भव्य दिव्य भारत का होगा नवनिर्माण

सरकार को व्यापार-उद्योग का जमीनी स्तर पर आकर विचार करना चाहिए तथा यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि 20 लाख करोड़ के पैकेज को किस तरह अमल में लाया जाएगा। इसके अलावा और भी कुछ रियायतें फौरन दी जा सकती हैं। इससे भारत के नवनिर्माण में सहायता मिलेगी।

मैं हीरे का व्यापारी हूं। कोरोना संकट के कारण व्यापार पर प्रतिकूल परिणाम हुआ है और लॉकडाउन कब खुलेगा, यह भी नहीं कहा जा सकता। कोरोना के भय से मुक्त होने में समय लगेगा। काम-धंधे बंद होने से कर्मचारी पलायन कर चुके हैं। हीरे से जुड़े कर्मचारी भी अपने-अपने गांव चले गए हैं। बड़ी संख्या में कर्मचारियों के पलायन के कारण उद्योग-धंधों एवं कारखानों में गति से काम करने में समय लगेगा। जब तक वे सभी कर्मचारी वापस नहीं आ जाते, यह पूर्व स्थिति पाना मुश्किल है।

सम्पन्न व्यक्ति ही हीरा खरीद पाता है। अभी तो ि़फलहाल सभी अपने बजट के अनुसार घर में राशन, दवाई और अन्य जरूरी सामानों पर ही खर्च कर रहे हैं। सभी मानसिक रूप से डिप्रेशन में हैं। मुझे तो नहीं लगता कि हीरा व्यवसाय में अभी गति आएगी। लेकिन एक बात यह भी है कि अमीर लोग अपनी शानो-शौकत के लिए हीरा खरीदते हैं और उन्हें लॉकडाउन के कारण कुछ फर्क नहीं पड़ा है। वे किसी भी प्रकार की स्थिति का सामना करने में सक्षम हैं। इसलिए लॉकडाउन खुलने के बाद हीरा के व्यापार में गति आने की भी संभावना है।

जापान की तरह फिर खड़ा होगा भारत

सोशल डिस्टेंसिंग के बजाय फिजिकल डिस्टेंसिंग पर जोर देना चाहिए। यदि हम पूरी ताकत और तन्मयता के साथ वर्ष भर बिना छुट्टी लिए काम करते रहेंगे तो मुझे लगता है कि आर्थिक नुकसान की भरपाई की जा सकती है और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है। उदाहरण के रूप में बताना चाहता हूं कि जापान के हिरोशिमा और नागासाकी में अमेरिका ने परमाणु बम गिराकर उसे पूरी तह से तबाह कर दिया था। कभी हार न मानने वाला जापान घुटनो पर आ गया था लेकिन कभी हार न मानने की परम्परा का पालन करते हुए जापानियों ने अपनी प्रतिभा और परिश्रम के बल पर मात्र 10 वर्षों में ही अपने राष्ट्र को फिर से खड़ा कर लिया और कुछ वर्षों बाद ही जापान दुनिया की एक आर्थिक महाशक्ति बनकर उभरा। मेरे गुरुदेव चंद्रशेखर उपन्यास महाराज ने भविष्यवाणी की थी कि बहुत जल्द ही हमारा देश भव्य दिव्य भारत के रूप में दुनिया में जाना जाएगा। मुझे लगता है कि वह समय आ गया है। भारत के पास यह एक अच्छा मौका है, कुछ कर दिखाने का, इस अवसर का लाभ उठाने का। भारत की सारी व्यवस्थाओं को कमर कसकर देश के नवनिर्माण में सहयोग देना चाहिए।

आशावादी और सकारात्मक नजरिया अपनाना होग

हमें रोने-धोने की जरूरत नहीं है। हमें बहुत ज्यादा आर्थिक नुकसान हुआ है ऐसी कोई बात नहीं है। हमारा पैसा अब भी बैंकों में सुरक्षित है। हमारा कैपिटल हमारे पास ही है। हमारे ग्रोथ रेट इंडेक्स और जीडीपी में कमी आ सकती है लेकिन हम इससे उबरने में सक्षम है। हमें नकारात्मक बातें करना बंद करना चाहिए। हमारा भारत शुरू से ही सकारात्मक और आशावादी रहा है। जब हम पूरी दुनिया पर नजर डालते है तो पता चलता है कि भारत ने हर हाल में संघर्ष किया है और विजय हासिल की है। इसलिए पूरी दुनिया में एकमात्र सनातन पुरातन राष्ट्र के रूप में आज भी हम जीवित हैं। समय के साथ चलने का हुनर भारतीयों में है। बहुत ही कम खर्चों में भारत में लोगों का गुजर बसर हो जाता है। कुछ समय तक रोजी रोजगार और व्यापार में दिक्कतें आ सकती हैं; लेकिन उसके बाद सब कुछ ठीक हो जाएगा, ऐसा मेरा पूर्व विेशास है।

श्रमिक प्रधान उद्योगों को मिले आयकर में रियायत

सरकार ने जो 20 लाख करोड़ के पैकेज की घोषणा की है। यह किसी के समझ में नहीं आ रहा है। इसका लाभ मिलना मुश्किल है। सरकार ने घोषणा तो कर दी है लेकिन यह कैसे अमल में लाया जाएगा इस बारे में कुछ नहीं बताया है। मेरा यह मानना है कि यदि व्यापार को मजबूत बनाना है तो जितने भी लेबर ओरिएंटेड बिजनेस हैं उन सबको 5 वर्षों के लिए इनकम टैक्स हॉलिडे कर देना चाहिए। जितने वैल्यू एडेड आइटम हैं उन्हें भी यदि इनकम टैक्स हॉलिडे मिल जाए तो काफी बड़ी संख्या में श्रमिकों को काम मिल जाएगा और रोजगार में भी वृद्धि होगी। उसी तरह हीरा व्यापार में भी किया जाना चाहिए।

हीरा बाहर से आता है और उसे पॉलिश करके ज्वेलरी में फिट करके एक्सपोर्ट किया जाता है तो यह भी लेबर ओरिएंटेड काम हो गया। इससे लगभग 10 लाख से अधिक श्रमिक जुड़े हुए हैं। इसी प्रकार के जितने भी व्यापार हैं उन्हें सुविधाएं प्रदान की जानी चाहिए। मान लो कपड़ा एक्सपोर्ट करे तो नहीं; लेकिन कपड़ों से ड्रेस बनाकर डिजाइन बनाकर एक्सपोर्ट करें तो यहां के मजदूरों को रोजगार मिलेगा। यह भी श्रमिक मूलक हो गया तो इसे इनकम टैक्स फ्री कर दें। उसी तरह फार्मा इंडस्ट्रीज को भी आगे बढ़ाना चाहिए क्योंकि अभी फार्मा इंडस्ट्रीज बहुत चलेगी। इसके साथ ही आयुर्वेदिक इंडस्ट्रीज को भी आगे बढ़ाने की अधिक आवश्यकता है। भारत सरकार को आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए पहल करनी चाहिए।

सभी तरह की सरकारी सब्सिडी खत्म की जाए

मैं सरकार से यह कहना चाहता हूं कि सभी तरह की सब्सिडी को खत्म कर दिया जाना चाहिए। इसमें पैसों की बर्बादी बहुत होती है और लाभ कम मिलता है। मनरेगा में 50 हजार करोड़, केमिकल फर्टिलाइजर में सालाना लाखों करोड़ की सब्सिडी बंद कर देनी चाहिए। मुझे लगता है कि हमें किसी भी प्रकार की सब्सिडी देने की कोई जरूरत नहीं है। यदि हम सब्सिडी देते हैं तो उसका मतलब है कि वह इंडस्ट्रीज काबिल नहीं है।

एक समान हो बिजली दर

बिजली दर में सुधार करने की बहुत आवश्यकता है। सरकार की लागत 3 से 4 रुपया है लेकिन सरकार 8 से 10 और 15 रुपए भी लेती है। यह सरकारी नीति अन्यायकारी है। इसमें बदलाव होना चाहिए चाहे वह इंडस्ट्री हो या घर हो, सभी जगह सरकार की बिजली दर समान होना चाहिए। यदि कोई व्यापारी 1 रुपये की वस्तु का 5 रुपए दाम ले तो उसे दंडित किया जाता है लेकिन सरकार 3 से 4 रुपए में बिजली उत्पादन करती है और 15 रुपये में बेचती है तो सरकार को कोई दंड नहीं दिया जाता। यह भेदभाव व पक्षपात क्यों? कानून सबके लिए समान क्यों नहीं है? सरकार को सभी प्रकार की सुविधाएं प्राप्त हैं। सरकार को बिजली की लागत 3 रुपए आ रही है और 10 पैसे प्रशासकीय खर्च है। यदि 3 रुपए 10 पैसे में सभी को एक समान दर में बिजली दे दी जाए तो बिजली का बिल कम होगा और हमारा माल भी बेहद सस्ता हो जाएगा। हम दुनिया में स्पर्धा में भी खड़े रह सकते हैं और चीन की तर्ज पर आर्थिक विस्तार भी कर सकते हैं। इस तरह के अतिरिक्त दर को कम किया जाना चाहिए।

पेट्रोल – डीजल का भाव बढ़ाया जाए

इसके अलावा विदेशों से आयातित डीजल – पेट्रोल के भाव बढ़ाए जाने चाहिए। विदेशी गाड़ियों पर से सब्सिडी खत्म कर देनी चाहिए। पेट्रोल – डीजल को कम से कम 100 रूपये के नीचे बेचना ही नहीं चाहिए। जिनको बेहद जरूरी होगा वही उसका पर्याप्त मात्रा में उपयोग करेगा और इससे प्रदूषण कम करने में भी मदद मिलेगी। इससे सरकार का बोझ भी कम होगा। इस तरह के उपाय और छोटी – छोटी जरूरी सुधार प्रक्रिया को अपनाकर हम आगे बढ़ सकते हैं। मुझे लगता है कि हम इसी तरह भव्य दिव्य भारत के निर्माण में अपना योगदान दे सकते हैं।

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