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स्विट्ज़रलैंड की बात है एक १२ साल का गरीब लड़का था | एक दिन वह लड़का सड़क पर गेंद उछाल रहा था | वह गेंद एक दुकान के शीसे में जाकर लगी और शीश टूट गया | भागने का अवसर था पर वह लड़का भगा नहीं | दूकानदार ने उस लड़के को पकड़लिया आया उससे पैसे मांगे | लड़के पास रूपये थे ही नहीं तो ये तै हुआ की ४ दिन लड़का दुकान की साफ सफाई का काम करेगा |
लड़का इस बात को मान गया और उसने चार दिन दूकान पर काम किया | उसने अपना काम बहुत ईमानदारी से किया की दूकान का मालिक उस लड़के के काम और ईमानदारी से खुश हो गया | और उसे अपने यहाँ नौकरी दे दी | वह लड़का पढता भी रहा साथ साथ नौकरी भी करता रहा | धीरे धीरे उसने अपने सद्गुणों से मालिक का मन मोह लिया |कुछ साल बाद मालिक ने उसे अपने कारोबार  में पार्टनर बना लिया | और धीरे धीरे तरक्की करते करते उसकी गिनती अमीर व्यक्तियों में होने लगी |
वह लड़का अपनी कामयाबी का सारा श्रेय अपनी माँ को देता और कहता मेरी माँ ने ही मुझे अपनी गलती स्वीकार करने और पूरी ईमानदारी से काम करनी की शिक्षा दी |

दोस्तों बचपन में मिली हुई शिक्षा पुरे जीवन हमारे साथ चलती है, इसलिए कोशिश करके अपने बच्चो को नैतिक शिक्षा ज़रूर दे इसी से उनके जीवन का और समाज का कल्याण होगा | सिर्फ पैसे कमाने तक की शिक्षा आपके बच्चो को  अमीर आदमी तो बना सकती है पर वह जीवन में खुश तभी होंगे जब वह सच्चाई के रास्ते पर चलेंगे |

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