हिमालय क्षेत्र में प्रकृति संरक्षण एवं आपदा प्रबंधन

Continue Readingहिमालय क्षेत्र में प्रकृति संरक्षण एवं आपदा प्रबंधन

पहाड़ी क्षेत्रों में बादल का फटना एवं भूस्खलन एक साधारण घटना है, लेकिन केदारनाथ क्षेत्र में इतनी बड़ी आपदा पहली बार हुई है। इसी तरह से बादल का फटना, भूस्खलन, नदी की धारा बाधित होना, अल्पकालिक झील का निर्माण, झील का ध्वस्त होना एवं त्वरित बाढ़ का आना एवं अवसाद के अपवहित होने की घटना पर गंगोत्री हिमनदीय क्षेत्र में शोध अध्ययन किए गए हैं।

अनुदान बहुत हुआ अब श्रमदान करें

Continue Readingअनुदान बहुत हुआ अब श्रमदान करें

महाराष्ट्र के वर्तमान मा. राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी उत्तराखंड के पूर्व मुख्य मंत्री भी रह चुके हैं। उत्तराखंड के गठन से उनकी सक्रीय राजनीति में अहम भूमिका रही है। उन्होंने उत्तराखंड के विकास के लिए कई योजनाएं बनाईं थीं। अब 21 वर्षों के उपरांत प्रदेश की प्रगति के संदर्भ में उन्होंने हिंदी विवेक से विशेष बातचीत की। प्रस्तुत हैं उसके कुछ प्रमुख अंश-

सरकार की जन कल्याणकारी योजनाएं

Continue Readingसरकार की जन कल्याणकारी योजनाएं

बदलते परिवेश में राजनीतिक शुचिता व नैतिकता को नये सिरे से गढ़ा जा रहा है। जन कल्याणकारी योजनाओं की प्रमाणिकता व विश्वसनीयता अपेक्षाकृत बढ़ी हैं। घोटाले व भ्रष्टाचार जैसे शब्दों की पुनरावृत्ति पर अंकुश लगा है, जिससे आम लोगो ने राहत की सांस ली है। परिणामत: दुनियाभर के देशों में भारत की साख बढ़ी है।

राजनीतिक सामाजिक हालातों की चिंताजनक कहानी

Continue Readingराजनीतिक सामाजिक हालातों की चिंताजनक कहानी

राज्य गठन के बाद उत्तराखंड को अटल सरकार ने दस साल के लिए औद्योगिक पैकेज दिया था। इसके तहत राज्य के मैदानी इलाकों में इंडस्ट्री तो आयी लेकिन पैकेज सब्सिडी अवधि खत्म होने के बाद उत्पादन ठप्प कर दिया। नतीजतन स्थानीय युवकों को रोजगार के संकट से गुजरना पड़ा और भू माफियाओं की दखलंदाजी बढ़ने से कृषि योग्य भूमि भी घटती चली गई।

रसातल की ओर जाती राजनीति

Continue Readingरसातल की ओर जाती राजनीति

इससे पहले पीएम मोदी और शरद पवार की अलग-अलग मुद्दों को लेकर कई बार मुलाकात भी हो चुकी है। जिसके बाद दोनों नेताओ एक दूसरे की तारीफ भी की थी लेकिन फिलहाल हवा का रुख बदला-बदला सा नजर आ रहा है

End of content

No more pages to load