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केंद्र सरकार ने उमर अब्दुल्ला को रिहा करने का किया ऐलान

जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने के साथ ही केंद्र सरकार ने वहां के कई स्थानीय नेताओं को हिरासत में ले लिया था और कुछ को नजरबंद कर दिया था, क्योंकि सरकार को ऐसी आशंका थी कि यह नेता घाटी का माहौल बिगाड़ सकते हैं।
सरकार ने जैसे ही राज्य से 370 हटाने का फैसला किया उसके बाद से घाटी के नेताओं ने इसका जोरदार विरोध किया था और कुछ नेताओं ने यहां तक ऐलान कर दिया था कि अगर घाटी से धारा 370 हटाई गई तो यहां खून की नदियां बह जाएंगी। जिसके बाद केंद्र सरकार ने राज्य की शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए ऐसे नेताओं को नजर बंद कर दिया था। हालांकि धीरे-धीरे नेताओं की भी रिहाई शुरू हुई।
केंद्र सरकार ने मंगलवार को यह जानकारी दी कि जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला को भी रिहा किया जायेगा।  5 अगस्त 2019 से ही उमर अब्दुल्ला हिरासत में लिए गए थे उनके ऊपर पीएसी के आरोप थे। इससे पहले उमर अब्दुल्ला के पिता फारुख अब्दुल्ला को भी रिहा किया गया था, जबकि उमर अब्दुल्ला को लेकर उनकी बहन सारा पायलट ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी और रिहाई की मांग की थी। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा था कि या तो उमर अब्दुल्ला की रिहाई की जाए या फिर कोर्ट इस मामले पर सुनवाई करेगा। कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार से 1 सप्ताह में जवाब देने के लिए कहा था। जिसके बाद उमर अब्बदुल्ला की रिहाई की खबर सामने आयी है।
आपको बता दें कि 5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने जम्मू कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा हटा लिया था और इसे दो अलग-अलग लद्दाख और कश्मीर के रूप में बांट दिया था। यह दोनों केंद्र शासित राज्य हैं। इस फैसले का जहां स्थानीय नेताओं ने विरोध किया था तो वहीं बाकी राज्यों की जनता ने इस फैसले का स्वागत किया था। सभी ने कहा कि सरकार के इस फैसले से जम्मू कश्मीर का विकास होगा और वह एक अच्छा टूरिस्ट प्लेस बन सकेगा जिससे वहां के स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा।

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