हमारा कर्तव्य

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इस साल पर्यूषण पर्व के अवसर पर भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड के द्वारा 6 अगस्त 2020 को वधशालाओं तथा मांस की दुकानों को बंद रखने का आदेश जारी कर 11 अगस्त 2020 को आदेश को वापस ले लिया जो कानूनी परिधि के प्रतिकूल निर्णय था और यह देश भर में चर्चा का विषय बन गया है।

केवल बछिया पैदा करने की जादुई तरकीब रक्षक या भक्षक?

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एक तरफ देश के कई राज्यों में गोवंश की हत्या को लेकर बड़े कानून बनाए जा रहे हैं, लेकिन दूसरी तरफ देश में नर गोवंश पर  अपराध बढ़ता ही जा रहा है क्योंकि मशीनीकरण की वजह से बैलों का प्रयोग करीब-करीब खत्म हो गया। लेकिन प्राकृतिक या ऑर्गेनिक खेती के बढ़ते प्रचलन से बैलों के प्रयोग की एक नई आशा जागी है।

ऑर्गेनिक खेती से होगा स्वस्थ व समृद्ध महाराष्ट्र

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सिक्किम की तर्ज पर महाराष्ट्र में भी ऑर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने के लिए देशी गोवंश का संरक्षण, संवर्धन, गोचरभूमि को विकसित करने जैसे अन्य महत्वपूर्ण कदम उठाए जाने चाहिए। तभी महाराष्ट्र निरोगी स्वस्थ एवं समृद्ध हो सकेगा। इससे पर्यावरण की रक्षा व प्रदूषण कम करने में भी मदद मिलेगी।

भव्य दिव्य भारत का होगा नवनिर्माण

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सरकार को व्यापार-उद्योग का जमीनी स्तर पर आकर विचार करना चाहिए तथा यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि 20 लाख करोड़ के पैकेज को किस तरह अमल में लाया जाएगा। इसके अलावा और भी कुछ रियायतें फौरन दी जा सकती हैं। इससे भारत के नवनिर्माण में सहायता मिलेगी।

ग्रामीण समृद्धि  एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए जीव जंतुओं का संरक्षण जरूरी है 

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गाय के दूध के साथ साथ गोबर एवं मूत्र की उपयोगिता का जितना बखान करें उतना ही कम है. आपको स्मरण दिलाना चाहते हैं कि गोमूत्र से कई प्रकार की औषधियां बन रही है. पंचगव्य की दवाएं आज अमेजॉन पर उपलब्ध है. भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड ने गौ संरक्षण की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं जिसमें गोचर विकास,  मानव संसाधन के लिए मानव जीव जंतु कल्याण अधिकारियों का प्रशिक्षण एवं उन्हें  क्रूरता निवारण के लिए अधिकारिता प्रदान करना,  पशु चिकित्सा संबंधी सुविधाएं प्रदान करना, गौशाला निर्माण के लिए मार्गदर्शन देना, नियम कानूनों के प्रति जानकारी देकर पशुओं पर होने वाले अत्याचार को नियंत्रित करना आदि कार्य किए जा रहे हैं.

भगवान महावीर ने दी थी ग्लोबल वार्मिंग की चेतावनी

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जैन धर्म के सिद्धांत के अनुसार छठे आरा (काल) में सूर्य की किरणें अत्यंत उग्र हो जाने से अनाज की तंगी उत्पन्न होगी और जीने के लिए प्रजा को मांसाहार पर निर्भर रहना पड़ेगा। ग्लोबल वार्मिंग की चर्चा आजकल जीवन के हर क्षेत्र में हो रही है। ऐसा माना जा रहा है कि आधुनिक काल में मंहगाई और अनाज की जो समस्या उत्पन्न हुई है, वह भी ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव के कारण ही है।

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