आजादी का 75वां वर्ष न्याय-व्यवस्था की दिशा व दशा

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भारत की न्यायपालिका की संवेदना भारत के जनमानस के साथ जुड़ी दिखाई नहीं देती। उसका अपना एक सामंती चरित्र है, जो हर प्रकार से शक्तियों से परिपूर्ण किन्तु किसी के प्रति जवाबदेह नहीं है और बड़ी आत्ममुग्ध और स्व-संचालित है। वह अपने बारें में किसी समीक्षा को पसंद नहीं करता। 

फास्ट ट्रैक कोर्ट कितना फास्ट?

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उस समय देश की सभी अदालतों में लगभग 3 करोड़ मामले लंबित थे और उन्हें सुलझाने में मदद करने के लिए तत्कालीन भारत सरकार ने 5  साल की अवधि के लिए देश भर में लगभग 1700 फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की मंजूरी दी। इन फास्ट ट्रैक अदालतों ने कुशलता से काम करते हुए लाखों मामलों को द्रुत गति से हल किया।

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