देसी गाय के फायदों को जान आप हो जायेंगे हैरान!

हिन्दू धर्म की यह परंपरा रही है कि खाने से पहले की रोटी गाय के लिए निकाली जाती है और अंतिम रोटी कुत्ते के लिए रखी जाती है। मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान की सरकार अब इसी धर्म को आगे ले जाते हुए गायों के संरक्षण के लिए गौ सेवा कर लगाने जा रही है और इसके लिए गौ कैबिनेट का गठन किया गया है। मध्य प्रदेश सरकार के इस फैसले के बाद अब यह पहला राज्य बन गया जहां गौ सेवा के लिए कैबिनेट स्तर पर फैसले लिए जायेंगे।

गौ केबिनेट गठन के बाद इस पर वर्चुअल बैठक भी हुई जहां कई फैसले भी लिए गये। शिवराज सिंह चौहान सरकार की तरफ से ऐलान किया गया कि सरकार 2000 गौ शाला खोलेगी जिससे ना सिर्फ गायों की सेवा हो सकेगी बल्कि इसके जरिए कई लोगों को समृद्ध भी बनाया जायेगा। मध्य प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि हम शुरु से ही भारतीय संस्कृति के पक्षधर रहे है। हम हमेशा से गाय, गीता और गंगा के आधार पर चले आ रहे है फिर ऐसे में गाय को छोड़ना ठीक नही है। मध्य प्रदेश सरकार का गौ केबिनेट का फैसला पूरे देश के सामने एक उदाहरण है।

गाय को लेकर देश के अंदर एक अजीब विडंबना है। कोई इसे धर्म से जोड़ कर देखता है तो कोई इससे राजनीति से जोड़ता है जबकि सच्चाई तो यह है कि देश का हर नागरिक और किसी भी धर्म में पैदा हुआ बच्चा गाय का दूध पी कर ही बड़ा होता है अब वह दूध चाहे गौशाला से लेकर आओ या फिर किसी ब्रांडेड फ़ैक्टरी से लाओ। गायों की सुरक्षा और संरक्षण ज्यादातर हिन्दूओं के हिस्से में ही आता है जबकि उसका दूध सभी धर्म के लोग पीते है और अपने बच्चों को भी पिलाते है। वैज्ञानिकों ने भी गाय को लेकर कई अद्धभुत दावे किये है। वैज्ञानिकों ने कहा कि गाय की उपस्थिति मात्र से ही पर्यावरण को बहुत फायदा होता है। गाय का दूध, मूत्र, गोबर सब कुछ उपयोग में आने वाले है। गौ मूत्र से कई दावाएँ बनती है जिससे बड़े से बड़े रोग खत्म हो जाते है।गायों के महत्तव को पुराणों में भी बताया गया है इसलिए सभी राजा के पास हजारों की संख्या में गायें होती थी।

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार को भी अक्सर विपक्षी दल गायों के नाम पर घेरने की कोशिश करते रहते है और यह आरोप लगाते है कि योगी सरकार जनता से ज्यादा गायों से प्यार करती है हालांकि इसका असल सच्चाई से कोई लेना देना नहीं होता। अगर हम दो दशक पीछे की बात करें तो कृषि में सिर्फ खाद के नाम पर गोबर का इस्तेमाल किया जाता था और किसान की फसल अच्छी होती थी और वह स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी होती थी जबकि आज रासायनिक खादों की वजह से खेत और अनाज दोनों ही स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो गये है। देश के रासायनिक खादों की वजह से ही तेजी से कैंसर जैसी बिमारी बढ़ रही है। विशेषज्ञों की मानें तो गाय के गोबर में विटामिन B-12 प्रचुर मात्रा में पाया जाता है जिससे यह रेडियोधर्मिता को भी सोख लेता है।

गाय के दूध को लेकर एक कहावत है कि बच्चों को इसे पिलाने से उनकी बुद्धि तेज होती है। वैज्ञानिकों की तरफ से यह दावा किया गया है कि गाय का दूध हल्का पीला होता है क्योंकि उसमें क्योरोसिन नामक एक प्रोटीन होता है और इसको पीने से आरोग्यवर्धक, बुद्धिवर्धक, शीतलतादायक यानी की आंखों की रोशनी बढ़ती है। डाक्टर की तरफ से दावा किया गया है कि 1 लीटर गाय के दूध में 8 अंडे, 500 ग्राम मुर्गी का मांस और 750 ग्राम मछली के मांस के बराबर तत्व होता है। विटामिन और पोषक तत्वों के लिए मांस की जगह गाय के दूध का इस्तेमाल करना चाहिए। गाय के दूध में प्रचुर मात्रा में विटामिन और पोषक तत्व होते है और यह शरीर के लिए सुपाच्य और सात्विक होता है।

पहले गाय सिर्फ एक थी देसी गाय लेकिन दूध की बढ़ती मांग से जर्सी गाय को भी तेजी से बढ़ावा मिला है। जर्सी गाय देसी गाय की तुलना में कई गुना ज्यादा दूध देती है लेकिन जर्सी गाय के दूध के कई नुकसान भी है जैसे इसके लगातार सेवन से मधुमेह, गठिया, अस्थमा और मानसिक विकार जैसे रोगों के लोग शिकार हो रहे है। इसलिए अब लोग इसको लेकर भी जागरुक हो रहे है और जर्सी गाय के दूध का इस्तेमाल कम कर रहे है। अगर विश्व स्तर पर देखें तो न्यूजीलैंड, आस्ट्रेलिया, कोरिया, जापान और अमेरिका में देसी गाय का दूध और जर्सी गाय का दूध अलग अलग बिकता है। जर्सी की तुलना में देसी गाय का दूध काफी मंहगा होता है बावजूद इसके लोग देसी गाय के दूध का इस्तेमाल करते है क्योंकि इन देशों के लोग अब देसी गाय और जर्सी गाय के बीच का अंतर समझ चुके है लेकिन भारत में अभी भी लोग जर्सी गाय की तरफ तेजी से भाग रहे है। दुनिया भर में देसी गाय की जो भी नश्ले है वह सब भारत से ही गयी है।

गाय के इसी महत्तव को ध्यान में रखते हुए महान राष्ट्र चिंतक बाल गंगाधर तिलक ने कहा था कि “चाहे मुझे मार डालो लेकिन गाय पर हाथ ना उठाओ”

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