छत्तीसगढ़ में कन्वर्जन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन

आखिर क्यों करवाया जा रहा है कन्वर्जन?
यह बात किसी से भी छुपी हुई नहीं है की ईसाई मशीनरी बड़ी तेजी से ही जनजातियों का कन्वर्जन करवा रही है और इसको सहायता का नाम दिया जा रहा है। देश का शायद ही कोई ऐसा कोना होगा जो इससे अछूता हो वरना कन्वर्जन का काम पूरी तेजी से पूरे देश के अलग-अलग इलाकों में हो रहा है और इस पर किसी की नजर भी नही है। देश के बड़े से बड़े नेता और समाजसेवी भी इसके खिलाफ आवाज़ नहीं उठा रहे है। ईसाई मशीनरी द्वारा पहले गरीब और मजबूर लोगों की मदद की जाती है और फिर उन्हे उनके ही धर्म और समाज के खिलाफ भड़का कर उनका कन्वर्जन करवा दिया जाता है।

कन्वर्जन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन
छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके में भी जनजातियों को सहायता के नाम पर बहकाया जा रहा है और उनका कन्वर्जन करवाया जा रहा है। पिछले काफी समय से यह काम जोरों पर था जिसके बाद अब इसका विरोध शुरु हुआ है। बस्तर संभाग के हजारों जनजाति अब जाग चुके हैं और इस कन्वर्जन को लेकर वह सड़कों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन दुख की बात यह है कि जनजातियों की अपनी संस्कृति, सभ्यता, परंपरा और अधिकारों की रक्षा के लिए उनके साथ कोई भी मीडिया या समाज का कोई दल उनके साथ खड़ा नहीं है।
 
छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले में जनजाति समाज ने ईसाई मशीनरी के द्वारा किए जा रहे कन्वर्जन के खिलाफ विरोध शुरू कर दिया है। जनजाति समाज के लोग सड़कों पर आ गए है और खुलकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। जनजाति समाज की तरफ से कन्वर्जन के जाल को रोकने के लिए प्रशासन और सरकार से भी गुहार लगाई गई है और सरकार को यह चेतावनी भी दी है कि अगर इसे जल्द से जल्द रोका नहीं गया तो स्थिति बिगड़ सकती है और विरोध प्रदर्शन पूरे राज्य में फैल जायेगा। 
 
सहायता के नाम पर हो रहा कन्वर्जन
आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ का बस्तर इलाका जनजातियों का एक बहुत बड़ा क्षेत्र है यहां रहने वाले लोग ज्यादातर मजदूर वर्ग के हैं और हर दिन अपनी रोजी-रोटी की तलाश में बाहर निकलते हैं। ऐसे में ईसाई मशीनरी यहां आसानी से लोगों की थोड़ी बहुत मदद कर उनका कन्वर्जन आसानी से करवा देती है। कन्वर्जन की वजह से जनजाति समाज धीरे-धीरे कम होता जा रहा है और उनके रीति रिवाज परंपराएं भी घटती जा रही है। कन्वर्जन के बाद जनजातीय लोग उस परंपरा और धर्म को अपना रहे हैं जो कभी भारत का था ही नहीं, इतना ही नहीं कुछ स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि कन्वर्जन करवाने वाले लोग हिंदू धर्म की संस्कृतियों की और परंपराओं को तोड़ मरोड़ कर पेश करते हैं और उसे अपमानित भी करते हैं। हिंदू देवी देवताओं को लेकर अपमान जनक टिप्पणियां भी मिशनरियों द्वारा की जाती है।
विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि उन्हें प्रशासन की तरफ से भी सहयोग नहीं मिल रहा है। कन्वर्जन को लेकर शुरू हुए इस प्रदर्शन को प्रशासन द्वारा जमीनी विवाद बताया जा रहा है वहीं कुछ मीडिया समूह इस प्रदर्शन को लेकर जनजातियों पर ही निशाना साध रहे हैं। ऐसे में लगातार यह प्रदर्शन कमजोर होता जा रहा है। कन्वर्जन को लेकर जनजाति समाज अब आपस में भी लड़ रहा है क्योंकि जो लोग ईसाई धर्म अपना चुके हैं वह अब बचे हुए जनजातियों के दुश्मन हो चुके हैं ऐसे में दोनों समाज के बीच कलह की स्थिति बनना लाज़मी है।
 
ईसाई मशीनरी देवी देवताओं का कर रही अपमान
कन्वर्जन के विरोध में सड़कों पर उतरे लोगों का कहना है कि उनके देवी देवताओं का अपमान किया जा रहा है और उनके ही भाइयों को बहला-फुसलाकर उनका कन्वर्जन करवाया जा रहा है इसलिए करीब 1 सप्ताह से कन्वर्जन के खिलाफ जनजाति ग्रामीणों का प्रदर्शन जारी है। जनजातीय समाज भी अलग-अलग बटा हुआ है और हर समाज का एक अलग मुखिया है। कन्वर्जन को लेकर चल रहे विरोध के दौरान जनजाति समाज के सभी मुखिया भी इकट्ठा हुए हैं और लगातार विघटित हो रहे समाज को रोकने को लेकर चिंता व्यक्त कर रहे है। समाज के मुखिया का कहना है कि इस पर समय रहते रोक नहीं लगाई गई तो आने वाले समय में स्थिति काफी भयावह हो सकती है। 
 
राज्य स्तर का हो सकता है विरोध प्रदर्शन?
वहीं विरोध कर रहे लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि जो लोग धर्म परिवर्तित हो चुके हैं उनकी रक्षा और सहायता के लिए दूसरे राज्यों से पादरी को बुलाया गया है और दूसरे राज्यों से आए पादरी को कलेक्टर ऑफिस में भी आते जाते देखा गया है जिसके बाद से यह आशंका जताई जा रही है कि धन बल के जोर पर प्रशासन को उनके पक्ष में लाने की कोशिश की जा रही है। फिलहाल में विरोध कर रहे जनजाति समाज के लोगों ने यह साफ कह दिया है कि अगर राज्य से पूरी तरह से कन्वर्जन का काम बंद नहीं हुआ तो उनका प्रदर्शन राज्य स्तर पर होगा और इसमें पूरे राज्य का जनजाति समाज इकट्ठा होगा।

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