भारतीय संस्कृति का विजयनाद

अयोध्या में भगवान श्रीराम मंदिर के भूमिपूजन स्वर्णिम दिवस है भाद्रपद कृष्ण द्वितीय सवंत 2077 तदनुसार 5 अगस्त 2020। मध्याह्न 12 बजकर 15 मिनट 15 सेकण्ड के बाद ’32 सेकण्ड’ के अभिजित मुहूर्त में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के करकमलों द्वारा भूमिपूजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण किया जाएगा।

दुनिया की सबसे प्राचीन सनातन संस्कृति भारत की है। कई पंथ, मजहब, संस्कृति सभ्यता आये और काल के गाल में समा गए लेकिन भारतीय संस्कृति ही शाश्वत स्वरूप में आज भी अपने वैभवशाली गौरव के साथ विद्यमान है और हजारो हजारों वर्षों तक आगे भी रहेगी। अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य विराट मंदिर का निर्माण भारतीय संस्कृति का विजयनाद है जो उद्घोष करता है कि दुनिया की कोई ताकत हमें परास्त नहीं कर सकती। राख से आग बनकर फिर से भगवा अपने तेज से दुनिया को रोशन करता रहेगा।

‘अयोध्या करती है आह्वान ठाट से कर मंदिर निर्माण’ यह गीत आज फिर से प्रासंगिक हो चला है। टाट में लंबे समय तक रहे रामलला को अब उनके सही स्थान अयोध्या के राज सिंहासन पर बैठाने का समय समीप आ गया है। 500 वर्षों के लंबे संघर्ष, त्याग व बलिदान के बाद रामभक्तों को अपने आराध्य प्रभु श्रीराम के भव्य दिव्य मंदिर का दर्शन जल्द ही होने वाला है।
‘राम राज्य बैठे त्रिलोका, हर्षित भयऊ गयऊ सब सोका’ रामचरित मानस की इस चौपाई की प्रमाणिकता के आधार पर भगवान श्री राम से संबंधित जो भी अनुष्ठान एवं निर्माण आरंभ होता है तो राष्ट्र की प्रगति, समृद्धि एवं चहुंमुखी विकास को गति मिलना सुनिश्चित हो जाता है। ऐसे शुभ योग में मंदिर निर्माण होने से देश की प्रगति से विश्व में यशोगान के योग बन रहे हैं। भारत विश्व का नेतृत्व करने में सक्षम होगा। ‘राम राष्ट्र की संस्कृति है, राम राष्ट्र के प्राण है, श्रीराम के भव्य मंदिर का मतलब भारत का नवनिर्माण है’ और इसी आधार पर भारत के नवनिर्माण के भूमिपूजन के साथ ही आत्मनिर्भर भारत की भी नीवं प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी रखने वाले है।

दुनिया के सर्वाधिक आकर्षण का केंद्र बनेगी वैभवशाली अयोध्या

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 5 अगस्त को जब शिलान्यास करेंगे तो पहले उन परिवारों को सबसे ज्यादा ख़ुशी मिलेगी जिनके परिजन कारसेवा के दौरान शहीद हुए थे। अब मंदिर निर्माण शुरू होने वाला है तो आंदोलन के सारे दृश्य आंखों के सामने घूम रहे हैं। मुझे इस बात कई बेहद ख़ुशी है कि लम्बी लड़ाई का प्रतिफल करोड़ों हिन्दुओं को मिलने जा रहा है। राम जन्मभूमि आंदोलन सफल रहा। बहुत से संस्मरण है, जिसको हम याद कर सोचते हैं, प्रभु राम की कृपा ही है जिससे हमें भव्य मंदिर देखने का अवसर मिल रहा है। आंदोलन के नायक अशोक सिंघल और परमहंस रामचंद्रदास के संघर्ष को भुलाया नहीं जा सकता। मंदिर निर्माण के बाद अयोध्या एक बार फिर अपने वैभव से पूरी दुनिया के आकर्षण का केंद्र बनेगी।

                                               – विनय कटियार, संस्थापक अध्यक्ष, बजरंग दल, (पूर्व सांसद भाजपा)

सर्वश्रेष्ठ मुहूर्तों में से एक है अभिजित मुहूर्त

पुरातन काल से हम देखते और सुनते आए हैं कि जब भी कोई शुभ कार्यों के लिए संत महात्मा यज्ञ हवं करते थे तब असुर बाधा डालने के लिए आ जाते थे, उसी तरह राम मंदिर के भूमिपूजन का शुभ समय आया है तो कालनेमि जैसे पाखंडी भगवा रंग ओढ़े रंगे सियार तथाकथित मठाधीश, वामपंथी, कांग्रेसी, जिहादी आदि राष्ट्रधर्म विरोधी अपने एजेंडे के तहत राम मंदिर के कार्य में बाधा डालने के लिए कह रहे हैं कि यह मुहूर्त अच्छा नहीं है। आइये जानते है। भूमिपूजन से जुड़े अभिजित मुहूर्त के बारे में –
जिसका सबको इंतजार था वह शुभ घड़ी नजदीक आ गई है। अयोध्या में भगवान श्रीराम मंदिर के भूमिपूजन की तिथि निश्चित हो चुकी है। यह स्वर्णिम दिवस है भाद्रपद कृष्ण द्वितीय सवंत 2077 तदनुसार 5 अगस्त 2020। मध्याह्न 12 बजकर 15 मिनट 15 सेकण्ड के बाद ’32 सेकण्ड’ के अभिजित मुहूर्त में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के करकमलों द्वारा भूमिपूजन किया जाएगा। काशी के प्राख्यात ज्योतिषाचार्य गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ ने यह शुभ मुहूर्त निकाला है। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से यह मुहूर्त बहुत ही शुभ है। चर संज्ञक लग्न तुला है जो पर्यटन की दृष्टि से अति उत्तम है। दशम भाव में बुधादित्य योग बन रहा है जो प्रशासनिक एवं इन्फ्रास्ट्रक्चर की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इस दिन चतुर्थ भाव में स्वराशी के शनि है जो पञ्च महापुरुष योग बना रहे हैं। यह ऐतिहासिक दृष्टि से समृद्धता प्रदान करने वाला है। इस दिन तृतीय भाव में धनु राशि में स्वराशि के गुरु एवं केतु हैं जो विश्व में आध्यात्मिक क्षेत्र में परम प्रसिद्धि योग बना रहे हैं। बुधवार को शतभिषा नक्षत्र रहेगा जो मित्र एवं मानस योग निर्मित कर रहे हैं। इस दिन अभिजित मुहूर्त है जिसे ज्योतिषी के अनुसार समस्त मुहूर्तों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। इस दिन मुहूर्त के सभी गृह स्वराशि या मित्र राशि में दृश्यमान रहेंगे। बताया जाता है कि ऐसे शुभ एवं उत्तम योगों में रखी गई नींव (शिलान्यास) हजारों हजारों वर्षों तक भारतीय संस्कृति एवं मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आदर्शों को विद्यमान रखेगी। यह मुहूर्त केवल श्रीराम मंदिर के भूमिपूजन के लिए ही सिमिति नहीं है बल्कि जन सामान्य लोगों के लिए भी गृह निर्माण, गृह प्रवेश एवं अन्य शुभ कार्यों के लिए अति उत्तम मुहूर्त है। ज्योतिषाचार्य पंडित शिवकुमार शर्मा ने इस शुभ मुहूर्त का विश्लेषण किया है।

विश्व के सबसे बड़े मंदिरों में शुमार होगा अयोध्या का भव्य श्रीराम मंदिर

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की आखिरी बैठक में मंदिर को भव्य दिव्य और विराट बनाने के लिए उसके डिज़ाइन में परिवर्तन करने की अनुमति दे दी है। मंदिर अब 2 मंजिला के स्थान पर 3 मंजिला होगा और उसकी ऊंचाई 128 फिट से बढ़ाकर 161 ऊंचाई तय की गई है। मंदिर की लम्बाई पहले 268 फिट तय की गई थी उसे बढ़ाकर 280 – 300 फिट कर दिया गया है। प्रस्तावित 140 फिट की चौड़ाई को बढ़ाकर 280 फिट के करीब किया गया है। मंदिर के ऊपर 3 के बजाय 5 शिखर बनाए जाएंगे। प्रत्येक तल पर 106 स्तंभ और पूरे मंदिर में कुल 318 स्तंभ बनाए जाएंगे। विश्व हिन्दू परिषद की ओर से पेश किण् गए पुराने मंदिर मॉडल को बदला नहीं गया है, बस कुछ बदलाव एवं सुधारों को उसमें जोड़ दिया गया है। बावजूद इसके भारत में सबसे ऊंचे शिखर वाला मंदिर यह नहीं होगा। हिमाचल प्रदेश के सोलन में भारत का सबसे ऊंचा मंदिर स्थापित है। इस मंदिर को पूर्ण रूप देने में 39 वर्षों का समय लगा था। वैसे दुनिया का सबसे बड़ा मंदिर भारत में नहीं बल्कि थाईलैंड के ओंकोरवाट में स्थित है। जानकारों का मानना है कि राम मंदिर बनने के बाद दुनिया भर के लिए पर्यटन की दृष्टि से राम मंदिर सर्वाधिक आकर्षण का केंद्र बनेगा।

अद्भुत अविस्मरणीय भूमिपूजन का होगा लाइव प्रसारण

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से पूरे देश की आस्था और विश्वास जुड़ा हुआ है। सभी लोग इस ऐतिहासिक घटना के प्रत्यक्षदर्शी बनना चाहते हैं, लेकिन कोरोना महामारी के संकट को देखते हुए कार्यक्रम में अधिक संख्या में लोगों के आने पर रोक है। केवल चुनिंदा मशहूर हस्तियों सहित राम मंदिर आंदोलन से जुड़े प्रमुख नेताओं को ही कार्यक्रम में आने का निमंत्रण दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, विनय कटियार, साध्वी ऋतुंभरा, उमा भारती, डॉ. मोहन भागवत, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं अन्य राज्यों के मुख्यमंत्री इस कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं। कार्यक्रम को भव्य एवं सफल बनाने के लिए जोरो शोरों से तैयारियां की जा रही हैं। कार्यक्रम स्थल पर बड़े बड़े स्क्रीन लगाए जाएंगे और भूमिपूजन कार्यक्रम का लाइव प्रसारण किया जाएगा ताकि सभी देशवासी इस अद्भुत अविस्मरणीय पल को देख सके।

भारत के एक नए युग के प्रवर्तन का संकेत

श्रीराम जन्मभूमि की हिन्दू समाज के हाथों में वापसी भारतीय राजनीति में कांग्रेस के दशकों के ऐसे शासन के बाद हिन्दू जागरण का नाद करती है, जिसने हर हिन्दू सांस्कृतिक स्वर को दबाने और राम मंदिर के निर्माण को रोकने की कोशिश की थी। यह उन दिव्य विभूतियों की भी जीत है जिन्होंने सदियों तक इस पवित्र स्थल के लिए संघर्ष किया, श्री राम के लिए अपना जीवन न्योछावर किया। अब अयोध्या उन सभी के लिए एक वैश्विक तीर्थ बननी चाहिए जो श्रीराम और उनके सनातनी मूल्यों का सम्मान करते हैं। जब मैं दीपावली के दौरान अयोध्या गया था तब सरयू के तट पर 5 लाख 51 हजार दिए जलने का अभूतपूर्व दृश्य देखकर आनंदित हो गया। ऐसा लगा जैसे अब श्रीराम सदा के लिए अयोध्या लौट आए हैं एक नए राम राज्य की नींव डालने। यह भारत के एक नए युग के प्रवर्तन का संकेत है।

इसके साथ ही भारत के लोगों को सतर्क रहने की भी आवश्यकता है क्योंकि अधार्मिक ताकतें आसानी से हथियार नहीं डालेगी और येन – केन – प्रकारेण पलटवार करने की कोशिश करेगी। हिन्दुओं को ऐसी नकारात्मक ताकतों से एक लंबे सांस्कृतिक संघर्ष के लिए तैयार रहना होगा, जो भारत को फिर से उभरता नहीं देखना चाहतीं। यह सिर्फ एक राजनीतिक या सामाजिक संघर्ष नहीं बल्कि एक बौद्धिक और आध्यात्मिक लड़ाई है।

    – डॉ. डेविड फ्रोली उपाख्य पंडित वामदेव शास्त्री

ये कैसा सेक्युलरिज्म?

भारत में ‘सेक्युलरिज्म’ शब्द ने देश का इतना अहित किया है जितना किसी ने नहीं किया होगा। डॉ. बाबासाहब आंबेडकर के संविधान में आपातकाल के दौरान इंदिरा गांधी ने इस शब्द को दुर्भावना से जोड़ दिया था। आपातकाल ने जितना देश के लोकतंत्र को नुकसान नहीं पहुंचाया, उससे कही अधिक ‘सेक्युलर’ नामक इस शब्द ने पहुंचाया। जो आज तक भारतीय परम्परा, संस्कृति, सभ्यता के साथ सामाजिक व्यवस्था पर चोट पहुंचाता आ रहा है। कांग्रेस के नेता यह दुहाई दे रहे हैं कि राम मंदिर के भूमिपूजन में देश के प्रधानमंत्री को नहीं जाना चाहिए। इससे देश के सेकुलरिज्म के सिद्धांत को चोट पहुंचेगी। जैसे सोमनाथ मंदिर के उदघाटन में तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू नहीं गए थे वैसे ही प्रधानमंत्री मोदी को भी नहीं जाना चाहिए।
अब बात करते हैं कांग्रेसी नेताओं के दोगले चरित्र की। इफ्तार पार्टी में तो ये नेता गोल स़फेद टोपी पहन कर शिरकत करते हैं तब इन्हें सेक्युलरिज्म खतरे में दिखाई नहीं देता लेकिन जैसे ही हिन्दू धार्मिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की बात आती है तो ये सेक्युलरिज्म की बांग देने लगते हैं। देश का एक बड़ा वर्ग सेक्युलर शब्द के खिलाफ अब अपनी आवाज बुलंद करने लगा है और सोशल मीडिया पर अपनी आपत्ति दर्ज कराने लगा है। लोगों की मांग है कि मूल संविधान में गैरवाजबी रूप से घुसेड़े गए सेक्युलर शब्द को हटाया जाए ताकि सेक्युलरिज्म के नाम पर चलने वाली गंदी राजनीति खत्म हो सके। जब देश में समान नागरिक कानून की बात उठती है तो यही सेक्युलर गैंग चुप्पी साध लेता है। इससे यह साबित होता है कि हिन्दुओं को निशाना बनाने और किसी खास एजेंडे के तहत सेक्युलर गैंग अपनी दुकान चला रहा है।

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