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हम आजकल जब अपने आस-पास के बच्चों पर नजर डालते हैं तो, सभी बच्चे ‘टेक्नोसेवी’ दिखाई देते हैं। ये पीढ़ी मानो जन्मत: तकनीक को आत्मसात करके ही पैदा हो रही है। ये बच्चे मोबाइल, टैबलेट, कम्प्यूटर, लैपटॉप का इतना बेहरीन उपयोग करते हैं जैसे मां के पेट से ही सब सीख कर आए हों। इनको ये सारे आधुनिक उपकरण सिखाने की आवश्यकता नहीं पड़ती, वे अपने आप ही सब सीख जाते हैं। हमें बस आवश्यकता है उन्हें सही मार्गदर्शन देने की और उनके अंदर छुपे हुए गुणों को पहचानने की। जिस तरह कारुलकर दम्पति ने किया है। प्रशांत तथा श्रीमती शीतल कारुलकर का चत्रभुज नरसी स्कूल की  आठवीं कक्षा में पढ़ने वाला बेटा विवान कारुलकर अपना स्वयं का यूट्यूब चैनल चलाता है।

यूट्यूब चैनल वह माध्यम है जिसमें आप अपने अलग-अलग प्रकार के वीडियो बनाकर अपलोड कर सकते हैं और उस वीडियो की लिंक अपने दोस्तों, रिश्तेदारों को शेयर कर सकते हैं। आज यूट्यूब पर लाखों की संख्या में हर विषय से सम्बंधित वीडियो अपलोड किए जा चुके हैं और रोज अनेक वीडियो अपलोड होते रहते हैं। राजनीतिक, सामाजिक, फिल्मी दुनिया, मानोरंजन, विज्ञान, खेल, रेसिपी इत्यादि अनेक विषयों पर यूट्यूब पर वीडियो अपलोड किए गए हैं।

वैसे तो विवान ने अलग-अलग विषयों पर वीडियो बनाए हैं परंतु उसकी रुचि विज्ञान से सम्बंधित वीडियो बनाने में अधिक है। अंतरिक्ष विज्ञान, अलग-अलग प्रकार के गैजेट्स, भविष्य में होने वाला तकनीकी विकास आदि पर विवान ने वीडियो बनाए हैं। उससे बात करते समय कहीं से भी ऐसा नहीं लगता कि बौद्धिक दृष्टि से परिपक्व किसी व्यक्ति से बात की जा रही है, बल्कि उसमें भी वे सभी बालसुलभ बातें दिखाई दीं जो उसकी उम्र के बच्चों में होती है। परंतु उसे विशेष बनाती है उसकी सोच। वह अपने वीडियो के माध्यम से बच्चों से लेकर वयस्कों तक ऐसी जानकारियां पहुंचाना चाहता है, जिनसे लोग अनभिज्ञ हैं। विवान का कहना है कि समयाभाव के कारण लोग विज्ञान से जुडी कई बातों की गहराई तक नहीं पहुंच पाते। ऐसे में 2-4 मिनट के वीडियो उन तक जानकारी पहुंचाते हैं। अत: लोग इन्हें पसंद करते हैं।

वास्तविक रूप से विवान ने वीडियो बनाने की शुरुआत केवल अपने शौक के लिए की थी। उसके द्वारा बनाए गए पहले कुछ वीडियो में यह दिखता भी है, परंतु धीरे-धीरे उसने इसमें महारत हासिल कर ली। किसी विषय पर जानकारी इकट्ठा करना, उससे सम्बंधित फोटो ढूंढ़ना, उस विषय के लिए छोटे-छोटे लेख (स्क्रिप्ट) लिखना या बोलना और इन सभी को जोड़ कर वीडियो तैयार करना, यह पूरी प्रक्रिया विवान अपने आप करता है।

यह पूछने पर कि क्या वीडियो में दी जाने वाली सारी जानकारियां सही हैं, विवान कहता है कि “हां, वीडियो बनाने के पहले मैं उस विषय से सम्बंधित सभी जानकारियां इंटरनेट तथा पुस्तकों से इकट्ठा करता हूं, और अगर मुझे लगता है कि यह लोगों के जानने के लिए आवश्यक है तो ही मैं वीडियो बनाता हूं।”

विवान मूलत: अंगे्रजी माध्यम में पढ़ने वाला विद्यार्थी है। परंतु उसने अभी तक जो भी वीडियो बनाए हैं, उनकी भाषा हिंदी है। इसका कारण पूछने पर विवान का कहना है कि भारत में जितने लोग इंटरनेट का उपयोग करते हैं, उसमें से जितने लोग यूट्यूब देखते हैं, उनका अगर औसत निकाला जाए तो हिंदी के वीडियो देखने वालों की संख्या अधिक दिखाई देगी। साथ ही जिन सामान्य विद्यर्थियों और लोगों के लिए ये वीडियो बनाए जा रहे हैं वे अधिकतर हिंदी जानने वाले हैं। तो अगर हिंदी में वीडियो बनाए जाएंगे तो अधिक लोगों को उसका लाभ होगा। हालांकि वह आगे अंग्रेजी में भी इन वीडियो को बनाने का विचार कर रहा है।

विवान के माता-पिता उद्योगपति हैं तथा समाज सेवा में भी अग्रसर हैं। उनके कार्यों के सिलसिले में वे समाज के कई गणमान्य लोगों से मिलते रहते हैं। वरिष्ठ राजनेता स्वामी से भेंट के दौरान जब उन्हें विवान के द्वारा बनाए गए वीडियो दिखाए गए तब उन्होंने भी विवान के द्वारा बनाए गए वीडियो की प्रशंसा की। साथ ही उसके अंदर के गुणों को निरंतर प्रोत्साहित करने हेतु उसके माता-पिता को सुझाव दिया।

विवान की तरह ही समाज में कई अन्य ऐसे बच्चे हैं जो अपनी कल्पनाशीलता के आधार पर विभिन्न कार्य करने का माद्दा रखते हैं। आवश्यकता है उनके अंदर के गुणों को पहचान कर उन्हें प्रोत्साहन देने की। ये बच्चे ही हमारे देश का भविष्य हैं।

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