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पांच अगस्त को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद से पाकिस्तान लगातार इस मुद्दे को अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर उठाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन हर बार उसे मुंह की खानी पड़ रही है। अमेरिका के राष्ट्रपति पहले ही जम्मू – कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने को भारत का आंतरिक मामला बता चुके हैं। चीन ने भी इस मुद्दे पर पाकिस्तान का साथ नहीं दिया है।

अब दो दिवसीय दौरे पर आये यूरोपीय संघ (ईयू) के 23 सांसदों ने भी कहा कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाना भारत का आंतरिक मामला है। ईयू के सांसदों ने कहा कि वे वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ने में भारत के साथ हैं। ईयू के सांसदों के इस बयान को भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है।

बता दें कि 31 अक्टूबर से जम्मू – कश्मीर दो केंद्र शासित प्रदेशों, यथा, जम्मू कश्मीर और लद्दाख में विभाजित हो गया है।

जम्मू – कश्मीर के हालात का जायजा लेने के लिये ईयू के सांसदों के शिष्टमंडल की दो दिवसीय यात्रा कई मायनों में महत्वपूर्ण है। केंद्र द्वारा जम्मू – कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म करने और इसका दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजन करने का फैसला करने के बाद से कश्मीर में विदेशी प्रतिनिधियों का यह पहला उच्च स्तरीय दौरा है। उल्लेखनीय है कि कुछ सप्ताह पहले अमेरिका के एक सीनेटर को कश्मीर जाने की इजाजत नहीं दी गई थी। करीब दो महीने पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित विपक्षी सांसदों के एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल को भी श्रीनगर हवाई अड्डे से दिल्ली वापिस भेज दिया गया था। इसके अलावा भी विपक्षी दलों के कई नेताओं को श्रीनगर हवाई अड्डा पहुंचने के बाद उन्हें वापिस भेजा गया है।

फ्रांस के सांसद हेनरी मेलोसे के अनुसार अनुच्छेद 370 को कश्मीर से हटाना पूरी तरह से भारत का आंतरिक मामला है। हमारी चिंता आतंकवाद को लेकर है। वैश्विक स्तर पर बढ़ता आतंकवाद दुनिया के देशों के लिये बड़ी समस्या है। हम आतंकवाद की हर जंग में भारत के साथ हैं। ब्रिटेन के सांसद न्यूटन डन ने कहा कि हम वैश्विक स्तर पर शांति चाहते हैं। इसलिये, आतंकवाद की लड़ाई में हम भारत के साथ हैं। पोलैंड के सांसद रेजार्ड जारने ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने भारत के बारे में पक्षपातपूर्ण रिपोर्टिंग करके भारत को बदनाम करने की कोशिश की है। फ्रांस के सांसद थियेरी मारियानी ने कहा कि अनुच्छेद 370 को अंतर्राष्ट्रीय मामला बताना बेवजह भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करना होगा, जो कतई उचित नहीं है।

श्री जारने के अनुसार आतंकवादी देशों को बर्बाद कर रहे हैं। मैं अफगानिस्तान और सीरिया की हालात देख चुका हूँ। आतंकवादियों ने इन दोनों देशों को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया है।

ईयू के 23 सांसदों के शिष्टमंडल ने जम्मू – कश्मीर जाने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नई दिल्ली में मुलाकात की। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार श्री अजीत डोभाल ने शिष्टमंडल को जम्मू – कश्मीर के हालात के बारे में विस्तृत जानकारी दी, साथ ही साथ उनकी यात्रा को सफल बनाने के लिये जरूरी इंतजाम किये।

कांग्रेस सहित कुछ प्रमुख विपक्षी दलों एवं भाजपा की सहयोगी दलों जैसे, शिवसेना तथा जदयू ने ईयू संसद सदस्यों के जम्मू – कश्मीर दौरे और उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुलाक़ात की कड़ी आलोचना की है। विपक्षी दलों का कहना है कि ईयू के सांसदों की कश्मीर यात्रा को पक्षपात से मुक्त नहीं माना जाना चाहिये। शिष्टमंडल में शामिल जर्मनी की दक्षिणपंथी पार्टी अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी के सांसद निकोलस फेस्ट के अनुसार भी ईयू के संसद सदस्यों को कश्मीर दौरे की इजाजत देना और भारत के विपक्षी सांसदों को कश्मीर यात्रा की इजाजत नहीं देना गलत है। शिष्टमंडल का यह दौरा भाजपा की सहयोगी दल शिवसेना के भी निशाने पर है। शिवसेना के मुखपत्र “सामना” के संपादकीय में कहा गया कि ईयू के सांसदों के शिष्टमंडल की कश्मीर यात्रा भारत की स्वतंत्रता और संप्रभुता में बाहरी हस्तक्षेप है। संपादकीय में ईयू के सांसदों के शिष्टमंडल की जम्मू-कश्मीर की यात्रा के पक्ष में दिये जा रहे तर्कों की भी आलोचना की जा रही है।

विपक्षी दलों का कहना है कि जब इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में ले जाने के लिए पंडित जवाहरलाल नेहरू की अभी भी आलोचना की जाती है तो फिर ईयू के सांसदों के शिष्टमंडल को कश्मीर की यात्रा की अनुमति क्यों दी गई ? कांग्रेस का कहना है कि भारत के आंतरिक मामले का “अंतर्राष्ट्रीयकरण” करने के लिये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सफाई देनी चाहिये।  कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी मामले में कटाक्ष करते हुए कहती हैं कि “अंतर्राष्ट्रीय ब्रोकर” की पहुँच प्रधानमंत्री कार्यालय तक है। भाजपा की एक अन्य सहयोगी जदयू के नेता पवन वर्मा के अनुसार इस मुद्दे का “अंतर्राष्ट्रीयकरण” करना गलत है। श्री वर्मा ने ईयू के सांसदों को उनकी निजी हैसियत से जम्मू-कश्मीर की यात्रा करने की इजाजत देने की भी घोर आलोचना की।

यूरोपीय आर्थिक एवं सामाजिक समिति के पूर्व अध्यक्ष मेलोसे के मुताबिक सांसदों के शिष्टमंडल की स्थानीय पुलिस और सेना ने भरपूर सहयोग दिया। उनकी यात्रा के दौरान पश्चिम बंगाल के 5 प्रवासी मजदूरों की कुलगाम जिले में आतंकवादियों ने गोली मारकर हत्या कर दी। जब शिष्टमंडल कश्मीर पहुंचा तो पूरा शहर बंद था। श्रीनगर तथा घाटी के अन्य हिस्सों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच कुछ झड़पें भी हुई, लेकिन स्थिति पूरी तरह से सुरक्षा बलों के नियंत्रण में रही।

लबोलुबाव के रूप में कहा जा सकता है विपक्षी दलों की आलोचना के बाद भी ईयू के सांसदों के शिष्टमंडल का कहना है कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाना भारत का आंतरिक मामला है।

यह निश्चित रूप से भारत की एक बड़ी कूटनीतिक जीत है। विपक्षी दलों का यह कहना कि ईयू के सांसदों के शिष्टमंडल के कश्मीर यात्रा से भारत के आंतरिक मामलों में अंतर्राष्ट्रीय हस्तक्षेप हुआ है पूरी तरह से गलत है।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान के खिलाफ ठोस घेराबंदी करने के लिये यह बहुत ही जरूरी कदम था। सच कहा जाये तो भारत ने अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान को बेबस कर दिया है कि वह मान ले के जम्मू – कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाना भारत का अंदरूनी मामला है।  देखा जाये तो जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के होने की वजह से ही वहाँ आतंकवाद फूल-फल रहा था। ऐसे में विपक्षी दलों का यह कहना कि अनुच्छेद 370 को हटाकर कश्मीर के लोगों के साथ नाइंसाफी की गई है पूरी तरह से गलत संकल्पना है। अस्तु, ऐसे संवेदनशील मसले पर राजनीति करने से विपक्षी दलों को बचना चाहिये।

 

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