किसान आदोलन से बढ़ सकते है जरुरी सामानों के दाम!


सरकार और किसानों के बीच की तकरार खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। किसान किसी भी हालत में कृषि कानून को मानने को तैयार नही है जबकि सरकार भी कानून को वापस लेने के मूड में नहीं दिख रही है। सरकार की तरफ बातचीत का ऑफर दिया है लेकिन किसान बातचीत के लिए तैयार नहीं हो रही है। राजधानी दिल्ली के बार्डर पर किसानों का प्रदर्शन जारी है। सड़क पर ट्रैक्टर और ट्राली को ही किसानों ने अपना घर बना लिया है। सरकार के साथ बढ़ते विद्रोह के साथ ही किसानों ने अपना नारा भी बदल दिया है और अब दिल्ली चलो की जगह दिल्ली घेरो का नारा दिया जा रहा है।

सरकार की तरफ से कहा गया है कि बातचीत के जरिए मसले को सुलझाया जायेगा जबकि किसानों की तरफ से बातचीत के लिए कोई तैयार नहीं हो रहा है। दिल्ली पुलिस किसानों को बुराड़ी के निरंकारी मैदान में इकट्ठा करना चाहती है जिससे सड़कों को खोला जा सके लेकिन किसान यूनियन बार्डर से हटने के लिए तैयार नहीं है। किसानों की तरफ से कहा गया कि बुराड़ी का मैदान कोई पार्क नहीं बल्कि किसानों के लिए एक खुली जेल है। किसानों की जिद से अब सरकार की चिंता बढ़ने लगी है। किसानों के प्रदर्शन को 5 दिन हो चुके है लेकिन किसानों का जोश अभी भी कम नही हो रहा है। दिल्ली के अलग अलग 5 जगहों पर विरोध प्रदर्शन जारी है। जानकारी के मुताबिक कुछ जगहों पर पुलिस और किसानों के बीच झड़प की भी खबरें आ रही है।

किसान आंदोलन की वजह से जहां सरकार की मुसीबत बढ़ रही है वहीं आम जनता के लिए भी परेशानी बढ़ती जा रही है क्योंकि दिल्ली बार्डर के आस पास रहने वालों के लिए बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है। लोग नौकरी, दुकान या जरुरी कामों से भी बाहर नहीं जा पा रहे है। इसके साथ ही कोरोना को देखते हुए सरकार इस बात से चिंतित है कि किसानों की भीड़ की वजह से कोरोना संक्रमण तेजी से फैल सकता है।

किसानों ने सड़क पर ही अपना घर बना लिया है और भारी ठंड के बाद भी वहां से हटने के लिए तैयार नहीं हो रहे है। किसान अपना खाना सड़क पर ही बना रहे है और वहीं अलाव जलाकर खुद को गर्मी दे रहे है। किसानों की तरफ से सरकार को चुनौती दी गयी है कि वह 4 महीने और धरना दे सकते है तब तक के लिए उनके पास खाना का सामान और पैसा है।

सरकार भी किसानों के प्रदर्शन से परेशान है। सरकार की तरफ से हर बार यही कहा जा रहा है कि कृषि बिल किसानों के हित में है उन्हे बिल का विरोध नहीं करना चाहिए जबकि किसान यह बात मानने को तैयार नहीं हो रहे है। सरकार की तरफ से यह भी आरोप लगाया गया है कि किसानों का यह आदोलन विपक्षी दलों की एक राजनीति है जो केंद्र सरकार के खिलाफ जानबूझ कर की जा रही है। किसान आंदोलन को लेकर गृहमंत्री अमित शाह ने भी किसानों से अपील करते हुए बातचीत का प्रस्ताव रखा है इसके साथ राजनाथ सिंह, जेपी नड्डा और पीएम मोदी ने भी किसानों को यह विश्वास दिलाया है कि बिल का विरोध करना ठीक नही है क्योंकि यह बिल किसानों के हित को लिए तैयार किया गया है।

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