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सचमुच हमारी ज़िन्दगी में एक सच्चा दोस्त होना बहुत आवश्यक है । दोस्ती ऐसी हो कि हमें पता है कि चाहे कोई भी परिस्थिति आ जाये, ये इंसान हमारा साथ नहीं छोड़ेगा। दोस्त तो कई होते हैं, लेकिन सच्चे अर्थों में बेस्ट फ्रेंड का कर्तव्य निभाने वाले बहुत कम होते हैं।
 
क्या सभी दोस्त बेस्ट फ्रेंड्स हो सकते हैं? दोस्ती के बारे में जितना कहा जाए कम है । आजकल तो व्हाट्सएप, फेसबुक, ट्विटर पर दोस्ती के संदेशों की भरमार होती है । लेकिन आख़िरकार दोस्ती होती क्या है ? हमारे दिल में कई बातें होती हैं, कई जज़्बात होते हैं, जो हम सबके साथ शेयर नहीं कर सकते । लेकिन कुछ दोस्त ऐसे होते हैं, जिनसे हम मन की सारी बातें कह सकते हैं । ऐसा ही एक दोस्त कुछ दिन पहले उसकी जिंदगी में आया ।
वह एक ऑफिस में काम करती थी । इस ऑफिस में काम करते हुए उसे कुछ साल गुजर चुके थे । इतने सालों उसकी ज़िन्दगी सिर्फ वह, उसका काम, उसका घर ….इन्हीं के इर्दगिर्द घुमती रही । ऑफिस से निकलते ही घर पहुँचने की जल्दी । घर पर वह, उसके पति और बेटी । उसका एक छोटासा संसार था । कई बार ऑफिस के कुछ कार्यक्रम होते रहते थे जहॉं दूसरी ब्रांच के लोगों से भी उसकी मुलाकात होती रहती थ । दूसरी ब्रांच के लोगों में एक अधिकारी थे– जयेश । वे दूसरी ब्रांच में काम करते थे । किसी न किसी काम से इस ब्रांच में उनका आना जाना लगा रहता था । लेकिन, चूँकि वे ऑफिस में सीनियर थे, तो उनसे एक प्रकार का डर भी महसूस होता था और एक आदर भी रहता था । उसे लगता था कि जयेश बड़े गुस्से वाले होंगे । लेकिन जैसे-जैसे उनसे पहचान बढती गई, उसे लगा कि ऐसा कुछ नहीं है । वे बहुत ही खुश-मिजाज़ और समझदार व्यक्ति हैं । कहते हैं कि दोस्ती में उम्र का कोई बंधन नहीं होता ।
ऐसे ही एक कार्यक्रम में मुलाकात हुई । बातचीत हुई। फिर उन दोनों के बीच व्हाट्सएप पर बातचीत होने लगी । हँसी-मजाक के बीच दोनों एक दूसरे के बहुत गहरे दोस्त बन गए । उसे लगने लगा की वो व्यर्थ ही उनसे डरती थी । वे तो बड़े सरल स्वभाव के और अच्छे व्यक्ति हैं ।
अब तो वो उसके लिए हर समस्या का समाधान बन चुके थे । उनके पास हर प्रश्न का उत्तर होता था । वे हर अड़चन में उसकी मदद करते थे ।
लेकिन छः महीने पहले उसकी ज़िन्दगी में इतना बड़ा भूचाल आया कि वो समझ नहीं पा रही थी कि वो क्या करे । किसे अपनी समस्या बताये । छः महीने से वह सब कुछ सहन कर रही थी । उसे लगता था कि अगर वो किसी को भी यह बात बताएगी, तो सब उसे ही दोष देंगे । वो बड़े असमंजस में पड़ गई थी । एक दिन वो जयेश से मिली, लेकिन उसकी कुछ भी बताने की हिम्मत नहीं हो रही थी । तभी उसके पति का कॉल आया । वे कह रहे थे कि अमित का कॉल आया था ।
अमित, असल में उसके मामा का बेटा था । उसी से उन्होंने अपना रूम ख़रीदा था । उसके सारे पैसे, एक-डेढ़ साल पहले ही चुका दिए थे । लेकिन छः महीने से अमित उसे बहुत परेशान कर रहा था । अमित ने उसे बताया कि ये रूम उसने उसे सिर्फ इसलिए बेचा था कि वो उसे मिल सके । वो बहुत घबरा गई । उसे समझ नहीं आया कि वो क्या करे ? अमित उसे जब-तब फ़ोन करने लगा । एक बार लगा कि पति को सब कुछ बता दे । लेकिन उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी । पता नहीं पति क्या सोचेंगे ? घरवाले क्या सोचेंगे? उसकी बेटी भी छोटी थी । कई तरह के विचार उसके मन में आते थे । अमित के कॉल आते रहते थे । वो मिलने के लिए दबाव डालता । फिर उसने धमकी देना भी शुरू कर दिया कि अगर उसने अमित की बात नहीं मानी तो उसे रूम खाली करना पड़ेगा । और भी तरह तरह की धमकियॉं देता था ।
एक दिन, वो जयेश से मिली । वो जयेश से बात कर ही रही थी कि उसके पति का कॉल आया । वे कहने लगे कि अमित का फ़ोन आया था । उसके चेहरे का उड़ा रंग देखकर जयेश समझ गए कि कोई समस्या है । उन्होंने उससे पूछा कि क्या बात है तुम परेशां क्यों हो ? पहले तो वह संकोच कर रही थी । लेकिन न जाने क्यों उसे लगा कि जयेश उसकी समस्या को समझ सकेंगे । … और छः महीने से जिस समस्या से वो अकेली जूझ रही थी, उसके बारे में उसने उन्हें सब कुछ बता दिया । शुरू से अंत तक । उसके आँसू बहने लगे । जयेश तो समझदार थे ही। उन्हें समझ में आ गया कि इसमें उसका कोई दोष नहीं है । उन्होंने उसे सुझाव दिया कि तुम सब कुछ अपने पति को बता दो । आगे क्या करना है, वो बाद में सोचेंगे ।
उसी रात उसने अपने पति को सारा हाल बताया । उसे लग रहा था कि पता नहीं पति क्या प्रतिक्रिया देंगे । लेकिन उन्होंने उसकी बातें शांति से सुनी । फिर उन्होंने कहा कि मैं जानता था कि अमित तुम्हे कॉल करता रहता है । लेकिन मैंने सोचा तुम भाई बहन के बीच मैं क्या बोलता ।
फिर उसके पति जयेश से जा कर मिले । जयेश ने ऑफिस से लोन दिलाने में बहुत मदद की । लोन की सारी औपचारिकतायें पूरी करने में जयेश ने बहुत साथ दिया । एक दोस्त के रूप में जयेश ने हर तरह से उन दोनों की मदद की । उसके पति को भी जयेश के साथ आ जाने से बहुत दिलासा मिला ।
सचमुच हमारी ज़िन्दगी में एक सच्चा दोस्त होना बहुत आवश्यक है । दोस्ती ऐसी हो कि हमें पता है कि चाहे कोई भी परिस्थिति आ जाये, ये इंसान हमारा साथ नहीं छोड़ेगा ।
दोस्ती शब्द का अर्थ, जयेश जैसे लोगों के होने से ही सार्थक हो जाता है । दोस्त तो कई होते हैं, लेकिन सच्चे अर्थों में बेस्ट फ्रेंड का कर्तव्य निभाने वाले बहुत कम होते हैं।

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