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कुछ दिन पूर्व काँग्रेसने अपना मॅनिफेस्टो जारी किया | और पुन: एक प्रश्न उठ गया, कि क्या काँग्रेस को देश की सुरक्षा से कोई दरकार नहीं? क्या काँग्रेस के लिये देश से प्यारी ये टुकडे टुकडे गैंग हो गयी? या देश और गरीबों के लिये काम करने का काँग्रेस का सिर्फ दिखावा है | ये सब इसलिये क्यूँ कि, काँग्रेस ने अपने मॅनिफेस्टो में यह लिखा है कि, यदि इस चुनाव में काँग्रेस जीतती है, और सरकार बनाती है तो देशद्रोह के लिये सजा देने वाला कानून याने की धारा १२४ ‘अ’ को वे हटा देंगे | साथ ही काश्मीर में दिया गया अतिरिक्त सैन्यबल भी हटा देंगे | देशद्रोहियों का बोलबाला और आतंकवादियों की फौज ये होगा हमारे देश में यदि काँग्रेस को मौका मिला तो |

देशद्रोह की बात तब बहुत जोरो शोरों से सामने आयी थी, जब सन २०१६ में दिल्ली के प्रसिद्ध जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय अर्थात जेएनयू में कुछ छात्रों ने भारत विरोधी नारे दिये थे| बाद में यही समूह टुकडे टुकडे गैंग के नाम से प्रसिद्ध हुआ था | “भारत तेरे टुकडे होंगे”, “अफजल हम शर्मिंदा है” ऐसे नारे लगाए गये, और उस वक्त मीडिया और कुछ बुद्धीजीवियों नें इसे भटके हुए छात्रों द्वारा की गयी नादानी बताया | विद्यार्थी सॉफ्ट टार्गेट होते हैं, कह कर उन पर कारवाई ना की जाए, देशद्रोही कानून लगाना सही नहीं है, आदि चर्चाएँ की गयी | लेकिन जिन्हें काश्मीर की आझादी चाहिये, जो आतंकवादी अफजल गुरु को पूजते हैं, क्या ऐसे विद्यार्थी सॉफ्ट टार्गेट हो सकते हैं? इन्हीं के समर्थन में उस वक्त राहुल गांधी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल गये थे | दो साल बाद याने की २०१८ में सर्वोच्च न्यायालय ने दिये फैसले के अनुसार ये सभी विद्यार्थी इस प्रकरण में दोषी पाए गये और वे व्हिडियोज जिन्हें काँग्रेस डॉक्टर्ड व्हिडियोज कह कर बता रही थी, वह सभी असली व्हिडियोज हैं, ऐसा बताया गया |

यह सब बताने का तात्पर्य यह है कि, ऐसे ही लोगों को शह देने के लिये काँग्रेस ने यह मॅनिफेस्टो बनाया है | देशद्रोह करने वालों को शह देना अपने आप में ही बडा अपराध है, लेकिन काँग्रेस ने खुले आम सरकार बनाने पर यह अपराध करने की घोषणा की है |

किसे बचाना चाह रही है काँग्रेस? आतंकवादियों को? टुकडे टुकडे गैंग के सरगनाओं को? या इन लोगों को समर्थन देने वालों को? इस तरह के छात्र छात्राएँ मासूम नहीं होते, उन्हें बहलाया फुसलाया गया हो यह जरूरी नहीं, वे एक जहरीली मानसिकता को रखते हुए देश को तोडने , काश्मीर को भारत से अलग करने के सपने देखते हैं, और ये किसी भी देशद्रोह से कम नहीं | उस वक्त इन लोगों का साथ देने का नतीजा आप देख रहे हैं, कन्हैय्या कुमार चुनाव के लिये तैय्यार खडा है, वैसे ऐसा होना तो नहीं चाहिये लेकिन गलती से ऐसे व्यक्ति की जीत हुई तो वह क्या हाल करेगा? जहरीली मानसिकता से कितनों को डसेगा ?

उधर ओमर अब्दुल्ला कह रहें हैं, काश्मीर के लिये अलग प्रधानमंत्री और अलग राष्ट्रपती चाहिये | एक तरफ काँग्रेस कह रही है कि ५ साल में सरकार ने देश के टुकडे किये, असल में काँग्रेस देश के टुकडे करने की मंशा रखती है | और अब यह बयानों से,मॅनीफेस्टो से स्पष्ट हो गया है |

सोचिये देशद्रोहियों को सजा दिलवाने वाला कानून ही खत्म कर दिया जाए तो? देश में और आतंकवाद फैलेगा, टुकडे टुकडे गैंग पुन: सक्रीय हो जाएगी | देश के विकास में बाधक भ्रष्टाचार, आतंकवाद, माओवाद का बोलबाला होगा | तब क्या करेंगे आप और हम ??

एक ओर भारतीय जनता पार्टी कर सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ कडे कदम उठाए | ऊरी और पठानकोट का बदला लेकर सर्जिकल स्ट्राइक की और, अब बालाकोट में एअर स्ट्राइक | लेकिन जब भारत में बंबई में लोकल ट्रेन में सीरिअल बम ब्लास्ट हुआ, तब भारत की तत्कालीन सरकारने क्या किया ? जब मुंबई में २६/११ का हमला हुआ तब सरकार ने क्या किया ? केवल संयुक्त राष्ट्र के पास जाकर पाकिस्तान की शिकायत की | आज के समय में भारत के विकास हेतू राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वतोपरि है | और काँग्रेस इन कुछ विद्यार्थियों को शह देने के लिये, और ऐसे अनेक युवा जो काश्मीर में सेना पर पत्थरबाजी कर रहें हैं उन्हे बढावा देने के लिये एक सोचा समझा खेल खेल रही है |

साथ ही काँग्रेस ने ४ पीढियों से गरीबी हटाओ का नारा दिया है, लेकिन गरीबी में वृद्धि ही दिखाई देती है | इस चुनाव में भी गरीबों पर राजनीति करके काँग्रेस सत्ता हथियाना चाहती है | इसी लिये काँग्रेस ने मेनीफेस्टो में भारत के २० % गरीबों के खातों में सालाना ७२ हजार रुपये देने का वायदा किया है | एक युवा होने के नाते मेरे मन में पुन: एक प्रश्न उठता है | हमें कैसा भारत चाहिये? एक सक्षम भारत जो समाज के आखरी व्यक्ति को भी स्वयं कमाकर अपना जीवन व्यतीत करने के काबिल बनाये | या फिर ऐसा भारत जो अपनी हर जरूरत के लिये सरकार के आगे हाथ फैलाये |

सरकार समर्थन की बात नहीं, लेकिन यदि विद्यमान सरकार अंत्योदय के लिये कार्य कर रही हो, तो देश को अपाहिज बनाने वाली सरकार के हाथ में सत्ता क्यूँ दी जाए ?  आज डिजीटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया के कारण स्किल इंडिया के कारण हजारों युवाओं को फायदा हो रहा है | ऐसे में देश जब सक्षम होने की राह पर है, तब उसके पर काटकर उसे पुन: कमजोर क्यूँ किया जाये ?

 

क्या इस बात का किसी ने अनुमान लगाया कि देश की व्यवस्था एक दूसरे पर निर्भर करती है, तो लोगों को पैसे बांट कर अपाहि‌ज बनाने से यह व्यवस्था बिगड़ जाएगी | खेतों के लिये जिस तरह किसान काम करता है, वैसे ही मजदूर भी काम करता है, किसानों और मजदूरों के विकास के लिये उन्हें आत्मनिर्भर करना आवश्यक है, ऐसी व्यवस्था तैयार करना आवश्यक है कि हर आदमी खुद काम करके पैसा कमाएँ, देना ही है तो अवसर प्रदान करें, यदि इस तरह पैसे बाँटे गये, तो हर महीने ६ हजार रुपये पाने वाला मजदूर खेती में मजदूरी करने नहीं जाएगा, या कोई और काम करके विकास नहीं करेगा क्यूँकी उसे हाथों हाथ एक रकम मिल रही है, वह कम हो या ज्यादा ये मायने नहीं रखता है, मायने ये रखता है, कि वह आत्म निर्भर नहीं हो पाएगा |

इस बार के चुनाव को मद्देनजर रखते हुए देखा जाए तो, युवाओं की दृष्टी से दो बातें बहुत ही महत्वपूर्ण है, एक विकास और दूसरा राष्ट्रीय सुरक्षा | और इन दोनों ही बातों में भारतीय जनता पार्टी का काम अधिक अच्छा दिखाई पडता है | उससे भी महत्वपूर्ण देशद्रोह के कानून हटाने वाले, काश्मीर से सेना हटाने वाले और देश के गरीबों के साथ राजनीति का खेल खेलने वालों के हाथ में क्या भारत की बागडोर देनी चाहिये? यह प्रश्न मतदान करते वक्त सभी के जहन में होना चाहिये | सरकार किसकी बनेगी यह तो समय तय करेगा लेकिन सरकार किसकी बननी चाहिये यह वक्त रहते  तह करना हमारे हाथ में है |

 

निहारिका पोल सर्वटे

 

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