीं है।

ब्लैक रिवोल्यूशन के लिए तैयार भारत

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पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि प्रदूषण को कम करने और आयात पर निर्भरता घटाने के लिए पेट्रोल में 20 फीसद एथेनॉल मिलाने के लक्ष्य को पांच साल घटाकर 2025 कर दिया गया है। पहले यह लक्ष्य 2030 तक पूरा किया जाना था। एथेनॉल सम्मिश्रण से संबंधित रूपरेखा के बारे में विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट जारी करने के बाद मोदी ने कहा कि अब एथेनॉल 21वीं सदी के भारत की बड़ी प्राथमिकताओं से जुड़ गया है।

तीसरी लहर की आशंकाओं का सच

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राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने एक विस्तृत फार्म (फॉर्मेट) राज्यों को भेजा है, इसमें बच्चों के इलाज के लिए कुल अस्पताल, नर्सिंग होम, प्राथमिक चिकित्सा केंद्र, डॉक्टर, नर्सों व टेक्निशियंस के आंकड़ों को देने को कहा गया है। दरअसल, पब्लिक डोमेन में मौजूद रिपोर्ट में चाईल्ड हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर के आंकड़े गायब नज़र आते हैं। लिहाजा ऐसे में राज्यों को इतने बारीक़ आंकड़े आयोग को देना आसान नहीं होगा।

वैक्सीनेशन की सुस्त रफ़्तार

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इस परिस्थिति से कैसे निपटा जाये और इसका सबसे सटीक जवाब है सभी का जल्द से जल्द वैक्सीनेशन लेकिन वर्तमान हालत को देखते हुए देश में टीकाकरण की प्रगति संतोषजनक नहीं है, कई राज्यों में वैक्सीन की कमी हैं। कोरोना को रोकने के लिए वैक्सीनेशन है सबसे बड़ा हथियार, लेकिन वैक्सीन की किल्लत चुनौती बन गई है।

वैक्सीन की कमी या राजनीति?

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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने वैक्सीन की कमी के इन दावों को पूरी तरह नकार दिया है। उन्होंने कहा कि कुछ राज्य और नेता जनस्वास्थ्य जैसे मुद्दे के राजनीतिकरण में लगे हैं और वैक्सीन की कमी जैसी बातें कहकर बेवज़ह लोगों में घबराहट फैला रहे हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र जैसे राज्यों पर वैक्सीन को लेकर ‘मिसमैनेजमेंट’ और ‘मनमानी’ का आरोप लगाया।

कोरोना के खिलाफ लड़ाई निर्णायक दौर में

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निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार सबसे पहले कोविड 19 वैक्सीन हेल्थकेयर कर्मियों यानी डॉक्टर, नर्स, पैरामेडिक्स और स्वास्थ्य से जुड़े लोगो को दी जाएगी। सभी सरकारी और प्राइवेट हॉस्पिटल को मिलाकर इनकी संख्या 80 लाख से एक करोड़ बताई जा रही है।

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