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आने वाले कुछ दिनों में चुनाव है| पुन: एकबार चुनावी रणसंग्राम शुरु हो जाएगा| पुन: एकबार जनता को कई तरह के प्रलोभन दिये जाएँगे, पुन: एकबार ‘अगर हम सरकार में आये तो जनता को यह मिलेगा, वह मिलेगा’ की रट लगना शुरु हो जाएगी| लेकिन सरकार चुनने का अर्थ प्रलोभनों को देखकर देश की सत्ता चुनना नहीं है| चुनाव का अर्थ है, अपना भविष्य चुनना| और देश का भविष्य देश के युवाओं के हाथ में हैं| यदि सोशल मीडिया का ठीक से अध्ययन किया जाए, तो युवाओं के मन में क्या है, इसका आपको अच्छे से आंकलन हो जाएगा|

२०१४ में सोशल मीडिया और युवा इस समीकरण ने पूरा खेल पलट दिया था और भारतीय जनता पार्टी की सरकार सत्ता में आई थी| अब प्रश्न उठता है कि, क्या इस चुनाव में भी यही होगा? यदि अभी की परिस्थिती देखी जाए, तो सोशल मीडिया पर पिछले पाँच साल में और अधिक युवाओं के नाम दर्ज हुए हैं| एक सर्वे के अनुसार हर साल फेसबुक पर कंप्यूटर द्वारा फेसबुक उपयोग करने वालें लोगों में औसतन ९ % की वृद्धि होती है और मोबाईल से फेसबुक उपयोग करने वाले लोगों में हर साल औसतन २३ % की वृद्धि होती है| पिछले पाँच सालों की कुल वृद्धि का गणित लगाया जाए तो हम जान सकते हैं, कि सोशल मीडिया पर एक बडे पैमाने पर नये लोग दर्ज हुए हैं, यदि इसमें से कमसकम ४० प्रतिशत भी भारतीय होते हैं, और उसके २० प्रतिशत भी युवा होते हैं, तो भी इनकी संख्या में काफी बडी मात्रा में वृद्धि हुई प्रतीत होती है|

अब ऐसे में चुनाव पास होने पर सोशल मीडिया भी चुनाव के पोस्ट्स और मीम्स से भरा हुआ है| और अधिकतर युवाओं का रुझान किस पार्टी की ओर है यह इसी से स्पष्ट होता है| यदि आज के आँकडे देखें तो साधारण १९.६ हजार ट्वीट्स #Modiscamcentury इस हॅशटॅग के अंतर्गत किये गये हैं, तो १४२ हजार ट्वीट्स #IndiaWithNamo हॅशटॅग के अंतर्गत किये गये हैं, यह तो केवल एक उदारण है, ऐसे कितने ही उदाहरण स्पष्ट किये जा सकते हैं| लेकिन सत्ता किसकी बनेगी यह केवल इन पोस्ट्स के माध्यम से नहीं कहा जा सकता| इनमें से कितने युवा मतदान करते हैं, और कितने युवाओं के मत कौनसी पार्टी को जाते हैं, इस पर यह निर्भर करता है, लेकिन हाँ सोशल मीडिया के इन पोस्ट्स का मतदान पर असर जरूर पड सकता है|

इसके क्या कारण हो सकते हैं ? तो प्रमुख कारण जो देखे गये हैं, उनमें पिछले पाँच साल में लिए गये कुछ निर्णय और युवाओं पर सरकार का विश्वास| इसमें से महत्वपूर्ण मुद्दे इस प्रकार है :

१. डिजिटल पेमेंट करने पर सरकार का जोर : 

आज कै दौर में हम हर काम एक क्लिक पर करना चाहते हैं, जिससे हमारा समय भी बचे और मेहनत भी| ऐसे में नोटबंदी के बाद सरकारने डिजिटल पेमेंट्स करने पर अधिक जोर दिया| इसके कारण अब युवा हर जगह और अधिक अच्छे तरीके से अपने डेबिट या क्रेडिट कार्ड का उपयोग कर सकते हैं, साथ ही भीम एप के कारण अब डिजिटली पेमेंट करना बहुत ही आसान हो गया है| गूगल पे, पेटीएम, पे पाल इन सब के माध्यम से एक क्लिक पर छुट्टी वाले दिन भी पेमेंट हो जाता है, और युवाओं को इस बात ने आकर्षित किया है| 

२. स्वच्छता को अहम मुद्दा समझना :

 २०१४ में सरकार बनने के बाद स्वच्छता को अहम मुद्दा माना गया और स्वच्छ भारत अभियान शुरु किया गया| युवाओं के लिये यह बात महत्वपूर्ण थी, क्यूँ की, आज तक इस मुद्दे को महत्वपूर्ण समझा ही नहीं गया था| और इस अभियान में युवाओं का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है| इस मुद्दे की काफी सराहना सोशल मीडिया पर युवाओं ने की है|

३. स्किल इंडिया / स्टार्टअप इंडिया :

 बीजेपी की सरकार आने के बाद से “आंत्रप्रिनियोरशिप” अर्थात “स्वयं का व्यवसाय” शुरु करने वाले युवाओं में वृद्धि हुई है, युवाओं को आत्म निर्भर करने की दृष्टि में अनेक कदम उठाए गये हैं, पिछले पाँच सालों में  स्टार्टअप्स की संख्या में वृद्धि हुई है| नॅशनल असोसिएशन्स ऑफ सॉफ्टवेअर अॅण्ड सर्व्हिसेस के एक सर्वे के माध्यम से केवल २०१८ में ७२०० नये स्टार्टअप्स आये हैं, तो पिछले पाँच सालों में इनकी संख्या क्या हो सकती है, इसका अनुमान आप लगा सकते हैं| ऐसे में युवा व्यावसायिकों को प्रेरणा मिली है, ऐसा प्रतीत होता है| 

४. आतंकवाद के खिलाफ उठाए गये कदम :

पहले पठानकोट और ऊरी में हुए हमलों के विरुद्ध सरकार के नेतृत्व में हमारी सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक की और अब पुलवामा के इतने बडे हमले के केवल १२ दिन बाद एअर स्ट्राइक की गयी| सभी जानते हैं कि युवाओं में भरपूर जोश और देशभक्ति का जज्बा होता है, आतंकवाद के खिलाफ उठाए गये कदमों से देश को प्रेरणा मिली है| और #Indiastrikesback इस हॅशटॅग का उपयोग कर हजारों ट्विट्स और पोस्ट्स फेसबुक और ट्विटर पर किये गये हैं| ऐसे में देश के युवा भारतीय सेना और नेतृत्व के साथ खडे हैं, ऐसा चित्र दिखाई देता है| उसमें से कयी युवा ऐसे भी थे जिन्होंने एअर स्ट्राइक के सबूत मांगे या सेना की कारवाई पर प्रश्न भी उठाए लेकिन ऐसे युवाओं की संख्या सरकार के पक्ष में खडे रहने वाले युवाओं के मुकाबले कम पायी गयी है|

५. विरोधी दल में नेतृत्व की कमी :

देखा जाए तो सरकार के खिलाफ महागठबंधन अवश्य हुआ है, लेकिन महागठबंधन में जो पार्टियाँ हैं, उसमें आपस में तालमेल का अभाव दिखाई देता है| ममता बॅनर्जी को एक छात्रा प्रश्न पूछती हैं, तो वे मंच छोडकर चली जाती हैं, राहुल गांधी को प्रश्न पूछने पर उसका उत्तर उनके पास नहीं होता और वे रटे रटाए विषयों पर उत्तर देते हैं, उदाहरण के लिये एक युवा छात्रा जब राहुल गांधी से पूछती है की उन्हें खेलों में रुचि है, और यदि काँग्रेस की सरकार आती है, तो वह खेलों के क्षेत्र में क्या करेगी? ऐसा प्रश्न पूछने के बाद राहुल गांधी उन्हें राफेल विषय पर उत्तर देते हैं| ऐसे एक नहीं कयी व्हिडियोज व्हायरल हुए हैं| और ये व्हिडियोज अधिकतर युवाओं द्वारा ही पोस्ट किये गये हैं| ऐसे में विरोधी दल में मार्गदर्शक नेतृत्व ना होने के कारण युवाओं का रुझान भारतीय जनता पार्टी की सरकार की ओर दिखाई पडता है| 

६. विरोधी दलों में भ्रष्टाचार और सरकार का सक्षम नेतृत्व :

 विरोधी दलों के प्रमुख नेताओं का नाम लिया जाये तो राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और उनके पती रॉबर्ट वाड्रा इन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं, और सुनवाई चल रही है| चाहे लालू यादव की बात करें या ममता बॅनर्जी की, अखिलेश यादव की बात की जाए या मायावती की महागठबंधन के लगभग सभी नेताओं पर कोई ना कोई आरोप अवश्य लगा हुआ है, जो भ्रष्टाचार से संबंधित है| ऐसे में सरकार में सुषमा स्वराज, निर्मला सीतारामन, अरुण जेटली, राजनाथ सिंह जैसे नेतृत्व हैं जिनका काम सभी को दिखाई देता है| स्व. मनोहर पर्रीकर जैसे ईमानदार नेता के निधन के पश्चात देश की युवाओं का उनके साथ खडा होना सोशल मीडिया पर देखा गया है| ऐसे तुलना करने पर देश का पढा लिखा, या शिक्षा ग्रहण करने वाला युवा अवश्य ही देश की बागडोर सक्षम नेतृत्व के हाथ में सौंपना चाहेगा ना कि भ्रष्ट नेताओं के हाथ में| सोशल मीडिया पर सुरक्षा मंत्री निर्मला सीतारामन और  सुषमा स्वराज को पसंद करने वाले हजारो पोस्ट किये गये हैं| साथ ही टेक्नोलॉजी का उपयोग जिस प्रकार से ये नेता करते हैं, उसे भी युवाओं द्वारा खूब पसंद किया जा रहा है| रेल मंत्रालय हो या विदेश मंत्रालय ट्विट का जवाब ट्विट से जल्द ही मिल जाता है, ऐसे में युवा तकनीक को पसंद करने वाले नेताओं को वोट देना चाहेंगे ऐसा प्रतीत होता है| 

चुनाव तो होंगे| और देश के हर कोने से युवा बाहर निकल कर, अपने अपने शहर जाकर मतदान करें ऐसा पूरा देश ही चाहेगा| वोट वे किसे देंगे इसका जवाब तो वह ही दे सकते हैं, लेकिन सोशल मीडिया की हवा का रुख अभी कुछ इशारे कर रहा है| आज का युवा समझदार है, अपना सही गलत जानता है, और भविष्य चुनने की समझ रखता है, ऐसे में सरकार किसकी बनती है, और सोशल मीडिया का रुझान सच्चाई से कितना मेल खाता है यह तो २३ मई २०१९ को ही पता चलेगा| तब तक केवल कयास ही लगाए जा सकते हैं, फिर कयास लगाने के लिये ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम तो है ही|

This Post Has 2 Comments

  1. This article has only one sided view, why it hasnth mentioned the scripwte interview of Modi ji, why Modi hasn’t done any open press confernce during his tenute, how many jobs shut down due to poor taxtatio and demonetization schemes..You aren’t promoting Votar awareness rathar promoting a political party for your own family inclination, God bless 🙂

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