प्रोपोगेंडा की साधक बनती जा रही पत्रकारिता

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"ना कलम बिकती है, ना कलमकार बिकता है। लिख लिख कर थक जाती है ये उंगलियां तब जाकर कहीं अख़बार बिकता है।" आज पत्रकारिता का दौर बदल गया है। टीआरपी के चक्कर में अब खबरें बनाई और बेची जाने लगी है। एक समय था जब पत्रकार की कलम से अंग्रेजी…

भारत की बौद्धिक क्षमता के प्रतीक

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विदेश मंत्री सुब्रमण्यम जयशंकर बड़ी ही विनम्रता से अपने अकाट्य तर्कों से अंतरराष्ट्रीय मीडिया को उत्तर देते हैं। उन्होंने अमेरिका और यूरोप को जिस तरह से कटघरे में खड़ा किया, इससे पहले कोई भी ऐसा नहीं कर पाया। एक विदेशी पत्रकार ने उनसे पूछा, भारत जिस तरह से यूक्रेन पर…

बौद्धिक युद्ध: राष्ट्रीय बनाम राष्ट्र विरोधी विमर्श

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इंटरनेट वैश्वीकरण के युग में, एक विचार या विमर्श दुनिया भर में ख़तरनाक गति से यात्रा करता है।  सामाजिक और मुख्यधारा के मीडिया में वैचारिक या धार्मिक विषय महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।  बुद्धिजीवियों, ईमानदार और बेईमान दोनों, ने ब्रेनवॉश करने या विशेष विचार प्रक्रियाओं को लागू करने में सोशल…

रूस, यूक्रेन, अमेरिका, भारत… और भारतीय मीडिया

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जेलेन्स्की और पुतिन प्रकरण में भारत हर बार यूएन वोटिंग से ले कर सार्वजनिक आधिकारिक कथनों में रूस के साथ खड़ा दिखता है। पश्चिमी राष्ट्रों और अमेरिकी सांसदों से ले कर प्रभावशाली राष्ट्राध्यक्षों ने भारत को अपराध बोध में लपेटने के प्रयास किए। भारत ने रूस को नहीं त्यागा और…

निष्पक्ष पत्रकारिता या धंधे की पत्रकारिता

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वर्किंग जर्नलिस्टस ऑफ इंडिया ने अपनी मांगों के समर्थन में दिल्ली के जंतर मंतर पर बहु चर्चित धरना- प्रदर्शन का आयोजन 30 मार्च को किया। इस आयोजन में बड़ी संख्या में पत्रकारों और मीडिया कर्मियों ने भाग लिया और एक ज्ञापन प्रधानमंत्री कार्यालय को दिया। उनकी बहुत सी मांगे बहुत…

ध्वस्त होता गणन शास्त्र और एलीट इंटलेक्चुअल

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उप्र के चुनाव परिणाम केवल राजनीतिक विश्लेषण का विषय भर नही हैं।यह बहुजन राजनीति के ध्वस्त होने का निर्णायक पड़ाव भी हैं।यह जातियों के गणन शास्त्र की विदाई भी है जो पस्चिमी समाजशास्त्र से किराए पर लेकर भारत के ज्ञानजगत में स्थापित की गई। और लंबे समय तक इस ज्ञान…

जिहादी-कांगी-वामी गिरोह गोलियथ की तरह विशाल

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एक बहुत ही पुराना किस्सा है, जो आपने कई बार पढा या सुना होगा। ये किस्सा यहूदी राजा डेविड से जुड़ा है। किंग डेविड यहूदियों के शुरुआती राजाओं में से एक थे। इजराइल में एक बहुत पुराना मंदिर है, जो किंग डेविड का ही बनवाया हुआ है। तो कहानी किंग…

वामपंथी मीडिया : शुतुरमुर्ग या भेड़िया?

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देश में मीडिया का एक वर्ग ऐसा है जिसे आज तक आरएसएस, भाजपा और नरेंद्र मोदी का बढ़ता कद कभी पसंद नहीं आया। मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे, उस समय से इस वर्ग ने हर कदम पर उन्हें असफल घोषित करना शुरू किया जो अब तक जारी है। इसके…

वास्तविक लोकतंत्र के लिए वैकल्पिक पत्रकारिता

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राजतंत्र में भी लोकतंत्र की यह व्यवस्था हज़ारों वर्षों के प्रयोग व विमर्श का परिणाम थी। पश्चिम के प्रभाव में हमने स्वतंत्र होने पर डेमोक्रेसी को अपनाया और लोकतंत्र या प्रजातंत्र को भुला दिया। लोक का मन जानने के लिए पत्रकारिता एक सशक्त माध्यम हो सकता है। पत्रकारिता समाज की ऐसी रचना है जिसमें कुछ इस कार्य में दक्ष नागरिकों को दायित्व दिया जाता है कि वे लोक व प्रशासन में सेतु का कार्य करें। 

सुधीर चौधरी को आतंकवादी कहना कितना सही?

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वरिष्ठ पत्रकार सुधीर चौधरी को आप सभी ने एक निजी चैनल पर जरूर देखा होगा और उनकी खबरें भी शायद आप को प्रभावित करती होंगी। सुधीर चौधरी को उनके डीएनए (DNA) कार्यक्रम की वजह से एक अलग पहचान मिली है इस कार्यक्रम में वह किसी भी मुद्दे पर बहुत खुले…

इस हिंसा को गंभीरता से लेना जरूरी 

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महाराष्ट्र के कई शहरों की डरावनी हिंसा ने फिर देश का ध्यान भारत में बढ़ रहे कट्टरपंथी तंजीमों की ओर खींचा है। 12 नवंबर को मुस्लिम समुदाय के अलग-अलग संगठनों द्वारा आयोजित जुलूस, धरने व रैलियों से कुछ समय के लिए हिंसा का जैसा कोहराम मचा सामान्यतः उसकी कल्पना नहीं…

सहिष्णुता मीडिया का गुण-धर्म

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समाज में जब कभी सहिष्णुता की चर्चा चलेगी तो सहिष्णुता के मुद्दे पर मीडिया का मकबूल चेहरा ही नुमाया होगा. मीडिया का जन्म सहिष्णुता की गोद में हुआ और वह सहिष्णुता की घुट्टी पीकर पला-बढ़ा. शायद यही कारण है कि जब समाज के चार स्तंभों का जिक्र होता है तो…

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