शिकारी शिकार बन गया 

एक बार एक शिकारी किसी घने जंगल से होकर गुजर रहा था। उसके पास बंदूक भी थी। जब वह जंगल के भीतर गया तो उसने पेड़ की एक डाल पर एक कबूतर बैठा देखा।

उसने अपनी बंदूक से कबूतर का निशाना लिया और बंदूक का घोड़ा दबाने ही वाला था कि कहीं पीछे से एक सांप आया और उसे डस लिया। शिकारी अपने शिकार पर गोली नहीं चला सका और नीचे गिर पड़ा। सांप के विष का प्रभाव इतना तेज था कि उसका शरीर नीला पड़ने लगा। वह जमीन पर लोटने लगा। उसके मुंह से झाग निकलने लगे।

मरते समय शिकारी ने सोचा- ‘सांप ने मेरे साथ वही किया, जो मैं उस मासूम कबूतर के साथ करना चाहता था।’

निष्कर्ष- दूसरों का बुरा करने वाला स्वयं भी विपत्ति में फंसता है।

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