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एक बार की बात है गोलू अपने घर में आराम कर रहा था। अचानक उसके कमरे की खिड़की पर बिजली चमकी। गोलू घबराकर उठ गया। उसने देखा कि खिड़की के पास एक बुढ़िया हवा में उड़ रही थी। बुढ़िया खिड़की के पास आई और बोली गोलू तुम अच्छे लड़के हो। इसलिए मैं तुम्हे कुछ देना चाहती हूं। गोलू यह सुनकर बहुत खुश हुआ।

जब वह घर पहुंचा तब भी उसकी शरारतें बंद नहीं हुईं। गोलू को इस खेल में बड़ा मजा आ रहा था। किचन के दरवाजे के सामने एक कुर्सी रखी थी। गोलू ने सोचा, क्यों न मैं इस कुर्सी को गायब कर दूं। जैसे ही उसने छड़ी घुमाई वैसे ही गोलू की मां किचन से बाहर निकलकर कुर्सी के सामने से गुजरी और कुर्सी की जगह गोलू की मां गायब हो गई।

गोलू घबरा गया और रोने लगा। इतने में उसके सामने वह बुढ़िया आ गई। गोलू ने बुढ़िया को सारी बात बताई। बुढ़िया ने गोलू से कहा, मैं तुम्हारी मां को वापस ला सकती हूं, लेकिन उसके बाद मैं तुमसे ये जादू की छड़ी की वापस ले लूंगी।
गोलू रोते हुए बोला, तुम्हें जो भी चाहिए ले लो, लेकिन मुझे मेरी मां वापस ला दो। तब बुढ़िया ने एक जादुई मंत्र पढ़ा और देखते ही देखते गोलू की मां वापस आ गई। गोलू ने मुड़कर बुढ़िया का शुक्रिया कहना चाहा, लेकिन तब तक बुढ़िया बहुत दूर बादलों में जा चुकी थी। गोलू अपनी मां को वापस पाकर बहुत खुश हुआ और दौड़कर गले से लग गया।

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