आने वाले कल की युवा शक्ति

बच्चे देश का भविष्य होते हैं। बच्चे नटखट और शैतान भी होते हैं। बच्चों की इस शैतानियत और ऊर्जा का अगर कोई भी देश सही इस्तेमाल करेगा तो उसे अपनी उन्नति के लिए कल तक का इंतजार भी नहीं करना पड़ेगा।

भारत का इतिहास इन्हीं बच्चों ने ही तो बनाया है। सन्त ज्ञानेश्वर ने सिर्फ 16 साल की आयु में ही संजीवन समाधि ली, पर उससे पहले ज्ञानेश्वरी का निर्माण किया। शिवाजी महाराज ने 16 साल की उम्र में ही स्वराज की शपथ ली। स्वतंत्रता सेनानी बाबू गेनू भी 16 साल की उम्र में ही शहीद हो गये, यही वो उम्र है, जिसमें दुनिया को हिला देने वाली ताकत होती है। सचिन तेंदुलकर भी 16 साल की उम्र में ही अन्तरराष्ट्रीय खिलाड़ी बने थे।

फेसबुक के निर्माता ‘मार्क जुकेरबर्ग’ ने सिर्फ 19 साल की उम्र में फेसबुक का निर्माण किया, जिसने आज पूरी दुनिया को हिला दिया है। अनेक भारतीय युवा भी विज्ञान में अपना सहयोग दे रहे हैं। भारत सरकार की ओर से भी ‘इग्नाईट’ या इन्स्पायर जैसी प्रतियोगिता युवा छात्र संशोधकों को प्रोत्साहित करती है। आज तहसील स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक विज्ञान प्रदर्शनी एवं प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है, जिसमें कई सारे छात्र अपना सहयोग देते हैं, किन्तु उनके सामने कोई विशेष आदर्श नहीं है, न ही उन बच्चों को तथा उनके शिक्षक एवं पाठशाला को प्रसिद्धि मिलती है। आज हम ऐसे ही कुछ अनजान बच्चे और उनके संशोधन की जानकारी लेंगे।

हाल ही में हुए ‘इन्स्पायर प्रतियोगिता’ में कुछ कमाल के नवनिर्माण देखने के लिए मिले, इसमें ग्लॅडलीन और दीक्षा नामक सेंट रेमण्ड पाठशाला की 10वीं की छात्राओं ने जानवर और अग्नि से फसलों की सुरक्षा के लिए एक सुरक्षा प्रणाली बनायी है। खेत घर से दूर होते हुए भी किसान घर में बैठे फसलों की सुरक्षा कर पायेंगे।

आरया एस. नाम की 12 साल की छात्रा ने सूरज की रोशनी का प्रयोग करने वाली एक छोटे से शहर की प्रतिकृति बनायी थी और दूसरी ओर 14 साल की छात्रा तसवीर ने एक शहर की प्रतिकृति को लेकर पर्जन्य धारा से पानी बचाने वाली आधुनिक ‘रेन वॉटर हार्वेसर्िंटंग सिस्टम’ बनायी थी।

उड़ीसा के ‘सुशांत पटनाईक’ आज भारत के जाने-माने युवा इनोवैटर हैं। 9वीं कक्षा में पढ़ते समय ही सुशांत ने निवास सुरक्षा यन्त्र की संकल्पना को साकार किया था। दसवीं कक्षा में उन्होंने आपाघात रहित तकनीक की संकल्पना पर काम किया। इस संकल्पना को उन्हें इग्नाईट प्रतियोगिता में पहला स्थान प्राप्त हुआ और उन्हें नेशनल इन्वेंशन फाउंडेशन द्वारा सम्मानित किया गया। भूतपूर्व राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम द्वारा सुशांत को सम्मानित किया गया। एम. आई टी. द्वारा सन 2010 में सुशांत द्वारा निर्मित श्वसन निर्देशक साधन को अमरीका में हुए अन्तरराष्ट्रीय टी. आर.-35 नामक वर्ग में सम्मानित किया गया। उनका सम्मान नासा द्वारा भी किया जा चुका है।
सुशांत जैसी और एक होनहार इनोवैटर हैं जमशेदपुर की राजश्री भारत सरकार द्वारा संचालित इग्नाईट प्रतियोगिता 2012 में 11 वर्षीय राजश्री को पहला स्थान प्राप्त हुआ, उसकी संकल्पना के अनुसार घर की सुरक्षा निर्भर होती है घर के दरवाजे पर और दरवाजे का झरोखा ऊंचा होता है। तभी दरवाजा कब खोलना है, यह जानने के लिए राजश्री ने कल्पना जतायी कि नंबर पैड तथा वॉयस (आवाज) पहचान की मदद से एक नंबर का और वॉयस (आवाज) का जोड़ की दरवाजा खुलेगा तो यह बखूबी सुरक्षित और सस्ती प्रणाली हो सकती है। राजश्री की दूसरी संकल्पना भी काफी अलग है। रास्ते में वाहन चलाते वक्त मोबाइल फोन का इस्तेमाल काफी खतरनाक साबित हुआ है। वाहन के इग्नीशन के साथ ही अगर मोबाइल जोड़ दिया गया, तो जैसे ही मोबाइल चालू होगा, वाहन अपने आप बंद हो जाएगी।

बंगलूरू के शिशु गृह पाठशाला के छात्रों ने संजना राव और शारण्या श्रीनिवासन ने श्री सूर्यनारायण राव के मार्गदर्शन के जरिये संगणकीय परदे यानी मॉनीटर्स के लिए विद्युत शक्ति का अतिरिक्त उपयोग कम से कम करने की संकल्पना सामने लायी हैं। इस संकल्पना पर आधारित प्रत्यक्ष प्रयोग उनके ही शाला में किया गया और उन्हें काफी सफलता मिली है। उन छात्राओं को अमरीका तथा स्वीडन से आमंत्रित किया गया है।

आज अपने भारत वर्ष में कई बच्चे सामान्य शिक्षा से भी दूर हैं। पर इन्हां बच्चों की शालेय शिक्षा के अलावा अगर ऐसी प्रात्यक्षिक शिक्षा का अभियान चलाया गया तो यकीनन वो सब बच्चे जो पूरे साल पाठशाला में नहीं जा सकते, एक साल में 2 व 3 कक्षा का ज्ञान भी पा सकते हैं। हमें जरूरत है, तो बस उन्हें ये मौका देने की। उन्हें सहूलियतें देने की, उन्हें प्रयोगशील बनाने की, उन्हें प्रोत्साहित करने की। अंधेरी स्थित श्री गोविन्द बाल मंदिर शाला में हमने इस कार्य की शुरुआत की है। अब बारी आपकी है।
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